ताड़ासन क्या है करने की विधि और लाभ | Tadasana Yoga in Hindi

ताड़ासन क्या है करने की विधि और लाभ | Tadasana Yoga in Hindi: हम मन तथा मस्तिष्क के अच्छे स्वास्थ्य के लिए योग करते हैं. योगासान के कई प्रकार है सभी के करने के अलग अलग तरीके और लाभ हैं. यदि आप height increase tips के रूप में किसी yoga asanas के बारे में जानना चाहते हैं. तो ताड़ासन का आसन आप नित्य कर इससे आप अपनी उंचाई को आसानी से बढ़ा सकते हैं. शरीर में लचकता तथा चौड़ी छाती बनाने में भी ताड़ासन मददगार हैं. इस योगा आसन के बारे में अधिक जानते हैं.

ताड़ासन क्या है करने की विधि और लाभ | Tadasana Yoga in Hindi

ताड़ासन क्या है करने की विधि और लाभ | Tadasana Yoga in Hindi

इस आसन में शरीर को ताड़ के वृक्ष की तरह खींचते हैं, इसलिए इसका नाम ताड़ासन हैं. ताड़ का एक पेड़ और हिमालय को भी संस्कृत में ताड़ कहा जाता हैं. इस लिहाज से इसका नाम रखा गया होगा. मगर दोनों में यही समानता है कि तनकर खड़े रहते हैं. जैसा कि चित्र में दिखाया गया हैं.

ताड़ासन की विधि (Steps To Do Tadasan in Hindi)

आसन की विधि- दोनों एड़ी पंजे जोड़कर दोनों हाथ जंघा के बराबर में खीचे रहेगे. पूरक के साथ धीरे धीरे दोनों हाथ बाजू से ऊपर खीचेगे. हाथों को नमस्कार की स्थिति में जोड़कर ऊपर की ओर अधिकतम खीचेगे और एड़ियाँ उठाकर पंजो के बल शरीर का नियंत्रण करेगे. इस प्रकार पंजों पर शरीर का संतुलन बनाते हुए अन्तः कुंभक में अधिकतम रूकने का प्रयास करेगे. उसके बाद बाजू से ही रेचक के साथ हाथ वापिस लाएगे.

ताड़ासन करने के लिए समय और अवधि (Tadasana in Hindi)

पूर्ण स्थिति में अंतकुंभक में अधिकतम रूकना अथवा सामान्य श्वास में दस मिनट तक रूकना चाहिए.  जिन लोगों को चक्कर आते हैं उन्हें विशेष कर ताड़ासन बिना किसी विशेयज्ञ की सलाह के लिए नहीं करना चाहिए. ताड़ासन करने का सबसे सही समय सुबह का होता हैं.

सुबह के समय इसे करने से दुगुना लाभ प्राप्त होता हैं. यदि सवेरे आपकों वक्त नहीं मिल पाता हैं तो आप इसे दिन के किसी भी समय कर सकते हैं. इस बात का ध्यान रखे कि खाना खाने केव तुरंत बाद ताड़ासन नहीं करना चाहिए. शुरुआत में इस आसन का दो तीन बार ही अभ्यास करें, यदि आप अधिक थक रहे हैं तो बीच में छोटा अंतराल लेकर इसे जारी रखे.

ताड़ासन करने के लाभ- Tadasana Benefits in Hindi

यह आसन मेरुदंड का टेडापन दूर करता हैं. शौच शुद्धि से आमाशय व आंतें मुलायम होती हैं. कद बढ़ाने के लिए यह सर्वोत्तम आसन हैं. इस आसन से शरीर के कंपन रोग में लाभ पहुचता हैं. जंघा, पिंडलियाँ और पंजे मजबूत होते हैं. अतः शारीरिक थकावट की अनुभूति नहीं होती हैं. नस नाड़ियों में खिचाव पड़ने से रक्त संचरण की प्रक्रिया में निरंतर सुधार होता हैं.

अंतः कुंभक के साथ करने पर सीना चौड़ा होता है तथा श्वास से संबंधित रोगों में लाभ मिलता हैं. मोटे तौर पर इन फायदों हाइट बढ़ाने के लिए, वजन कम करने के लिए, घुटनों के दर्द को कम करने के लिए, नसों व मांसपेशियों की मजबूती तथा पैरों की मजबूती के लिए यह आसन किया जाता हैं.

तिर्यक ताड़ासन क्या होता है (Step Of Tiryak Tadasana in Hindi)

  1. सीधे खड़े होकर अपने दोनों पैरों के मध्य डेढ़ फीट का फासला रखे.
  2. यह ताड़ासन का ही रूप है मगर इस आसन में शरीर को एक तरफ झुकाया जाता हैं.
  3. गहरी सांस लेकर इसे अपने रखे तथा सम्पूर्ण शरीर को तान ले, इसके बाद सांस को धीरे धीरे छोड़ते हुए किसी एक तरफ अपने शरीर को झुकाएं.
  4. शरीर को पूरा झुकाने के बाद कुछ पल तक रूकने का प्रयत्न करे, इस दौरान आपकी सांस टूट जाएगी. इसलिए जितना समय झुका रह सके उतने ही रहे.
  5. इस क्रम को फिर से दोहराते हुए अब दूसरी बार करें यदि पहली बार शरीर दाई तरफ झुकाया है तो इस बार बाएँ झुके.
  6. कमर को घुमाएं बिना चार पांच बार दोनों तरफ बारी बारी से झुकने का अभ्यास करे, ध्यान रहे. इस तिर्यक ताड़ासन में शरीर को आगे व पीछे की ओर बिलकुल नहीं झुकाया जाता हैं.
  7. तिर्यक ताड़ासन से खासकर मास्पेशियाँ मजबूत होती हैं. तथा इसके कई अन्य फायदे भी हैं.

ताड़ासन के नुकसान सावधानियाँ – Tadasana precautions in Hindi

वैसे तो ताड़ासन सभी उम्र के लोगों मसलन बच्चों युवाओं वृद्धों और महिलाओं के लिए लगातार स्वास्थ्य लाभ हासिल करने की एक युक्ति हैं. फिर भी कुछ स्थतियों में इसे न करने की सलाह दी जाती हैं.

जैसे उन लोगों को यह योगाभ्यास करने से बचना चाहिए जिनकें घुटने बहुत अधिक दर्द करते हो. साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को इससे करने से बचना चाहिए. जब कभी जोर से सिर दर्द की समस्या हो रही हो ऐसे में भी ताड़ासन का अभ्यास नहीं करना बेहतर विकल्प हैं.

शुरू शुरू में इसकी शुरुआत करते समय शरीर को धीमे धीमे मोड़ना चाहिए, कई दिनों के अभ्यास के बाद पैरों की अँगुलियों तक आपने हाथों को पंहुचा सकते हैं. इस योगासन के अभ्यास से उन लोगों को भी परहेज रखनी चाहिए जिन्हें ब्लड प्रेशर की कम या अधिक होने की समस्या बनी रहती हैं.

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