कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Female Foeticide Essay In Hindi

Female Foeticide (कन्या भ्रूण हत्या) Essay में आज हम स्टूडेंट्स के लिए कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Female Foeticide Essay In Hindi लेकर आए हैं. इस छोटे से 500 शब्दों के हिंदी निबंध में हमने भारत में वीभत्स रूप ले चुके Female Foeticide को Hindi Essay के रूप में आपके साथ प्रस्तुत किया गया हैं. उम्मीद करता हूँ मित्रों आपकों यह निबंध पसंद भी आएगा.

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध (Female Foeticide Essay In Hindi)Female Foeticide Essay In Hindi

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Female Foeticide Essay In Hindi In 250 Words

९० के दशक में विज्ञान ने पर्याप्त प्रगति की, मानव जीवन की उन्नति के नये नये साधनों का विकास हुआ. इस दौर में अल्ट्रासाउंड जैसी मशीनों के आविर्भाव के चलते भारत में कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में तेज गति से वृद्धि हुई.

मशीन की मदद से गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे नवजात के लिंग का पता मशीनों से लगाया जाना आरम्भ हो गया. जिसके चलते बेटे को जन्म देने के इच्छुक माता पिता इस तकनीक का गलत फायदा उठाकर लिंग जांच कर पता कर लेते थे कि गर्भ में बेटा है या बेटी. बेटी होने की स्थिति में उसे दुनियां में आने से पूर्व ही मार दिया जाता था.

इस कुरीति ने समाज पर बहुत घातक प्रभाव डाला, देश के कई राज्यों का लिंगानुपात गड़बड़ा गया. सरकार ने भी मशीनों द्वारा गर्भ जांच पर प्रतिबंध लगाया, मगर आज भी मानवता के दुश्मन कुछ डॉक्टर इस शर्मसार कार्य को अंजाम देने से नही हिचकते हैं. ऐसे ही वे अंधे माँ बाप हैं जो कन्या भ्रूण हत्या के लिए तैयार हो जाते वक्त ये भूल जाते है कि जिसकी कोख से उनहोंने जन्म लिया वह भी तो किसी की बेटी थी. आपकी पत्नी भी तो किसी की बेटी हैं.

कुल मिलाकर एक सभ्य समाज में लिंग परीक्षण तथा कन्या भ्रूण हत्या का कोई स्थान नहीं हैं. युवा पीढ़ी को द्कियानुची सोच को त्याग कर एक अच्छी सोच के साथ नयें समाज का निर्माण करना होगा. जिनमें बेटे बेटी को समान महत्व मिले.

Female Foeticide Essay In Hindi In 500 Words

परमात्मा की इस सर्ष्टी में मानव का विशेष महत्व है. उसमे नर और नारी का समानुपात नितांत वांछित है. नर और नारी दोनों के संसर्ग से भावी सन्तान का जन्म होता है तथा इस तरह यह स्रष्टि प्रक्रिया आगे बढ़ती है. परंतु वर्तमान काल में अनेक कारणों से नर-नारी के मध्य लिंग भेद का वीभत्स रूप सामने आ रहा है. जो कि पुरुष सतात्मक समाज में कन्या भ्रूण हत्या का पर्याय बनकर असमानता को बढ़ा रहा है. हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या आज अमानवीय कृत्य बन गया है, जो कि चिंतनीय विषय है.

कन्या भ्रूण हत्या के कारण-Female Foeticide In Hindi

भारतीय मध्यमवर्गीय समाज में कन्या जन्म को अमंगलकारी माना जाता है. क्युकि कन्या को पाल पोषकर उसका विवाह करना पड़ता है. इस निमित काफी धन खर्च हो जाता है. विशेषकर विवाह में दहेज आदि के कारण मुसीबतें आ जाती है. कन्या को पराया धन तथा पुत्र को कुल परम्परा को बढ़ाने वाला तथा वृद्धावस्था का सहारा मानते है.

इसी कारण ऐसे लोग कन्या को जन्म लेने नही देना चाहते है इन सब कारणों से पहले कुछ क्षेत्रों एवं जातियों में कन्या जन्म के समय ही उसे मार दिया जाता है. आज के यांत्रिक युग में अब भ्रूण हत्या के द्वारा कन्या के जन्म से पहले ही रोक दिया जाता है.

कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अपराध (kanya bhrun hatya)

वर्तमान में अल्ट्रासाउंड मशीन वस्तुत कन्या संहार का हथियार बन गया है. लोग इस मशीन की सहायता से लिंग भेद ज्ञात कर लेते है. और यदि गर्भ में कन्या हो तो कन्या भ्रूण को गिराकर नष्ट कर देते है. कन्या भ्रूण हत्या के कारण लिंगानुपात का संतुलन बिगड़ गया है.

कई राज्यों में लड़को की अपेक्षा लड़कियों की संख्या बीस से पच्चीस प्रतिशत तक कम है. इस कारण सुयोग्य युवकों की शादियाँ नही हो पा रही है. एक सर्वेक्षण के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन लगभग ढाई हजार कन्या भ्रूणों की हत्या की जाती है. हरियाणा, पंजाब, दिल्ली में इसकी विद्रूपता सर्वाधिक दिखाई देती है.

कन्या भ्रूण हत्या का अशिक्षा और गरीबी से उतना संबंध नही है. जितना कि दकियानूसी एवं स्वार्थी मध्यमवर्गीय समाज की अमानवीय सोच से है. लगता है कि ऐसे लोगों में लिंग चयन का मनोरोग निरंतर विकृत होकर उभर रहा है.

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के उपाय

भारत सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए अल्ट्रासाउंड मशीनों से लिंग ज्ञान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. इसके लिए प्रसवपूर्व निदान तकनिकी अधिनियम पी एन डी टी 1994 के रूप में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है. साथ ही नारी सशक्तिकरण , बालिका निशुल्क शिक्षा, पैतृक उतराधिकार, समानता का अधिकार आदि अनेक उपाय अपनाए गये है.

यदि भारतीय समाज में पुत्र और पुत्री में अंतर नही माना जावे तो कन्या जन्म को परिवार में मंगलकारी समझा जावें कन्या को घर की लक्ष्मी एवं सरस्वती मानकर उनका लालन पोषण किया जावे, तो कन्या भ्रूण हत्या पर प्रतिबंध स्वत ही लग जाएगा.

उपसंहार

वर्तमान में लिंग चयन एवं लिंगानुपात विषय पर काफी चिन्तन किया जा रहा है. सयुक्त राष्ट्रसंघ ने कन्या संरक्षण की घोषणा की है. भारत सरकार ने भी लिंगानुपात को ध्यान में रखकर कन्या भ्रूण हत्या पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया है. वस्तुतः कन्या भ्रूण हत्या का यह न्रशंस कृत्य पूरी तरह से समाप्त होना चाहिए.

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