पिता दिवस पर निबंध 2021 Essay on Fathers Day In Hindi

नमस्कार, पिता दिवस पर निबंध 2021 Essay on Fathers Day In Hindi के लेख में आपका स्वागत हैं. इस वर्ष हम 20 जून को पितृ दिवस मना रहे हैं. फादर्स डे पर निबंध स्पीच यहाँ सरल भाषा में स्टूडेंट्स के लिए दिया गया हैं. हम उम्मीद करते हैं. फादर्स डे 2021 पर दिया गया निबंध आपकों पसंद आएगा.

पिता दिवस पर निबंध 2021 Essay on Fathers Day In Hindi

पिता दिवस पर निबंध 2021 Essay on Fathers Day In Hindi

रविवार को भारत में फादर्स डे (पितृ दिवस) मनाया जाएगा. यह पश्चिम संस्क्रति और सभ्यता का एक त्यौहार हैं , जिन्हेँ अमेरिका यूरोप सहित दुनिया के लगभग सभी देशो में मनाया जाता हैं |

इस दिन पिता के योगदान को याद कर उन्हें सम्मानित कर उपहार भेट कर उनकी लम्बी आयु की कामना की जाती हैं, दुनिया भर में इस दिन सरकारी अवकाश घोषित होता हैं, संयोगवश इस वर्ष रविवार को फादर्स डे होने के कारण भारत में अधिकतर दफ्तर बंद रहेगे |

भारतीय सभ्यता में माता-पिता को भगवान् का दर्जा प्राप्त हैं ,बदलते वैश्विक परिद्रश्य में हमारी नईं पीढ़ी इन गुणों को भूलती जा रही हैं, मगर फादर्स डे विशेष रूप से उन्ही को समर्पित हैं.

पितृत्व-बंधन को याद करने हेतु फादर डे विश्व के सभी देशो में जून महीने के तीसरे अथवा चौथे सप्ताह में प्रतिवर्ष मनाया जाता हैं | मदर्स डे की तरह ही इसमें भी पिता को उनकें पसंद की चीज भेट कर अच्छे प्रोग्राम आयोजित किये जाते हैं | इस दिन को मनाने के पीछे 100 साल पुरानीं कहानी हैं, इसकी पितृ दिवस शुरुआत इसी घटना के बाद हुई |

जिसमे जुलाई के पहले सप्ताह 1908 इसे पहली बार अमेरिका और यूरोप में एक साल पहले मारे गयें खान पिताओं की याद में मनाना शुरू किया गया | वर्जीनिया की एक कोयले की खान में 200 से अधिक मजदुर काम कर रहे थे. किसी कारणवश उस खान के ढह जाने से इन सभी की म्रत्यु हो गईं थी. इन्ही पिताओ को याद करने के लिए यह पितृ दिवस मनाया जाता हैं |

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उनके माता-पिता का अहम योगदान होता हैं, माँ को प्रत्येक सभ्यता और संस्क्रति में उच्च स्थान दिया गया खासकर हमारी सभ्यता और संस्क्रती में. जिनकी वो हकदार भी हैं |

मगर जो इंसान स्वय भूखा प्यासा परेशान रहकर अपनीं सन्तान को समय और भोजन और अच्छी शिक्षा का दिलाने का प्रयत्न करता हैं. उन्हें भी उतना ही सम्मान मिलना चाहिए जितना माताजी को मिलता हैं |

मेरे पिताजी में वे सारे गुण हैं, जो एक आदर्श पिता में होने चाहिए | मेरे लिए मेरे पिता भगवान् से भी बढ़कर हैं. वे न सिर्फ पिता हैं बल्कि मेरे अच्छे मित्र मार्गदर्शक और गुरु भी हैं |

वो किसी भी हालात में किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए , क्या सही हैं क्या गलत | किस समय क्या करना चाहिए ? जैसे मुश्किल सवालों के सही मार्गदर्शन मुझे अपने पिता से ही मिला हैं |

अनुशासित जीवन जीने की शिक्षा पिताजी ने ही सिखाई हैं, वे स्वय अनुशासन में रहते हैं उनकी दिनचर्या में कही आलसीपन या काम को टालने का तरीका मेने आज तक नही देखा |

इन्ही को देखकर मेरी दिनचर्या भी अनुशासित और कार्य समय पर पूरा करने की आदते विकसित हुई हैं, वे माहोल के मुताबिक व्यवहार करना जानते हैं, प्रेम करते हैं तो कुछ गलत होने पर डाटते भी हैं, उनकी डाट शुरुआत में तो अच्छी नही लगती थी. मगर धीरे-धीरे समझ आने लगा | वो मेरे अच्छे के लिए ऐसा करते हैं |

कोई भी पिता अपने बेटे-बेटी की शिक्षा परिवार के भरन-पोषण के लिए अपनी पूरी जिन्दगी लगा देता हैं, चाहे उन्हें कमाने में हजारो मुशिकले उठानी पड़ी हो या कर्जा लिया हो . वो हमेशा अपने परिवार की बेहतरी के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं |

फादर्स डे 2021 पर निबंध एस्से इन हिंदी

दुनिया के अपरिभाषित शब्दों में पिता शब्द भी शामिल है। व्यक्ति की जिंदगी में पिता वह शख्स है जो अपनी संतान की उन्नति तथा प्रगति खुद से ज्यादा चाहता है। पिता ही दुनिया का एकमात्र व्यक्ति है जो अपनी संतान को खुद से ज्यादा सफल देखना चाहता है ।

हमारी जिंदगी में वैसे तो हर दिन अपने माता-पिता के लिए होना चाहिए. परंतु इस खास दिन को विश्व भर में फादर्स डे के रूप के रूप में मनाया जाता है. इस दिन हम अपनेअपने पिता के प्रति प्यार समर्पित करते हैं .

