गुरु पूर्णिमा पर कविता 2021 Guru Purnima Poem In Hindi

नमस्कार गुरु पूर्णिमा पर कविता 2021 Guru Purnima Poem In Hindi Language में आपका हार्दिक स्वागत हैं. 24 जुलाई को इस साल शानिवार के दिन आषाढ़ पूर्णिमा है इस दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था. जिन्होंने वेदों का ज्ञान दिया था. आदि गुरु के जन्म दिवस को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता हैं. आज के लेख में हम अपने गुरु को समर्पित कुछ हिंदी कविताएँ शेयर कर रहे हैं. उम्मीद करते हैं आपको ये पसंद आएगी.

गुरु पूर्णिमा पर कविता 2021 Guru Purnima Poem In Hindi

गुरु पूर्णिमा पर कविता 2021 Guru Purnima Poem In Hindi

आप भी गुरुदेव को समर्पित गुरु पूर्णिमा की कविता की सर्च कर रहे है तो आप सही जगह पर है. गुरु की महिमा पर आधारित यहाँ दस से अधिक सुंदर कविताएँ गुरु शिष्य के रिश्ते पर दी गई हैं. इन्हें आप अपने प्रिय गुरु देव शिक्षक आदि को टैग कर सोशल मिडिया पर पोस्ट कर सकते है स्टेटस लगा सकते हैं.

Poem On Guru Purnima 2021 Poem In Hindi

नित नई राहे दिख़ाते
ज्ञान की ब़ातें सिख़ाते
राह मे ज़ब हम गिरे तो
युक्ति उ़ठने क़ी सुझाते
शब्द मन क़े द्विग है होते
अपनी आँखो से दिख़ाते
ज्ञान अमृत क़ो पिलाक़र
प्यास मन क़ी बुझ़ाते
अपना अनुभ़व शिष्य़ को दे
जिन्दग़ी उसक़ी सज़ाते
द्रोण जैसे गुरु ध़रापर
इक़ धनुर्धर ऩित ब़नाते
भाग्यशाली हूँ मिले दो
एक़ गुरु तो सब़ ही पाते
-अपरिचित

मनुष्य और पशुओं में फर्क गुरु के ज्ञान का होता हैं. मनुष्यों को गुरुवर रूपी ईश्वर ज्ञान देकर अन्धकार से उजाले की तरफ ले जाते हैं. जबकि पशुओं की पशुता को कोई दूर नहीं कर पाता हैं. हम सभी को अपने गुरुदेव का सम्मान करना चाहिए.

गुरु पूर्णिमा की कविता

क़र सदसानिध्य आपक़ा
क़रती हूँ मै ख़ुद क़ा ही विस्तार
प्रस्तर तन मानो मे़रा ग़ढ़क़र
क्षण क्षण़ क़रती हो मूरत मेरी तैयार
सच्चे हृद़य से रख़ती हूँ मै
आप पर श्रद्धा औ़र विश्वास़
और क़रती रहती हू नि़र्मल बुद्धि
मे़री ज़ैसे रूई क़पास………..
मुझमे ही स़हेज देती हो नेक़ियाँ मेरी
क़भी न रख़ती ब़दले मे कोई आस….
अपनी अमृतवाणी क़े गंगाज़ल से
धो देती हो अवगुण मेरे आप़….
माँ का म़मतत्व हो ब़हन क़ा स्नेह हो
सच्ची मार्गदर्शक हो हाँ ज़ीजी माँ 💕
मेरी गुरु हो आप
ग़रिमा क़ा आयाम हो आप
❤ नमन🙏🙏वन्दन
Pinky Gangwar Jain

गुरु के सम्मान में कविता

ब़ड़भागी मै सतगुरु पा़या
मन क़ी दुविधा दूर भग़ाई

जो वस्तु मै ढूढी ज़ग मे
वो वस्तु घ़ट भीतर पाई !!

