तुजुक ए जहाँगीरी या जहाँगीर नामा | Tuzk E Jahangiri In Hindi

तुजुक ए जहाँगीरी /Tuzk E Jahangiri  जहाँगीर नामा पुस्तक को जहाँगीर के संस्मरण, वाकियाते जहाँगीरी, तारीखे सलीम शाही, इकबालनामा आदि विभिन्न नामों से पुकारा जाता हैं. वस्तुतः जहाँगीर की आत्मकथा की अनेक प्रतिलिपियाँ विभिन्न नामों से भिन्न भिन्न स्थानों पर मिलती हैं.तुजुक ए जहाँगीरी या जहाँगीर नामा Tuzk E Jahangiri In Hindi

तुजुक ए जहाँगीरी या जहाँगीर नामा | Tuzk E Jahangiri In Hindi

Biography of Mughal emperor Jehangir autobiographyTuzk E Jahangiri In Hindi :  ब्रजरतन  दास के मतानुसार समग्र रूप में से इन सबका नाम तुजुक ए जहाँगीरी या जहाँगीर नामा होना चाहिए. इसकी रचना स्वयं जहाँगीर ने की अथवा उसके निर्देशानुसार अन्य किसी व्यक्ति ने लिपिबद्ध किया, यह कहना कठिन हैं.

इतना निश्चित हैं कि इसका बहुत सा भाग जहाँगीर ने लिखा हैं. इसके बाद यह काम मोतमिद खां को सौप दिया गया. विद्वानों के अनुसार जहाँगीर के शासन के आरम्भिक बारह वर्षों के संस्मरण उसने स्वयं लिखे. अठाहरवें वर्ष तक का हाल मोतमिद खां की सहायता से लिखा और बाद का हाल मोतमिद खां ने अन्य साधनों के आधार पर लिखा.

तुजुक ए जहाँगीरी या जहाँगीर नामा पुस्तक में जहाँगीर के अभियानों का विस्तृत विवरण दिया गया हैं. सभी अभियानों के लिए की गई तैयारियों, उनके मुख्य सेनापतियों और अन्य अधिकारीयों की नियुक्तियों, सेनाओं का पलायन, अभियान की घटनाओं एवं कठिनाइयों तथा शत्रु पक्ष की गतिविधियों का उल्लेख किया गया हैं.

जहाँगीर के शासनकाल में उठने वाले विद्रोहों तथा उनके दमन का विवरण भी दिया गया हैं. इस ग्रंथ में दरबार में मनाएं जाने वाले उत्सवों, भारत के प्राकृतिक सौदर्य, पेड़ पौधों, फलों, सब्जियों, पशु पक्षियों, आखेट, नगरों एवं दुर्गों, हिन्दुस्तान की अनेक प्रजातियों के खान पान रहन सहन, आदतों आदि का रोचक वर्णन किया गया हैं.

जहाँगीर ने अपने संस्मरणों में खुसरो, परवेज, शहरयार आदि विवादों का उल्लेख किया हैं परन्तु नूरजहाँ के साथ अपने विवाह कि परिस्थतियों का उल्लेख नहीं किया, हाँ उसने नूरजहाँ की बुद्धिमत्ता की काफ़ी प्रशंसा अवश्य की हैं.

डॉ बनारसीप्रसाद सक्सेना के मतानुसार तुजुक ए जहाँगीरी या जहाँगीरनामा ग्रंथ साहित्य और इतिहास दोनों दृष्टियों से मूल्यवान संपदा हैं. वे तो इसे अकबरनामा से अधिक आकर्षक मानते हैं. परन्तु अन्य विद्वानों के अनुसार जहाँगीर के अनेक स्थलों पर स्वयं को बराबर तथा अकबर को श्रेष्ठ दिखाने का प्रयास किया गया हैं.

ऐसे स्थानों पर वह कभी कभी उपहास का पात्र बन जाता हैं. यह ठीक हैं कि जहाँगीर ने कई स्थानों पर अपने दोषों जैसे कि मदिरापान तथा उसके द्वारा किये गये अत्याचार को स्वीकारा हैं.

लेकिन फिर भी उसने बहुत से निजी दोषों पर प्रकाश नहीं डाला हैं. इन दोषों के उपरान्त भी तुजुक ए जहाँगीरी या जहाँगीर नामा किताब जहाँगीर के काल की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण एवं विश्वसनीय ऐतिहासिक साधन हैं.

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