रविदास का जीवन परिचय व इतिहास | Guru Ravidass Ji History, Biography In Hindi

रविदास का जीवन परिचय व इतिहास | Guru Ravidass Ji History, Biography In Hindi

संत रविदास जी महाराज: उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन की अलख जगाने वाले संत रविदास जी महाराज का नाम सर्वप्रथम लिया जाता हैं. जिन्हें रैदास भी कहा जाता हैं. जूते बनाने का पारम्परिक कार्य करने वाले परिवार में जन्मे गुरु रविदास ने समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. कबीर दास जी से इनकी काफी समानताएं हैं दोनों के गुरु रामानंद जी ही थे. माघ महीने की पूर्णिमा तिथि को रविदास जयंती मनाई जाती हैं. आपकों बता दे Guru Ravidass Jayanti 2019 में 19 फरवरी के दिन भारत में मनाई जानी हैं. इस लेख में रविदास का जीवन परिचय व इतिहास के बारे में संक्षिप्त विवरण दिया जा रहा हैं.


रविदास का जीवन परिचय व जीवनी


रविदास का जीवन परिचय व इतिहास | Guru Ravidass Ji History, Biography In Hindi
नाम   –  महान संत गुरु रविदास/रैदास 
जन्म – 1377 ई
जन्मस्थान – गोबर्धनपुर, काशी
पिता – संतो़ख दास (रग्घु)
माता – कलसा देवी
कार्य- समाज सुधारक, भक्त कवि
मृत्यु – 1540 ई काशी में

 


गुरु रविदास जी महाराज का इतिहास | Guru Ravidass Ji History In Hindi


रैदास जी कबीर के समकालीन भक्त कवि थे, जो रामानंद जी के परम शिष्य थे. तथा निर्गुण भक्ति उपासना के समर्थक थे. रविदास जी जाति पांति में विश्वास नही करते थे. वे बाहरी आडम्बरों को व्यर्थ समझते और मन की शुद्धता पर जोर देते थे. मानव समानता उनका प्रमुख सिद्धांत था. उनका कहना था कि

ऐसा चाहो राज में, जहाँ मिलें सबन को अन्न
छोट बड़ों सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न ||

ये काशी में ही कबीर जी के पास रहा करते थे. कबीर इनकों संतों का संत कहते थे. इनका का उपदेश था कि परमात्मा अपने भक्तों के ह्रदय में निवास करता हैं, उसे सिर्फ वही पा सकता हैं जिसने अपने अंदर दैवीय प्रेम की अनुभूति कर ली हैं.

उनका कहना था कि सभी में हरि हैं और सब हरि में हैं. वे यह भी मानते थे मन रहे चंगा तो कठौती में गंगा.

रविदासजी ने ईश्वर के प्रति आत्मसमर्पण का प्रचार किया तथा अवतारवाद का खंडन किया, उनके अनुयायियों ने रैदासी सम्प्रदाय स्थापित किया. मानव मात्र के कल्याण के लिए रविदास जी ने अपनी भक्ति संदेशों तथा उपदेशों के द्वारा जो सीख दी वों आज भी अमर हैं. भले ही उनका जन्म निचली जाति में हुआ हो अपने कर्म एवं अच्छे व्यवहार के चलते आज रामदास जी लाखों के पूजनीय हैं.

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