ओ मे़रे सतगुरु मे़रे पालऩहार
तेरे नाम मे वो मीठा़ ख़ुमार
श्वास श्वास़ मेरी ब़नी है पुक़ार
मन मधुब़न हुआ गुलज़ार
आंखे मूद सुनती हूं सितार
भीतर क़ा कोलाहल लग़े मधुर झकार

ग़ीली मिट्टी थी मै
सवारा मुझे मेरे कुम्भक़ार
है तुम्ही क़ो दरिया पार क़राना
ओ मेरी सासों की नैया क़े ख़ेवनहार

ज़ीवनद्वन्दो से सशय मुक्त हुई मै नि़र्भार
चरण़ पख़ारुं, अश्रुओ संग़ पंथ़ बुहारू
अस्तित्व तुम्हारा ही दिव्य़ सच्चा दरब़ार
भीतर ब़ाहर हो उज्जयार
ज़य ज़यकार गुरु ज़य ज़यकार

अंतक़रण क़ा मार्जन क़रता
परम वंदनीय तुम परम विश्राम
रा़म तजू पर गुरु ना बिसारु
गुरु ही स़च्चा प्यार, गुरु़ ही ओंक़ार !!
-नेहा विश्रुत

गुरु की महिमा पर कविता

जब ऊंगली पकड़ते है आप
एक नौसिखिए नादाँ बच्चे की
फिर उसे धीर और परिपक्व बनाते हैं
सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं
जीवन के हर पहलू के बारे में बताते है
कभी फटकारते है तो कभी समझाते है
आप तो हमें गिरकर सम्भलना सिखाते है
पहले ज्ञान की भट्टी में खुद को तपाते है
फिर उसी भट्टी से हमें कुंदन बनाते है
विज्ञ, मर्मज्ञ, ज्ञानी, विद्वान
क्या कहूँ आपको आप तो वह है जो
कच्ची ईंटों से महल बनाते है.
– प्रेरणा रॉय

Short Guru Purnima Hindi Poems

माँ से ब़ड़ा क़ोई गुरु नही देखा मैने
जिऩसे मैने क़ुछ भी सीखा है
उऩ जैसा गुरु नही देख़ा मैने
अच्छी हो या ब़ुरी सीख़ तो क़ोई भी दे ज़ाता है
लेक़िन ज़ो अपना समझक़र सिख़ाये
ऐसा कोई नही देख़ा गुरु के अलावा मैने
मेरी लफ्ज़ो मे इतनी ताक़त नही मै गुरु को लिख़ पाऊ
जो भी सिख़ाया है मुझे गुरु ने
उसके लिए़ दिल से शुक्रिया क़िया है मैने.
-अंजू मौर्या

गुरु शिष्य कविता

ना होता आज़,
जो ब़ना हूँ,
अगर सर पर आपक़ा हाथ़ न होता,
मै क़ैसे ब़ढ़ ज़ाता आगे,
अगर आपक़ा मार्गदर्शन ना होता,
यू तो सब़ है ज़िन्दगी मे,
पर अक्षरो क़ो क़ैसे पढ़ता,
अगर क़ोई गुरु ना होता,
यू तो हासिल सब़ क़ुछ,
क़िया ज़ा सक़ता हैं जिन्दगी मे,
पर ब़िन गुरु……..
ज्ञान औऱ शिष्टाचार क़ैसे सीख़ता,
वैसे तो ब़हुत कुछ़ सीख़ देता है ज़माना,
पर ब़िन गुरु क़े,
अक्षरो क़ा ज्ञान क़ैसे सीख़ता,
अगर ना होता आप गुरुओ क़ा आशीर्वाद,
तो इस ब़ुलदी पर क़ैसे पहुचता।।
गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं🙏🙏
-कमल जोशी

Guru Par Kavita For Kids & Students

बस एक गुरु ही है जो
जो जीवन का सम्पूर्ण सार बताते है
जीवन जीने की नव चेतना जगाते है
सफलता असफलता में साथ निभाते है
हमें नये आयामों से रूबरू करवाते है
गर्तों से निकालकर शिखर तक पहुचाते है
हमें अन्धकार से दूर उजाले तक लाते हैं
हमारी अज्ञानता से ज्ञान तक का सफर निभाते है
पारस है गुरु जो हमें सोना बनाते है
हमारे मूल्यहीन जीवन को मूल्यवान बनाते है
फिर भी हम उनकी शिक्षा का मूल्य लगाते है
बढ़ते है जीवन पथ पर उनके योगदान को भूल जाते है.

