जसनाथ जी महाराज का जीवन परिचय इतिहास | Biography Of Jasnath Ji Maharaj In Hindi

जसनाथ जी महाराज का जीवन परिचय इतिहास | Biography Of Jasnath Ji Maharaj In Hindi राजस्थान के समाज सुधारकों में जसनाथ जी का नाम अत्यधिक महत्वपूर्ण है. विक्रम संवत् 1539 में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथ जी का जन्म हुआ था. 12 वर्ष की आयु में ही इन्होने सन्यास ग्रहण कर लिया और गोरख मालिया में कठोर तप किया. विक्रम संवत् 1563 में इन्होने समाधि ली.

जसनाथ जी महाराज का जीवन परिचय इतिहास

जसनाथ जी महाराज का जीवन परिचय इतिहास | Biography Of Jasnath Ji Maharaj In Hindi

भक्तिकालीन अन्य संतो की भांति जसनाथ जी ने भी समाज में प्रचलित रूढ़ियों और पाखंडो का विरोध किया. इन्होने निर्गुण और निराकार भक्ति पर बल दिया, जातिवाद का खंडन किया. संयम और सदाचार पर बल दिया. इन्होने भी ईश्वर की प्राप्ति के लिया गुरु होना आवश्यक बताया.

जसनाथ जी ने जसनाथी सम्प्रदाय की शुरुआत की. जसनाथ ने अपने सम्प्रदाय के 36 नियमों का प्रतिपादन किया. रात्रि जागरण के समय अग्निनृत्य जसनाथी सम्प्रदाय की प्रमुख विशेषता है. उन्होंने प्रेम भक्ति व समन्वय की भावना से समाज को आगे बढ़ाने का संदेश दिया.

पूरा नामश्री गुरु जसनाथ जी महाराज
श्रेणीलोक संत
जन्म 1482
मृत्यु1506
समाधिकतरियासर
प्रवर्तकजसनाथी सम्प्रदाय
पत्नीसती दादी काळलदे
पिताहमीर जी ज्याणी
मातामाँ रूपादे

जन्म

सिद्ध पुरुष जसनाथ जी का जन्म 1539 विक्रम संवत् कार्तिक शुक्ल एकादशी, शनिवार (1482 ई) को हुआ था. कतरियासर बीकानेर इनकी जन्म भूमि रही, इनके पिताजी हमीर जी ज्याणी जाट जाति से थे. इनकी माता जी का नाम रूपा दे था.

जसनाथ जी के अविर्भाव को लेकर एक कथा प्रचलित हैं जिसके अनुसार इनका जन्म न होकर ये अवतरित हुए थे. बताते है कि हमीर जी निसंतान थे, एक दिन उनको सपने में गुरु गोरखनाथ जी ने दर्शन दिया.

गोरखनाथ जी ने हमीर जी को दाभला तालाब की तरफ जाने का आदेश दिया. सवेरे उठकर जब हमीर जी अपने घोड़े के साथ डाभला की सीमा तक गये तो उनके घोड़े ने आगे कदम बढ़ाना बंद कर दिया, तब वे घोड़े की रस्सी पकड़े पैदल चल पड़े.

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थोड़ी ही दूर जाने पर तालाब की मेड के पास एक घने फैले जाल के पेड़ की तरफ उनकी नजर गई. जाल की छाँव में एक आभामंडित नन्हा शिशु दिखाई दिया. एक बाघ और सर्प बालक की रखवाली कर रहे थे, कहते है जसनाथ जी के ईश्वर वन्दना के बाद नाग और बाघ दूर हो गये तथा हमीर जी बालक को घर ले आए और उनका नाम जसवंत रखा गया.

सती माता काललदे से सगाई

हरियाणा के चूड़ीखेड़ा हिंसार के निवासी नेपालजी बेनीवाल के घर काळलदे जी का जन्म संवत् 1542 आश्विन शुक्ल चतुर्थी तिथि को हुआ था. इनसे छः माह पूर्व एक और सुंदर कन्या ने जन्म लिया जिसका नाम प्यारलदे रखा गया था. एक दिन का प्रसंग है जब नेपालजी की पत्नी बेटी प्यारलदे को पालने में सुलाकर घर के काम काज में व्यस्त हो गई जब थोड़ी देर बाद वो पालने की तरफ गई तो पालने में एक ही रंग रूप की दो कन्याएं सो रही थी,

माँ बाप के लिए यह अचरज की घड़ी तो थी ही साथ ही अब पहचान का संकट भी पैदा हो गया, मगर थोड़ी ही देर में एक कन्या ने श्याम वर्ण धारण कर लिया जो बड़ी होकर काललदे कहलाई.

