चारमीनार पर निबंध Essay On Charminar In Hindi

Essay On Charminar In Hindi नमस्कार मित्रों आज हम हैदराबाद की ऐतिहासिक ईमारत चारमीनार के विषय में जानकारी इस निबंध में प्राप्त करेगे. 16 वीं सदी में हैदराबाद शहर के मध्य में स्थित इस ईमारत का निर्माण कुतुब शाह ने करवाया था. short essay on charminar in hindi Language में हम संक्षिप्त में निबंध बता रहे हैं.

चारमीनार पर निबंध Essay On Charminar In Hindi

चारमीनार पर निबंध Essay On Charminar In Hindi

यह इमारत चार सौ वर्ष प्राचीन है जिसे कुली क़ुतुब शाह ने बनवाया था, जब शाही क़ुतुब वंश के पांचवें वंशज क़ुतुब शाह ने अपनी राजधानी गोलकुंडा से हैदराबाद स्थानांतरित की तब उसने स्मृति के रूप में चारमीनार को बनवाया था. यह भी कहा जाता हैं. शाह को प्लेग की मार के चलते हैदराबाद की स्थापना करनी पड़ी तथा उसी में उसने ईश्वर के स्मरण के लिए एक एक प्रार्थना स्थल के रूप में चारमीनार बनवाई.

वहीँ कुछ लोग मानते हैं कताजमहल की तरह की प्रेम की निशानी के रूप में स्मारक हैं. शाह ने यहाँ अपनी प्रेमिका के दर्शन किये थे इसी की स्मृति में इमारत को खड़ा किया गया. मगर यह कहानी ऐतिहासिक साक्ष्यों एवं तिथि क्रम के मुताबिक़ सही नहीं बैठता हैं. यह सर्वमान्य है तथा इसके सम्बन्ध में साक्ष्य भी मिलता है कि चारमीनार का निर्माण हैदराबाद की स्थापना के समय से ही हुआ था.

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चारमीनार हैदराबाद शहर के मध्य में स्थित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारत हैं. इसकी गिनती भारत के शीर्ष दर्शनीय स्थलों में की जाती है. वर्तमान में यह हैदराबाद शहर की पहचान के रूप में विख्यात है चारमीनार का शाब्दिक अर्थ होता है ऐसा भवन या मस्जिद जिसके चार मीनार अथवा स्तम्भ हो.

सन् 1592 में मुहम्मद कुली कुतब शाह ने उस वक्त चार मीनार बनाई जब उसने अपनी राजधानी को गोलकुंडा से हैदराबाद में बसाया था. बताते है कि जब शाह का राज्य पूरी तरह प्लेग की भेंट चढ़ गया, अनगिनत लोग मारे जा रहे थे तो उसने अल्लाह से यह याचना कि थी कि यदि राज्य में प्लेग का प्रकोप खत्म हो गया तो वह एक पूजा स्थल बनाएगा.

लोग बताते है कि चार मीनार के नीचे एक संकटकालीन सुरंग बनी हुई है जो हैदराबाद से होकर गोलकुंडा के महलों तक जाती हैं मगर अब तक इसके सम्बंध में कोई साक्ष्य नहीं मिला हैं. वर्गाकार आकृति में बनी इमारत बेहद सुंदर व आकर्षक हैं. इसकी लम्बाई व चौड़ाई 20-20 मीटर जबकि ऊँचाई 49 मीटर हैं.

इसकी प्रत्येक मीनार चार मंजिली है तथा इस पर चढने के लिए एक सौ पचास के तकरीबन घुमावदार सीढ़ियाँ बनी हुई है बाहर से आने वाले पर्यटक इन सीढ़ियों की मदद से ऊपर तक जा सकते हैं. इसके हर ओर मेहराबदार चौक बना हुआ है जो 11 मीटर तक चौड़ा है. वर्ष 1889 में इन चारों मेहराबों पर एक एक घड़ी लगवाई गई थी.

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जिसे देखकर नमाज का वक्त तय होता है. चारमीनार के अंदर जाने पर दो बड़ी गैलरी मिलती है जिनमें प्रत्येक गैलरी में 50 व्यक्ति एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं. शुक्रवार के दिन जुम्मे की नमाज यहाँ आयोजित की जाती हैं. इस इमारत का निर्माण ग्रेनाईट के पत्थर व चूने को मिलाकर पांच सौ वर्ष पूर्व किया गया था.

कैजिया नामक वास्तुकला विधि से इसका निर्माण करवाया गया था, एक समय आकाशीय बिजली के गिरने से चारमीनार का एक बड़ा भाग ढह गया. मुगलों ने इसका प्रथम बार 6 हजार रूपये खर्च करके पुनरुद्धार करवाया, वर्ष 1824 में एक लाख रूपये की रकम खर्च कर इस पर प्लास्टर करवाया गया था.

इस तरह चारमीनार महत्वपूर्ण एवं आकर्षक ऐतिहासिक इमारत हैं. जो अपनी नक्काशी, वास्तुकला का बनावट के लिए विश्व विख्यात हैं. बड़ी संख्या में देशी विदेशी पर्यटक इसे देखने के लिए आते हैं. रात की जगमगाती दुधिया रौशनी में इसका नजारा देखने लायक होता हैं.

यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए चारमीनार का बाजार भी आकर्षण का केंद्र रहता हैं. जहाँ प्रत्येक वस्तु आसानी से मिल जाती हैं, विविध रंगों की चमकीली चूड़ियाँ प्रसिद्ध हैं अपने उत्कर्ष दौर में यहाँ चौदह हजार दुकाने लगा करती थी राज्य भर के लोग यहाँ खरीददारी के लिए आया करते थे. इसमें कोई दोराय नहीं हैं कि चारमीनार एक अद्भुत, आकर्षक एवं बेजोड़ दर्शनीय स्थल हैं.

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इस इमारत का धार्मिक दृष्टि से भी बड़ा महत्व माना गया हैं. क़ुतुब शाह ने मुहंमागी रकम देकर इसे अपने अल्लाह के लिए बनाया था. जहाँ हर शुक्रवार को नमाज अदा की जाती है तथा ईद के अवसर पर दूर दूर से लोग यहाँ आकर ईद की नमाज अदा करते हैं. हैदराबाद के जन्म से यह इमारत शहर की प्राचीनता, इसके वैभव व इतिहास को बया करती प्रतीत होती हैं.

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