कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Female Foeticide Essay In Hindi

Female Foeticide (कन्या भ्रूण हत्या) Essay परमात्मा की इस सर्ष्टी में मानव का विशेष महत्व है. उसमे नर और नारी का समानुपात नितांत वांछित है. नर और नारी दोनों के संसर्ग से भावी सन्तान का जन्म होता है तथा इस तरह यह स्रष्टि प्रक्रिया आगे बढ़ती है. परंतु वर्तमान काल में अनेक कारणों से नर-नारी के मध्य लिंग भेद का वीभत्स रूप सामने आ रहा है. जो कि पुरुष सतात्मक समाज में कन्या भ्रूण हत्या का पर्याय बनकर असमानता को बढ़ा रहा है. हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या आज अमानवीय कृत्य बन गया है, जो कि चिंतनीय विषय है.

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध (Female Foeticide Essay In Hindi)

कन्या भ्रूण हत्या के कारण-

भारतीय मध्यमवर्गीय समाज में कन्या जन्म को अमंगलकारी माना जाता है. क्युकि कन्या को पाल पोषकर उसका विवाह करना पड़ता है. इस निमित काफी धन खर्च हो जाता है. विशेषकर विवाह में दहेज आदि के कारण मुसीबतें आ जाती है. कन्या को पराया धन तथा पुत्र को कुल परम्परा को बढ़ाने वाला तथा वृद्धावस्था का सहारा मानते है.

इसी कारण ऐसे लोग कन्या को जन्म लेने नही देना चाहते है इन सब कारणों से पहले कुछ क्षेत्रों एवं जातियों में कन्या जन्म के समय ही उसे मार दिया जाता है. आज के यांत्रिक युग में अब भ्रूण हत्या के द्वारा कन्या के जन्म से पहले ही रोक दिया जाता है.

कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अपराध (kanya bhrun hatya)

वर्तमान में अल्ट्रासाउंड मशीन वस्तुत कन्या संहार का हथियार बन गया है. लोग इस मशीन की सहायता से लिंग भेद ज्ञात कर लेते है. और यदि गर्भ में कन्या हो तो कन्या भ्रूण को गिराकर नष्ट कर देते है. कन्या भ्रूण हत्या के कारण लिंगानुपात का संतुलन बिगड़ गया है.

कई राज्यों में लड़को की अपेक्षा लड़कियों की संख्या बीस से पच्चीस प्रतिशत तक कम है. इस कारण सुयोग्य युवकों की शादियाँ नही हो पा रही है. एक सर्वेक्षण के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन लगभग ढाई हजार कन्या भ्रूणों की हत्या की जाती है. हरियाणा, पंजाब, दिल्ली में इसकी विद्रूपता सर्वाधिक दिखाई देती है.

कन्या भ्रूण हत्या का अशिक्षा और गरीबी से उतना संबंध नही है. जितना कि दकियानूसी एवं स्वार्थी मध्यमवर्गीय समाज की अमानवीय सोच से है. लगता है कि ऐसे लोगों में लिंग चयन का मनोरोग निरंतर विकृत होकर उभर रहा है.

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के उपाय

भारत सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए अल्ट्रासाउंड मशीनों से लिंग ज्ञान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. इसके लिए प्रसवपूर्व निदान तकनिकी अधिनियम पी एन डी टी 1994 के रूप में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है. साथ ही नारी सशक्तिकरण , बालिका निशुल्क शिक्षा, पैतृक उतराधिकार, समानता का अधिकार आदि अनेक उपाय अपनाए गये है.

यदि भारतीय समाज में पुत्र और पुत्री में अंतर नही माना जावे तो कन्या जन्म को परिवार में मंगलकारी समझा जावें कन्या को घर की लक्ष्मी एवं सरस्वती मानकर उनका लालन पोषण किया जावे, तो कन्या भ्रूण हत्या पर प्रतिबंध स्वत ही लग जाएगा.

उपसंहार

वर्तमान में लिंग चयन एवं लिंगानुपात विषय पर काफी चिन्तन किया जा रहा है. सयुक्त राष्ट्रसंघ ने कन्या संरक्षण की घोषणा की है. भारत सरकार ने भी लिंगानुपात को ध्यान में रखकर कन्या भ्रूण हत्या पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया है. वस्तुतः कन्या भ्रूण हत्या का यह न्रशंस कृत्य पूरी तरह से समाप्त होना चाहिए.

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