ऐसा भी कहा जाता है कि काळलदे की सगाई के काफी प्रयत्न हुए, आखिर एक ब्राह्मण के कहने पर उनकी सगाई कतरियासर के रहने वाले जसंवत से हुई, जब जसनाथ जी और काळलदे की सगाई हुई तब इनकी आयु महज 10 वर्ष की थी.

जसनाथ जी और गोरखनाथ जी का साक्षात्कार

1551 आश्विन शुक्ल सप्तमी के दिन बालक जसंवत अपनी ऊंटनियों की खोज में भागथली की ओर गये, वहां उन्हें गुरु गोरखनाथ जी ने दर्शन दिए, उन्हें अपना शिष्य बनाया तथा कमंडल का जल भी पिलाया, कानों में धारण करके के लिए कुंडल दिया. जसवंत से सिद्ध जसनाथ जी का नाम मिला, जसनाथ जी ने गुरु को माँ का दिया भोजन कराया और अपने गाँव चलने की प्रार्थना की.

कहते है जसंवत के कहने पर गोरखनाथ जी उनके साथ साथ चले मगर गोरखमालिया के पास आकर जब उन्होंने पीछे देखा तो गोरखनाथ जी ओझल हो गये उनके केवल पदचिह्न थे. कहते है यह भौतिक मिल्न नहीं था, क्योंकि गोरखनाथ जी का समय दसवीं ग्याहरवीं सदी था जबकि ये 15 वीं सदी की घटना थी, गोरखनाथ जी ने अपने जाल की टहनी थी उसे उसी स्थान पर रोपकर भक्ति शुरू कर दी तथा यही से जसनाथी पंथ की शुरुआत हुई.

जसनाथ जी के चमत्कार

जसनाथ जी महाराज ने पहला चमत्कार एक वर्ष की अल्पायु में दिखाया जब वे अंगारों से भरी अंगीठी पर बैठ गये थे, जब माँ रूपादे ने झट से उन्हें दहकते अंगारों से बाहर निकाला तो पाया कि उनके शरीर पर जलने का कोई भी निशान नहीं था. आज भी जसनाथी सिद्ध भक्त जलते अंगारों पर नृत्य करते हैं.

बालक जसवंत ने दो वर्ष की अवस्था में ही दो मण दूध पी लिया था, इस तरह तीसरा परचा एक ब्राह्मण को दिया, कहते है जब शिक्षा दीक्षा के लिए जसंवत को ब्राह्मण को पास ले गये तो पंडित ने कहा अभी बालक बहुत छोटा थोडा व्यस्क होने पर शिक्षारम्भ करेगे तभी उन्होंने पच्चीस वर्ष के आयु के युवक का रूप धारण कर लिया था.

सन्यास और जसनाथी पंथ

बहुत छोटी आयु में जसनाथ जी ने गृहस्थ जीवन का त्याग कर सन्यास ले लिया था. इस कारण इन्हें बाल योगी अथवा बाल सिद्ध भी कहा जाता हैं. विक्रम संवत 1500 में इनका मिल्न एक और बड़े संत जाम्भोजी से हुआ था. ऐसी मान्यता है कि सिकन्दर लोदी इनसे बेहद प्रभावित थे सम्राट ने नाथ जी को कतरियासर गाँव भेंट किया था.

महज 24 वर्ष की आयु में जसनाथ जी महाराज ने जीवित समाधि ले ली थी, उनका समाधि स्थल बीकानेर से 45 किमी दूर स्थित कतरियासर में हैं. यह जसनाथी और सिद्ध नाथ लोगों के लिए पवित्र धाम हैं यहाँ बड़ा मेला भी भरता हैं. हरोजी महाराज (बम्बलू) , हंसोजी महाराज (लिखमादेसर) , पालोजी महाराज (पुनरासर) ये जसनाथ जी के शिष्य थे.

36 नियम

जसनाथ जी को मानने वाले जसनाथी कहलाते हैं मुख्यतः जाट जाति के कई लोग इन्हें अपना आराध्य मानते हैं. इनके अनुयायी गले में काले ऊन का धागा धारण करते हैं. धधकते अंगारों पर नृत्य इन्हें के सिद्ध करते हैं.

