जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय | Annexation of Junagadh In Hindi

जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय Annexation of Junagadh In Hindi: जिन रियासतों का 15 अगस्त 1947 तक भारत में विलय नही हो सका, उनमे जूनागढ़ रियासत भी शामिल थी.

जो आजकल के गुजरात राज्य में स्थित है. स्वतंत्रता के समय जूनागढ़ का नवाब मोहबत खान था, जबकि अधिकाँश जनता गैर मुस्लिम थी.

भारत की जूनागढ़ रियासत का विलय Annexation of Junagadh In Hindi

जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय | Annexation of Junagadh In Hindi

पवित्र सोमनाथ मन्दिर और जैन तीर्थ गिरनार जूनागढ़ रियासत में ही आते थे. वे बेरावल इस रियासत का प्रमुख बन्दरगाह था.

1947 में ही शाहनवाज भुट्टों जूनागढ़ का दीवान बन गया. जो मुस्लिम लीग के नेता व पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का रिश्तेदार था.

जूनागढ़ रियासत का इतिहास (History of Junagadh Principality)

अपने दीवान के कहने पर नवाब ने अपनी रियासत का पाकिस्तान में विलय की घोषणा की. पाकिस्तान ने 13 सितम्बर 1947 को जूना गढ़ के पाकिस्तान में विलय को स्वीकार कर लिया.

वास्तव में पाकिस्तान जूना गढ़ का इस्तमोल जम्मू पर सौदेबाजी में करना चाहता था. पाकिस्तान द्वारा जूनागढ़ के स्वीकार करने की घटना ने सरदार पटेल को काफी आक्रोशित कर दिया.

जूनागढ़ रियासत के विलय में सरदार पटेल की भूमिका (The role of Sardar Patel in the merger of Junagadh principality)

सरदार ने जूनागढ़ के दो अधीनस्थ राज्यों मांगरोल व बाबरियावाद को भारत में विलय करने के लिए सैनिक टुकड़ी भेजी. दूसरी ओर जूनागढ़ में नवाब के खिलाफ बड़ा लोकप्रिय आंदोलन प्रारम्भ हो गया. इन सबसे घबराकर नवाब पाकिस्तान भाग गया.

कुछ समय बाद दीवान शाहनवाज जूनागढ़ का प्रशासन भारत को सौपने को ,मजबूर हो गया. भारत सरकार ने अपनी वैधानिक स्थति मजबूत करने के लिए फरवरी 1948 में जूना गढ़ में जनमत संग्रह करवाया, जिसके परिणामस्वरूप उसका भारत में विलय हो गया.

इस तरह जम्मू कश्मीर एवं  हैदराबाद के बाद जूनागढ़ ऐसी तीसरी रियासत थी, जो सरदार पटेल के अदम्य साहस के परिणामस्वरूप भारत में शामिल हुई. इसलिए सरदार पटेल को आधुनिक भारत का निर्माता अथवा लौह पुरुष कहा जाता है. 

जूनागढ रियासत की समस्या

भारत की सीमा में फैली हुई जूनागढ़ रियासत भारत का एक अभिन्न अंग है, लेकिन जब सितंबर 1947 में  जूना गढ़ की सरकार ने पाकिस्तान में विलय होना स्वीकार कर लिया था तब उनके इस फैसले से जूनागढ़ की जनता बहुत ही ज्यादा निराश थी। क्योंकि जूनागढ़ में रहने वाले अधिकतर लोग हिंदू थे ऐसे में पाकिस्तान में जाना उन्हें किसी हाल में गवारा नहीं था। 

हिंदू लोगों का पाकिस्तान में रह पाना बहुत मुश्किल था। इसीलिए जूनागढ़ के लोग पाकिस्तान जाना नहीं चाहते थे। और इतने लंबे समय से भारत का हिस्सा होने के बाद जूनागढ़ के निवासी भी भारत को ही अपना देश मानते थे। ‌

