कैबिनेट मिशन योजना क्या थी | Cabinet Mission Plan 1946 In Hindi

कैबिनेट मिशन योजना क्या थी Cabinet Mission Plan 1946 In Hindi:  ब्रिटिश  सरकार ने भारतीयों  को   सत्ता  का हस्तांतरण के उपाय खोजने के लिए 19 फरवरी 1946 को कैबिनेट मिशन भारत भेजने की घोषणा की गई. कैबिनट मिशन 24 मार्च 1946 को भारत आया जिसके सदस्य पैथिक लोरेन्स, स्टैफोर्ड क्रिप्स तथा ए वी अलेक्जेंडर थे.

कैबिनेट मिशन योजना क्या थी | Cabinet Mission Plan 1946 In Hindi

कैबिनेट मिशन योजना क्या थी | Cabinet Mission Plan 1946 In Hindi

16 मई 1946 को इस मिशन ने एक योजना पेश की जिसे मंत्रीमंडल मिशन योजना कहते हैं.

कैबिनेट मिशन का भारत आगमन

लार्ड पैथिक लोरेंस के द्वारा साल 1946 में 19 फरवरी के दिन कैबिनेट मिशन को भारत में लाने की घोषणा की गई थी और तकरीबन 1 महीने के बाद साल 1946 में ही 24 मार्च के दिन यह मिशन भारत की राजधानी नई दिल्ली राज्य में प्रस्तुत किया गया। 

कैबिनेट मिशन के शिष्टमंडल में टोटल 3 मेंबर थे जिसमें भारत के सचिव लॉर्ड पैथिक लोरेंस, बिजनेस बोर्ड के अध्यक्ष 

स्टैफर्ड क्रिप्स और एबी एलेग्जेंडर थे, जो कि नौसेना के प्रमुख थे। कैबिनेट मिशन जब दिल्ली आया था तब यहां पर अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों से इनकी वार्ता हुई थी।

 परंतु बातचीत के बावजूद भी भारत की एकता और बंटवारे के विषय में कोई भी समझौता नहीं हो पाया था। यही वजह है कि संवैधानिक दिक्कतों के लिए शिष्टमंडल ने अपनी तरफ से कुछ हल बताए थे। यह प्रस्ताव साल 1946 में 16 मई के दिन लॉर्ड वेवल और कुछ अन्य मेंबर के द्वारा प्रकाशित किया गया था।

कैबिनेट मिशन के अंतरिम सरकार पर कांग्रेस का राजी ना होना

शिष्टमंडल ने यह सुझाव दिया था कि एक ऐसी अंतरिम गवर्नमेंट तैयार की जाए, जिसे जो मुख्य पॉलिटिकल दल हैं वह सपोर्ट करें और इसमें सभी डिपार्टमेंट इंडियन पोलिटिकल नेताओं के हाथ में ही हो।

 बता दें कि कांग्रेस कैबिनेट मिशन के द्वारा प्रस्तुत की गई संविधान सभा से संबंधित प्रस्ताव पर मान गई थी परंतु कांग्रेस ने अंतरिम सरकार को बनाने से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, जिसके पीछे वजह यह थी कि मुस्लिम लीग को उसमें ज्यादा ही प्रतिनिधित्व दिया गया था।

मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन को अस्वीकार किया

साल 1946 में 6 जून को पहले तो मुस्लिम लीग के द्वारा कैबिनेट मिशन को एक्सेप्ट कर लिया गया था परंतु 29 जुलाई के दिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया था और फिर पाकिस्तान को बनाने के लिए उन्होंने सीधा मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की थी।

कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान की डिमांड को मना किया

कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान की डिमांड को मानने से मना कर दिया था जिसमें पहला कारण यह था कि जो लोग मुसलमान नहीं है, उनकी प्रॉब्लम का समाधान पाकिस्तान बनने से नहीं हो पाएगा। इसके अलावा कैबिनेट मिशन के द्वारा पाकिस्तान की डिमांड को ना मानने का दूसरा कारण यह था कि भारत की जो संचार और डाक व्यवस्था है, उसे अलग-थलग करने से कोई फायदा नहीं होगा

तीसरा कारण यह है कि अगर सेना को बांटा जाएगा, तो देश को बहुत ही ज्यादा नुकसान होगा, साथ ही बता दें कि कैबिनेट मिशन ने इस कारण से भी पाकिस्तान की डिमांड को मना कर दिया क्योंकि रियासतों को एक या फिर दूसरे संघ में शामिल करना बहुत ही मुश्किल होगा।

कैबिनेट मिशन योजना की सिफारिशे

वेवेल योजना की असफलता के बाद 19 फरवरी 1946 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने भारत में राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए मंत्रीमंडल का एक शिष्टमंडल भारत भेजने की घोषणा की जिसमें पैथिक लोरेंस, स्टेफोर्ड क्रिप्स और ए वी अले-क्जेंडर शामिल थे. यह शिष्टमंडल 1946 को दिल्ली पहुचा. इसकी रिपोर्ट 16 मई 1946 को प्रकाशित हुई. इस योजना की निम्नलिखित सिफारिशे थी.