मूल रूप से जसनाथी मत के तीन वर्ग है सिद्ध, सेवक और साधू. इस सम्प्रदाय का एक कुलगुरु भी होता हैं. इसके अलावा पांच महंत 5 बाद धाम, 12 फ़िर धाम, 84 और बाड़ी, 1o8 स्थापनाएँ और शेष भावनाएँ के जरिये गाँव गाँव तक संगठन का विस्तार हैं.

जसनाथी मत के अनुयायी तीन मुख्य पर्व मनाते हैं, जसनाथ जी भगवान के निर्वाण दिवस आश्विन शुक्ल सप्तमी, माघ शुक्ल सप्तमी जो कि शिष्य हांसुजी की स्मृति में तथा चैत्र सुदी चतुर्थी से सप्तमी को जसनाथ जी का पर्व एवं जागरण का पर्व मनाया जाता हैं.

जसनाथी मत के 36 नियम इस तरह हैं.

  1. जो कोई सिद्ध धर्म धरासी
  2. उत्तम करणी राखो आछी
  3. राह चलो, धर्म अपना रखो
  4. भूख मरो पण जीव ना भखो
  5. शील स्नान सांवरी सूरत
  6. जोत पाठ परमेश्वर मूरत
  7. होम जाप अग्नीश्वर पूजा
  8. अन्य देव मत मानो दूजा
  9. ऐंठे मुख पर फूंक ना दीजो
  10. निकम्मी बात काल मत कीजो
  11. मुख से राम नाम गुण लीजो
  12. शिव शंकर को ध्यान धरीजो
  13. कन्या दाम कदै नहीं लीजो
  14. ब्याज बसेवो दूर करीजो
  15. गुरु की आज्ञा विश्वंत बांटो
  16. काया लगे नहीं अग्नि कांटो
  17. हुक्को, तमाखू पीजे नाहीं
  18. लसन अर भांग दूर हटाई
  19. साटियो सौदा वर्जित ताई
  20. बैल बढ़ावन पावे नाहीं
  21. मृगां बन में रखत कराई
  22. घेटा बकरा थाट सवाई
  23. दया धर्म सदा ही मन भाई
  24. घर आयां सत्कार सदा ही
  25. भूरी जटा सिर पर रखीजे
  26. गुरु मंत्र हृदय में धरीजे
  27. देही भोम समाधि लीजे
  28. दूध नीर नित्य छान रखीजे
  29. निंद्या, कूड़, कपट नहीं कीजे
  30. चोरी जारी पर हर ना दीजे
  31. राजश्वला नारी दूर करीजे
  32. हाथ उसी का जल नहीं लीजे
  33. काला पानी पीजे नाहीं
  34. नाम उसी का लीजे नाहीं
  35. दस दिन सूतक पालो भाई
  36. कुल की काट करीजे नाहीं

FAQ

जसनाथ जी कौन थे?

बीकानेर के कतरियासर के रहने वाले एक लोक संत थे, जिनका जन्म जाट परिवार में हुआ तथा जसनाथी पंथ चलाया.

भगवान जसनाथ जी किस भक्ति धारा के संत थे?

निर्गुण ईश्वर उपासक

ऊं नमो आदेश किस मत के अनुयायियों का सम्बोधन उद्घोष वाक्य हैं?

जसनाथी

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6 thoughts on “जसनाथ जी महाराज का जीवन परिचय इतिहास | Biography Of Jasnath Ji Maharaj In Hindi”

  1. बहुत ही शानदार जानकारी शेयर की है आपने …. शुक्रिया जनाब
    और
    जसनाथ जी की पत्नी के बारे थोङी और जानकारी शेयर करो।

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  2. बहुत अच्छी जानकारी दी आपने उनके लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपको 🙏🙏🙏 ॐ नमो आदेश गुरु जसनाथ जी महाराज ने 🙏🙏

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  3. इस मे 36 नियम मे छेड़छाड़ की गई है
    जसनाथ जी महाराज ने ऐसा कभी नही कहा
    1जो कोई सिध्द धर्म धरासी
    उतम करनी राखो आच्छी
    ऐसे पढते आ रहै हे जन्म से
    1 जो कोई जात हुऐ जसनाथी
    उतम करनी राखो आच्छी

    इतिहास में छेड़छाड़ करना
    सिध्दो का अधिकार नही है

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  4. जसनाथ जी और जांभोजी की आपसी मुलाकात वि.सं 1557 में हुई धी।

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