दादू दयाल का जीवन परिचय | dadu dayal history in hindi

Biography & dadu dayal history in hindi दादू दयाल मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे. इनका जन्म विक्रम संवत् 1601 में फाल्गुन शुक्ला अष्टमी को अहमदाबाद में हुआ था. पूर्व में दादू दयाल का नाम महाबलि था. पत्नी की मृत्यु के बाद ये सन्यासी बन गये. अधिकाशतया ये सांभर व आमेर में रहने लगे.

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फतेहपुर सिकरी में अकबर से भेट के बाद आप भक्ति का प्रसार प्रसार करने लगे. राजस्थान में ये नारायणा में रहने लगे. 1603 में वही पर इन्होने अपनी देह का त्याग किया. दादूदयाल के 52 शिष्य थे इनमे से रज्जब, सुन्दरदास, जनगोपाल प्रमुख थे. जिन्होंने अपने गुरु की शिक्षाएँ जन जन तक फैलाई. इनकी शिक्षाएँ दादुवाणी में संग्रहित है.

दादू दयाल ने बहुत ही सरल भाषा में अपने विचारों की अभिव्यक्ति की है. इनके अनुसार ब्रह्मा से ओकार की उत्पति और ओंकार से पांच तत्वों की उत्पति हुई. माया के कारण ही आत्मा और परमात्मा के मध्य भेद होता है. दादू दयाल ने ईश्वर प्राप्ति के लिए गुरु को अत्यंत आवश्यक बताया.

अच्छी संगति, ईश्वर का स्मरण, अहंकार का त्याग, संयम एवं निर्भीक उपासना ही सच्चे साधन है. दादू दयाल ने विभिन्न प्रकार के सामाजिक आडम्बर, पाखंड एवं सामाजिक भेदभाव का खंडन किया. जीवन में सादगी, सफलता और निश्छलता पर विशेष बल दिया. सरल भाषा एवं विचारों के आधार पर दादू को राजस्थान का कबीर भी कहा जाता है.

Dadu Dayal Biography In Hindi

निर्गुण उपासना के समर्थक संत दादू बाहरी साधना से ध्यान हटाकर व्यक्तिगत साधना पर जोर देते थे. दादू ने ईश्वर की भक्ति को समाज सेवा और मानवीय दृष्टि से जोड़ा. दादू ने अहंकार से दूर रहकर विनम्रता से ईश्वर के प्रति समर्पित रहने की शिक्षा दी हैं. दादू ने बताया कि ईश्वर की प्राप्ति न केवल प्रेम और भक्ति के माध्यम से ही संभव हैं, बल्कि मानवता के प्रति सेवा से भी संभव हो सकती हैं.

दादू दयाल पहले सांभर व आमेर आकर रहने लगे. जयपुर के पास नरायणा गाँव में इनकी मृत्यु हुई. दादू पंथी गुरु को अधिक महत्व देते थे. इनके शिष्य विभिन्न धर्मों वर्गों एवं जातियों से संबंध थे. इनकी शिक्षाएं दादू दयाल री वाणी और दादू दयाल रा दूहा में संगृहीत हैं. दादू के अनुसार ब्रह्मा एक हैं और वह सब जगह हैं. sant dadu dayal bhajan दादू दयाल के दोहे से जुड़े अन्य लेख नीचे दिए गये हैं.

दादूपन्थ

कबीर जी के अनुयायी होने के कारण दादू दयाल जी आम जन तक उनके संदेश आम जन तक पहुचाते थे. भारत में यदि संत द्वारा शुरू किए किसी पन्थ में जुड़ने वाले लोगों का आंकड़ा दादू पंथ में सर्वाधिक हैं. इस पन्थ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें शामिल होने वाले अधिकतर संत पढ़े लिखे होते हैं.

कई बड़े नाम जिनमें सुंदरदास, जगजीवनदास, निश्चलदास जी को महान दादू पंथी संत कहा जाता हैं. इस पंथ के संतों ने मुख्य रूप से संत साहित्य के ग्रंथों, रचनाओं तथा पदावलियों तथा गुरुवाणियों को संरक्षित कर उनके प्रकाशन तथा संवर्धन का कार्य इन्होने किया.

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