इसीलिए जूना गढ़ के नवाब द्वारा लिए गए इस बड़े फैसले से गुस्से में आई जनता ने रियासत के खिलाफ विद्रोह किया। जूनागढ़ के जनता द्वारा की गई बगावत के कारण जूनागढ़ में स्वतंत्र अस्थाई हुकूमत की स्थापना हुई 

जूनागढ़ के लोगों द्वारा उठाए गए कदम के बाद भारतीय सरकार ने भी जूना गढ़ के नवाब की काफी निंदा की गई जिसके कारण शर्मिंदा होकर नवाब पाकिस्तान भाग गया।

आखिर क्यों जूना गढ़ में जनमत संग्रह कराया गया

जूना गढ़ में जनमत संग्रह कराने के पीछे सबसे बड़ा कारण जूनागढ़ की जनता की राय लेना था। क्योंकि आजादी के बाद जब सभी रियासतों को सरकार देश में शामिल कर रही थी, तब उस समय जूना गढ़ के नवाब ने बिना जनता की राय लिए पाकिस्तान में विलय होने का फैसला सुना दिया। 

जूना गढ़ के नवाब की इस बात से जूना गढ़ की जनता बहुत निराश थी जिसके कारण उन्होंने नवाब के खिलाफ आंदोलन कर दिया। इस आंदोलन ने नवाब को अपना फैसला बदलने और पाकिस्तान जाने के लिए मजबूर कर दिया। 

जूनागढ़ की जनता की राय

आजादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल 500 से ज्यादा रियायतो को हिंदुस्तान और पाकिस्तान में विलय कर रहे थे तब उस समय जूनागढ़ के विलय में काफी परेशानी आई क्योंकि उस समय जूना गढ़ के नवाब जिनका नाम मोहम्मत महाबत खानजी तृतीय रसूल खानजी था वह जूनागढ़ को भारत में विलय करने में आनाकानी कर रहे थे। 

जूना गढ़ के नवाब चाहते थे कि भारत का विलय पाकिस्तान में हो जाए लेकिन जूनागढ़ की जनता जिसमें भारी संख्या में हिंदू लोग थे वे ऐसा नहीं चाहते थे। तब नवाब ने जूना गढ़ की जनता की राय ली और जानने की कोशिश की कि कितने प्रतिशत में लोग पाकिस्तान में जूनागढ़ का विलय चाहते हैं और कितने लोग हिंदुस्तान में जूना गढ़ का विलय चाहते हैं।

जब यह राय जनता से ली गई तब परिणाम यह निकला कि 80% जनता चाहती थी कि जूनागढ़ का विलय भारत में हो। जूनागढ़ के जनता द्वारा प्रदान की गई इस राय के बाद सभी लोग जूना गढ़ के नवाब के फैसले की बुराई कर रहे थे जिसके फलस्वरूप नवाब को हार मानना पड़ा‌ और जूनागढ़ छोड़कर पाकिस्तान जाना पड़ा। 

जूनागढ़ की जनता की राय लेने के बाद जूनागढ़ में एक स्वतंत्र सत्ता की स्थापना ही हुई जिसके कुछ समय बाद ही जूनागढ़ का भी भारत में विलय हो गया। ‌ 

जूनागढ़ रियासत पाकिस्तान के बजाय भारत में कैसे शामिल हुयी?

जूना गढ़ के नवाब ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में विलय करने का जब निर्णय लिया तब जूनागढ़ की जनता की ना मंजूरी के बाद जूनागढ़ एक स्वतंत्र रियासत बन गई थी लेकिन जब शाह नवाज़ भुट्टो जूनागढ़ के प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने हिंदुओं की राय को ध्यान में रखते हुए भारतीय सरकार को जूनागढ़ रियासत को भारत में विलय करने के लिए एक चिट्ठी लिखी। 

शाहनवाज भुट्टो द्वारा सरकार को लिखी गई इस चिट्ठी को भारतीय सरकार ने स्वीकार कर लिया और जूना गढ़ को भारत में मिला लिया। भारतीय सरकार ने जूना गढ़ को 9 नवंबर 1947 में भारत में मिला लिया।

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