  1. भारत में अंग्रेजी भारत और रियासतों को मिलाकर एक भारतीय संघ का गठन किया जाए, जो विदेशी मामले, रक्षा और संचार साधनों की देखभाल करेगा और कर के द्वारा धन जुटाने का अधिकार भी संघ के पास होगा.
  2. संघ से सम्बन्धित विषयों के अतिरिक्त सभी विषय तथा सभी अवशिष्ट शक्तियाँ का अधिकार प्रान्तों में निहित रहेगा.
  3. इस संघ की कार्यकारिणी और विधानमंडल में ब्रिटिश भारत और रियासतों के प्रतिनिधि होने चाहिए.
  4. प्रान्तों को कार्यपालिका और विधायिका के साथ समूह बनाने की छूट होगी और प्रत्येक समूह सर्वमान्य प्रांतीय विषयों का निर्धारण कर सकता हैं.
  5. प्रान्तों को छोटे बड़े गुट लगाने का अधिकार होगा और गुटों के क्या अधिकार होंगे इसका निर्णय भी प्रान्त ही करेगे.
  6. सभी दलों के सहयोग से शीघ्र ही एक अंतरिम सरकार की स्थापना होगी. जिसमें सभी विभाग भारतीय नेताओं के पास होंगे. एक अंतरिम सरकार की स्थापना की जाएगी, जिनमें 14 सदस्य होंगे इनमें से 6 कांग्रेसी, 5 मुस्लिम लीग, एक भारतीय इसाई एक सिख और एक पारसी होगा.
  7. संविधान निर्माण के लिए एक संविधान सभा होगी जिसमें प्रत्येक 10 लाख की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि चुना जाएगा.
  8. संघ एवं समूहों के संविधानों ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिसके द्वारा कोई भी प्रान्त अपनी विधानसभा के बहुमत से 10 वर्ष की प्रारम्भिक अवधि के पश्चात और उसके बाद प्रत्येक 10 वर्ष के बाद संविधान की शर्तों पर पुनर्विचार कर सकेगा.
  9. भारतीय संविधान तथा ब्रिटेन के बीच सत्ता हस्तांतरण के फलस्वरूप उठने वाले मामलों के संबंध में एक संधि होगी.
  10. केबिनेट मिशन ने स्पष्ट कर दिया कि उसका उद्देश्य संविधान का विवरण निशिचत करना नहीं है बल्कि उस तंत्र को सक्रिय करना है जिसके द्वारा भारतीयों के लिए संविधान बनाया जा सके.

कैबिनेट मिशन योजना के गुण एवं दोष

केबिनेट मिशन योजना में जहाँ गुण थे वहीँ इसमें कुछ दोष भी थे.

गुण

  1. इस योजना का मुख्य गुण यह था कि संविधान तथा लोकतंत्रवादी सिद्धांत जनसंख्या पर आधारित था और इसके अलावा साम्प्रदायिक प्रश्न का बहुसंख्या के आधार पर निर्णय किया गया था.
  2. पाकिस्तान का विचार पूर्णतया छोड़ दिया गया था इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण बात यह थी कि संविधान सभा के सदस्य ब्रिटिश सरकार या यूरोपीय नहीं थे.
  3. महात्मा गांधी ने इसके गुण को बताते हुए कहा कि यह उन परिस्थतियों में ब्रिटिश सरकार या यूरोपीय नहीं थे.
  4. महात्मा गांधी ने इसके गुण को बताते हुए कहा कि यह उन परिस्थतियों में ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली सर्वश्रेष्ट योजना थी.

दोष

  1. कैबिनेट योजना के अंतर्गत सीधे तौर पर पाकिस्तान की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था, परन्तु रियासतों को आत्म निर्णय का अधिकार देकर पाकिस्तान की मांग को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर लिया था.
  2. मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा तो की गई परन्तु पंजाब में सिखों के हितों की रक्षा नहीं की गई.
  3. योजना में प्रान्तों के लिए अनिवार्य वर्ग बनाने और केंद्र को दिए जाने वाले 3 विषयों को छोड़कर शेष विषयों को प्रान्तों के पास रखा गया था और प्रान्तों के अधिकारों में वृद्धि हो गई थी जो राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा हो सकती थी.
  4. प्रान्तों के गुटों के विषय में मतभेद पैदा हो गया था मुस्लिम लीग गुट बनाने को आवश्यक समझती थी परन्तु कांग्रेसी इन्हें वैकल्पिक रूप समझ रहे थे.
  5. संविधान बनाने की प्रक्रिया भी विचित्र सी प्रतीत होती थी क्योंकि पहले गुटों और प्रान्तों का संविधान बनाना था फिर केंद्र का संविधान बनाना था.

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