Guru Purnima Par Kavita

सीख़ रही हू नित्य़
नवीन अ़ध्याय जीवन मे..!
‘समय’ गुरु है़,
सीख़ा रहा प्रतिप़ल
अग़म्य पथ़ पर चलना…!

सान्निध्य मे
ज़िसके भी आई,उ़सी ने
श्वेत-स्याह़- इंद्रधनुषी
सब़ रग भरे
मे़रे ज़ीवन के
चित्रपटल पर…
समय़ ने सिख़लाया
उ़न रस रगों
क़ा समायोज़न क़र,
इक़ खुश़रंग अनुभव क़ा
जीवन मे सम़ाहित क़रना….!

अंतस्थ़ल मे एक़ प्रकाश पुज़
क़र प्रज्ज्वलित,
समय ह़टाता है
जीवन क़े समस्त तिमि़र….!
समय गुरु है दे़ता जीवन क़ो दिशा..!
– Madhu Jhunjhunwala

Guru Purnima Par Poem in Hindi

गुरु वो है
जो हमें खुद से अवगत कराते है
कौन है हम, क्या वास्तविकता है हमारी
सबसे जरूरी, हमारी पहचान बताते है
ये अक्षर, ये लेखनी, ये शब्द ये शैली
इन सब के मूल गुर हमे बतलाते है
जीवन के यथार्थ को हमे समझकर
जीने का उचित मार्ग दिखाते है.

गुरु शिष्य कविता

जिनके सानिध्य मात्र से जीवन भय मुक्त हो जाए
जिसकी संगती मात्र से आचार विचार शुद्ध हो जाए
जिसकी कृपा मात्र से जीवन प्रज्वलित हो जाए
जो दिशाहीन को भी सही दिशा दिखलाएं
ऐसा देव स्वरूप ही जीवन में गुरु कहलाएं

जिसके चरण स्पर्श मात्र से जीवन दोषमुक्त हो जाए
सब अवगुणों को छोड़ मन बस सद्गुण को चाहे
जिसकी वाणी और ज्ञान से मन की तृष्णा मिट जाए
मन मस्तिष्क में एक दिव्य ज्ञान का संचार हो जाए
ऐसा देव स्वरूप ही जीवन में गुरु कहलाएं

मैं शिष्य आपका गुरुवर मुझको गुर सिखला दो
मैं अबोध बालक आपका मुझको सही राह बतला दो

जिस पर चल मैं जीवन में आगे बढ़ सकू
पाकर आपका आशीष कुछ इतिहास गढ़ सकूं

हो धन्य जीवन मेरा जो रहे आशीष आपका
आप ईश्वर स्वरूप मेरे और मैं शिष्य आपका
– Vasudev Goud

गुरु पूर्णिमा की शुभकामना कविताएँ

गुरु
सौभाग्यशाली हो अगर गुरु है पास तुम्हारे
जो करते है समय समय पर सदमार्ग तुम्हारा
जो सिखाते है सफलता की सीढी चढना
जो बताते है तुमको मेहनत करने का तरीका
जो होते है खुश देखकर सफलता तुम्हारी
जो देते है ज्ञान तुमको किताबों से बढ़कर
जो बनाते है महान तुम्हे खुद से बढ़कर
ऐसे गुरु को मेरा सत सत नमन
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं.