फादर्स डे पर निबंध के द्वारा आप अपने भावों को व्यक्त कर सकते है। फादर्स डे के बारे में कुछ रोचक तथ्य आपके साथ साझा कर रहे हैं। फादर्स डे की शुरुआत वॉशिंगटन डीसी से हुई। सबसे पहले फादर्स डे  सोनोरा डॉड ने वाशिंगटन के स्पोकन शहर में 1910 को मनाया। डॉड को फादर्स डे मनाने की प्रेरणा मदर्स डे के दिन मिली। इनकी माता का निधन एमपी बचपन में ही हो गया था । तब इनकी पिता ने इनकी माता की कमी को कभी महसूस नहीं होने दिया ।

फादर्स डे प्रत्येक वर्ष के जून माह में तीसरे रविवार को मनाया जाता है । फादर्स डे को मनाने की वैधानिक स्वीकृति 1916 में वुड्रो विल्सन के द्वारा प्रदान की गई।

पिता अपने सपनों को स्थगित कर सकता है परंतु अपनी संतान के नहीं। इसलिए  पिता वह शख्स होता है जो अपनी आकांक्षाओं का त्याग कर अपनी संतान के लिए सब कुछ करता है। इसलिए कहा जाताा है कोई भी व्यक्ति अपनेेे जीवन में कितने ही आसमान क्यों ना छू ले परंतु वह एक व्यक्ति से हमेशा पीछे ही रहेगा और वह व्यक्ति उसका पिता होता है।भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान सबसे ऊपर रखा गया है।

जिस प्रकार कुम्हार एक सुंदर घड़े के निर्माण के लिए उसे बाहर से पीटता है तथा अंदर हाथ रखता है ताकि घड़ा टूटे नहीं अथवा बिखरे नहीं । उसी प्रकार पिता हमेशा अपनी संतान को मजबूत तथा सफल बनाने के लिए डांट फटकार लगाता है लेकिन बड़े प्यार से।

फादर्स डे के संबंध में एक बड़ा रोचक तथ्य है कि इसकी शुरुआत पश्चिम में हुई। भारतीय संस्कृति में हमेशा ही पिता का महत्व तथा सम्मान शिखर पर रहा है। वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो ज्ञात होता है कि पश्चिमी जगत माता-पिता के सम्मान सेवा तथा देखरेख  में हम से पीछे हैं। पाश्चात्य संस्कृति विकासवाद के नाम पर वृद्धजनों की उपेक्षा करती रही है। इसका असर वैश्वीकरण के दौर में भारतीय संस्कृति पर भी देखने को मिला है।

मैं  सृष्टि का शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसे पिता मिले जो पिता होने के साथ-साथ एक अच्छे दोस्त, सच्चे मार्गदर्शक तथा आदर्श व्यक्तित्व के धनी  हैं.

मेरी  जिंदगी के हसीन पलों पिता के साथ व्यतीत बचपन की यादें सर्वाधिक है। पिता का सरल तथा विनम्र व्यवहार अनुकरणीय है। जीवन  की छोटी बड़ी गलतियां के लिए कभी उस लेवल तक फटकारा नहीं। जहां से मुझे कभी हीनता की भावना महसूस हुई । पिता ने मुझे हमेशा गलती का एहसास दिलाया। जिससे गलती के दोहराव की संभावना बहुत कम रही।

एक आदर्श पिता की तरह अपने व्यवसाय में मुझे भी सलंगन करने का जवाब कभी नहीं बनाया । मुझे मेरी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के संपूर्ण अवसर दिए। परिवार में किसी भी सदस्य को किसी भी प्रकार की समस्या आई तो सबसे पहले आगे खड़ा व्यक्ति पिता ही होता है। बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी उठाने में जरा भी आनाकानी  कभी देखने को नहीं मिली।

एक पिता के रूप में संपूर्ण जिम्मेदारियों का बेहतरीन तरीके से निर्वहन करना इतना आसान नहीं होता । मेरे पिता ने कभी भी अपने कर्तव्य तथा जिम्मेदारियों से अपने पांव पीछे नहीं खींचे। पिता के लिए जितना कुछ कहा जाए कम है । या यूं कहें कि शब्दों के द्वारा पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना कठिन है तो गलत नहीं होगा।

मेरे पिता बहुत अच्छे इंसान है। सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि उन्होंने हर जगह मेरी मदद की बल्कि इसलिए है क्योंकि इन्होंने सामाजिक उत्तरदायित्व तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच हमेशा अनूठा सामंजस्य स्थापित किया। इन्होंने अपने अनुभव से ज्ञान से सही राहों पर चलने को विवश किया।

मेरे पिता एक आदर्श पिता होने के साथ ही आदर्श संतान भी हैं। इन्होंने अपने माता पिता का हमेशा आदर और सम्मान करते हैं। मेरे दादा दादी भी मुझे अपने पिता की तरह अच्छा इंसान बनने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते हैं।

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