वैश्वीकरण पर निबंध Globalization Essay In Hindi

Globalization Essay In Hindi: आज हम वैश्वीकरण पर निबंध आपकों यहाँ बता रहे हैं.ग्लोबलाइजेशन के दौर क्या है, यहाँ कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के बच्चों के लिए 5, 10 लाइन, 100, 200, 250, 300, 400, 500 शब्दों में छोटा बड़ा एस्से Essay On Globalization In Hindi को हम यहाँ पढेगे. इस निबंध की मदद से आप समझ पाएगे वैश्वीकरण क्या है इसका इतिहास आदि पर सरल निबंध भाषण लिख पाएगे.

वैश्वीकरण पर निबंध Globalization Essay In Hindi

वैश्वीकरण पर निबंध Globalization Essay In Hindi

वैश्वीकरण एक अंग्रेजी का शब्द हैं, जिन्हें हिंदी में भूमंडलीकरण भी कहा जाता हैं. वैश्वीकरण का अर्थ- किसी वस्तु, सेवा, पूंजी, विचार, बौद्धिक सम्पदा और सिद्धातो का विश्वव्यापी होना. 

संसार के सभी देशों का दुसरे देशों के साथ वस्तु सेवा  विचार, पूंजी और सिद्धांतो का अप्रतिबंधित लेन-देन. दुसरे शब्दों में ग्लोबलाइजेशन / वैश्वीकरण वह हैं, जिनके तहत कोई वस्तु या  विचार अथवा पूंजी की एक देश से दुसरे देश बिना रोकटोक आवाजाही हो.

ग्लोबलाइजेशन / वैश्वीकरण क्या हैं ? –

यह एक ऐसी प्रक्रिया हैं, जिन्हें सामान्यता लोग आर्थिक रूप से ही देखते हैं. यानि पूंजी और वस्तुओ के बेरोक-टोक आवाजाही को ही वैश्वीकरण का नाम देते हैं.

मगर हकीकत में यह एक आर्थिक क्षेत्र तक सिमित न होकर राजनीतिकी, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ता हैं.

वैश्वीकरण ऐसी प्रक्रिया का नाम हैं जिसमे संसार के सभी लोग आर्थिक, तकनिकी, सामाजिक और राजनितिक साधनों के समन्वयित विकास हेतु प्रयास कर रहे हैं.

वैश्वीकरण की शुरुआत

लगभग 16 वी शताब्दी से जब यूरोपीय देशों में सम्राज्यवाद की शुरुआत हुई. उसी के साथ ही वैश्वीकरण का आरम्भ हो गया था. यदि इसकी विधिवत शुरुआत के इतिहास पर नजर डाले तो अमूमन अधिकतर देशों में इसे 1950-60 के दशक से अपनाया जाने लगा.

इसका मुख्य कारण दुसरे विश्वयुद्ध के बाद सभी देशों के राजनितिज्ञो और अर्थशास्त्रियो द्वारा परस्पर सहयोग और सांझे हित के महत्व को समझा.

इसी का नतीजा था, कि एक के बाद एक सभी देशों ने धीरे-धीरे वैश्वीकरण को अपनाना शुरू कर दिया. वर्तमान की संचार पद्दति के कारण पूरा संसार एक गाँव के रूप में तब्दील हो चूका हैं.

इस प्रक्रिया को अंजाम तक पहुचाने में विश्व बैंक जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं. विश्व बैंक के सहयोग से ही वैश्वीकरण के तहत सभी देशों के मध्य मुक्त व्यापार का प्रदुभाव हो पाया.

वैश्वीकरण के लाभ

इस मुक्त व्यापार प्रणाली के कई प्रत्यक्ष लाभ हैं.वैश्वीकरण के कारण ही विश्व के बाजार तक विभिन्न कंपनियों की पहुच संभव हो पाई. इसी कारण विकसित और विकासशील देशों को अत्यंत आर्थिक लाभ हुआ.

परस्पर व्यापार से विश्व् शांति की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिल सकी हैं. अधिक संख्या में नए उद्धयोगो की स्थापना  रोजगार के नए अवसरों का सर्जन हुए.

लोगो के जीवन स्तर में सुधार के साथ ही क्रय शक्ति को भी बढ़ावा मिला हैं. इस आधार पर कहा जा सकता हैं, वैश्वीकरण से विकास की राह पर विकासशील देशों को अधिक मदद मिली.

यदि वैश्वीकरण से पूर्व विकास शील देशों की सामाजिक और आर्थिक स्थति के बारे सूक्ष्म अवलोकन किया जाए, तो निष्कर्ष के तौर पर इन देशों की जीडीपी, राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति,निर्यात, साक्षरता और जन्म मृत्यु दर में अच्छे सुधार देखने को मिले हैं.