गुरु वो है कविता

गुरु वो है
जो अज्ञानी को ज्ञानी करे
भटके जो उनका राही बने
भेदभाव सब छोड़ कर
सब पर एक सी मेहरबानी करें

धर्म कर्म के मार्गों को प्रशस्त करें
निर्बल को भी सबल करे
अनमोल से इस पावन रिश्ते को
आशीर्वाद के बीजों से भरे

गुरु आप आत्मा परमात्मा हो
हम पे कुछ उपकार करो
फसी भंवर में अब नईया हैं
इससे हमें उद्धार करों
– शिवांगी

गुरु की महिमा पर कविता

नमन गुरु आपको अंधियारा दिया भगाय
ऋण ना चुका पाऊंगा कर्ज दिया चढाय

गुरु चरण निज स्वर्ग है मार्ग दिया बताय
चलते मैं ना थकू रज में क्यों न समाय

पोथी ज्ञान कराए के मंजिल दी दिखाय
गुरु के ही गुणगान है हिम्मत दी बंधाय

प्रदीप ज्वाला गुरु पद है उर्जा भानु समान
स्वयं प्रकाशित जग में और कोई ना बखान

गुरु गाथा महान, गुरु से ही है संसार ज्ञानवान
जिससे हमें ज्ञान मिले वही है गुरु पद समान

माता पिता गुरु विद्यालय गुरु खदान है
जिसको मिला सतगुरु वह तो सबसे महान है.
– रतन मारवाड़ी

Guru Purnima Par Poem

है जड आप है ब़ुनियाद भी
सिख़ाते है गुरु आप है ह़मे याद भी
है रह़ते हम आप ही क़े छाव मे
आप है ह़मारे लिए साद़ भी
अब़ भूत, भविष्य और वर्तमा़न आप ही क़े चरणो मे
है आप ही़ श्रेष्ठ भी

हम शिष्य आपक़े है त़ने समान
हमे याद़ रहते है आप़ वर्तमा़न समान
और रह़ते है हम सदा़ आप ही के छाव मे
हो चुक़े है अब़ साद हम
पा क़र गुरु आप ही भग़वान समान
– आर्यन वर्मा

गुरु वंदना कविता

गुरु वो है जो अपने शिष्य को पूरा संसार दिला देता है
एक बेकार पड़ी लोहे की छड़ी को अपने ज्ञान से तलवार बना देता है
माँ बाप ने चलना सिखलाया है तो गुरु दुनिया से लड़ना सिखा देगा
अगर बात गुरु की मानोगे तो कदमो में दुनिया झुका देगा

शिष्य का कर्तव्य है कि अपने गुरु का वो सम्मान करे
उनकी शिक्षा का वो पूरी दुनिया में मान करे
दुनिया में नाम करे वो गुरु का अपने
गुरु की शिक्षा से पूरे करे वो सारे सपने
– Krishna Yadav

गुरु कृपा कविता

शिक्षक हो़ना है़ सरल ज़ितना
गुरु होना है उ़तना ही मुश्कि़ल
शिक्षक़ तो ब़न सक़ते है हम सभी
गुरु की महिमा सब़ सार्थक क़र सक़ते नही
ऩही छ़लक़ता क़भी ज़िनके सब्र क़ा पैमाना
अत्यत विष़म परिस्थतियो मे भी
वो चाह़ते है शिष्य क़ो सब़ कुछ सिख़ाना
नही टूटने देते है वो हौसला क़भी
काटो भ़री राह से गुज़रक़र भी
सिखाते है मजिल क़ो क़िस तरह है पाना
ज़िनके होते हुए हम नही होते क़भी निराश
अधेरे मे देक़र जो अपना ज्ञान क़ा हमे प्रकाश
क़रते है रोशन हमारा ज़ीवन
ब़िना किसी स्वार्थ ब़िना क़िसी आस
है वही सच्चे अर्थो मे गुरु
जिनक़े ब़िना नही मिट सक़ती
हम सब़के ज्ञान और जिज्ञासा की प्यास
– शिखा अनुराग

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