वैश्वीकरण से नुकसान (हानि)

वैश्वीकरण से अधिकतर राष्ट्रों और वर्गो को निश्चित रूप से फायदा तो मिला. मगर इस उपभोक्तावादी संस्कृति से भारत जैसे विकासशील देशों पर अत्यधिक बुरा असर पड़ा.

वैश्वीकरण के कारण भारत साहित अन्य देशों में पश्चिमी सभ्यता का बोलबाला कायम हो गया. दूसरी तरफ शहरी विकास को महत्व देने के कारण गाँवों से लोगो का शहरों की ओर पलायन ओर तेज हो गया. 

भारतीय अर्थव्यस्था का मूल आधार गाँव ही तो हैं, इसके कारण गाँवों की हालत बद से बदतर होती चली गईं. साधारण व्यक्ति के जीवन का निर्वाह करना बेहद मुश्किल हो गया. दूसरी तरफ कम या अल्पविकसित देशों को अधिक नुक्सान उठाना पड़ा. मजदूरों को पहले से कम वेतन पर नौकरी करनी पड़ी.

यदि इस स्थति में वे अधिक रोजगार पाने की मांग करते तो उन्हें उसी से हाथ धोने का डर सताने लगा. क्युकि उनसे कम कीमत पर भाड़े के मजदूरों द्वारा काम करवा लिया जाता था. भारत में इसका परोक्ष उदहारण बीपीओ उद्योग को देखा जा सकता हैं.

भारत में वैश्वीकरण

विश्व के अधिकतर देशों द्वारा वैश्वीकरण प्रणाली अपनाने के साथ ही कालान्तर में भारत को भी अन्य देशों के लिए रास्ते खोलने पड़े. इसी दौरान 1991 के आर्थिक संकट में भारत को पूंजीपति राष्ट्रों के पास सोना-चांदी गिरवी रखकर लोन लेना पड़ा.

जब भारत ने इस वैश्वीकरण की प्रणाली के लिए अपने द्वार खोल दिए. तो बड़ी विदेशी कम्पनियों के निवेश भारत में किये जाने लगे. भारत में वैश्वीकरण से आयात और निर्यात दोनों में विशेष तौर पर फायदा मिला.

अब तक भारत सूचना और प्रद्योगिकी के साथ ऑटोमोबाइल में भी अन्य देशों के मुकाबले पीछे था इस क्षेत्र में विशेष उन्नति हुई. अब भारत के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की विश्वभर में मांग बढ़ने लगी. वैश्वीकरण का ही परिणाम हैं, आज विश्व के हर देश में आईटी के क्षेत्र में भारतीय विषेयज्ञो की भरमार हैं.

वैश्वीकरण ने सभी देशों को तीव्र आर्थिक विकास का एक मंच प्रदान किया हैं. हालाँकि इसके कुछ दुष्परिणाम भी हैं. मगर कुल-मिलाकर एक-दुसरे देश के सहयोग के बिना किसी राष्ट्र की प्रगति उसका आर्थिक विकास संभव नही हैं.

यदि सभी देश राष्ट्रिय भावना के साथ-साथ वैश्विक सोहार्द और परस्पर सहयोग की दिशा में काम करे तो न सिर्फ इससे विकासशील देशों को फायदा होगा, बल्कि विकसित राष्ट्र भी वैश्वीकरण से लाभान्वित होंगे.

यदि प्रतिस्पर्धी राष्ट्र के रूप में न देखकर व्यापार में इन्हे सहयोगी समझकर आगे बढ़ा जाए तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होने के साथ साथ अंतराष्ट्रीय शांति और भाईचारे को बढाने में भी कारगर होगा.

आज संचार और सुचना की क्रांति के कारण आज पूरी दुनियाँ एक गाँव का रूप ले चुकी हैं. यदि सकारात्मक द्रष्टि से देखा जाए तो आर्थिक द्रष्टि से वैश्वीकरण महत्वपूर्ण हैं.

आज की वैश्विक जटिलता की स्थति में कोई भी राष्ट्र अलग रहकर कभी भी पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर नही बन सकता हैं. किसी न किसी क्षेत्र में उन्हें पड़ोसी या सहयोगी राष्ट्र पर निर्भर रहना पड़ता हैं. इसकी वजह यह अंतराष्ट्रीय व्यापार और सहयोग को बढ़ावा तेजी से आर्थिक विकास के लिए वैश्वीकरण आवश्यक हैं.

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