झूलेलाल की जीवनी जीवन परिचय इतिहास जयंती स्टोरी | Jhulelal Biography In Hindi Language

झूलेलाल की जीवनी जीवन परिचय इतिहास जयंती स्टोरी | Jhulelal Biography In Hindi Language: जब जब धरती पर अन्यायियों ने लोगों को त्रस्त किया तब तब भगवान् ने मसीहा के रूप में अवतरित होकर उनके संकट को टारा हैं. सिंधी समाज के इष्ट देव झूलेलाल जी कि जीवनी कुछ ऐसी ही हैं दरअसल जो लोग सिंध में रहते हैं अथवा विभाजन के बाद उस स्थान से पलायन कर किसी अन्य स्थान को गये हैं उन्हें सिंधी कहा जाता हैं सिंध पाकिस्तान में हैं. 23 मार्च 2023 को झूलेलाल जी की जयंती हैं जिन्हें सिन्धी समाज चेटीचंड उत्सव के रूप में मनाते हैं, इस दिन वे अपने आराध्य देव झूले लाल को याद करते हैं. आज के इस लेख में हम इनकी जीवनी आपके साथ साझा कर रहे हैं.

झूलेलाल की जीवनी

झूलेलाल की जीवनी जीवन परिचय इतिहास जयंती स्टोरी Jhulelal Biography In Hindi Language

Jhulelal Ki jivani, jivan Parichaya, Jhulelal Story, Jhulelal History, Jhulelal Image, God Jhulelal Jayanti 2023, Jhulelal Biography: कोई इन्हें संत कहता है तो कोई फकीर जो भी हो हिन्दू मुस्लिम दोनों इन्हें मानते हैं तथा यह सिन्धी समाज के ब्रह्मा, विष्णु, महेश, ईशा, अल्लाह से भी बढ़कर हैं. झूलेलाल को कई अन्य नामों से भी जाना जाता हैं. उदेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसाँई, पल्लेवारो, ज्योतिनवारो, अमरलाल आदि.

झूलेलाल जी को जल के देवता वरुण का अवतार माना जाता हैं. चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में चन्द्र दर्शन की तिथि को सिंधी चेटीचंड मनाते हैं. इनकी पूजा तथा स्तुति का तरीका कुछ भिन्न हैं जल के देव होने के कारण इनका मंदिर लकड़ी का बनाकर जल में रखकर इनके नाम दीपक जलाकर भक्त आराधना करते हैं. चेटीचंड के अवसर पर भक्त इस मंदिर को अपने शीश पर उठाते हैं जिन्हें बहिराना साहिब कहा जाता हैं जिनमें परम्परागत छेज नृत्य किया जाता हैं.

कौन थे झूलेलाल जी का इतिहास जीवनी

सिंध प्रान्त से भारत में आकर भिन्न भिन्न स्थानों पर बसे सिंधी समुदाय के लोगों द्वारा झूलेलाल जी की पूजा की जाती हैं. ये उनके इष्ट देव हैं. सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि के महापुरुष के रूप में इन्हें मान्यता दी गुई हैं. ताहिरी, छोले (उबले नमकीन चने) और शरबत आदि इस दिन बनाते हैं तथा चेटीचंड की शाम को गणेश विसर्जन की तरह बहिराणा साहिब का विसर्जन किया जाता हैं.

झूलेलाल की कहानी – jhulelal story in hindi language

भगवान झूलेलाल जी का जन्म चैत्र शुक्ल 2 संवत 1007 को हुआ था, इनके जन्म के सम्बन्ध में कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं. मगर इन सभी में बहुत सी समानताएं भी हैं यहाँ आपकों भगवान झूलेलाल जी की सर्वमान्य कथा बता रहे हैं जिन पर अधि कतर लोगों का विश्वास हैं.

बात सिंध इलाके की हैं 11 वीं सदी में वहां मिरक शाह नाम का शासक हुआ करता था. वह प्रजा का शासक कम अपनी मनमानी करने वाला जनता को तरह तरह की शारीरिक यातनाएं देने में आनन्द खोजने वाला अप्रिय एवं अत्याचारी था. उसके लिए मानवीय मूल्य तथा व्यक्ति जीवन गरिमा व धर्म कुछ भी मायने नहीं रखते थे.

Telegram Group Join Now

दिन ब दिन बढ़ते शाह के जुल्मों से सिंध की प्रजा तंग आ चुकी थी. राजतन्त्र में वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते. उनके पास पुकार का एक ही जरिया था वह था ईश्वर से मदद की गुहार. राज्य की जनता सिन्धु के तट पर एकत्रित होकर भगवान से इस मुश्किल से निकालने के लिए प्रार्थना करने लगे.

वरुणदेव उदेरोलाल ने जलपति के रूप में मछली पर सवार होकर लोगों को दर्शन दिया. तथा आकाशवाणी हुई कि हे भक्तों तुम्हारे दुखों का हरण करने के लिए मैं ठाकुर रतनराय के घर माँ देवकी के घर जन्म लूँगा तथा आपके जुल्मों को खत्म करूँगा.

चैत्र शुक्ल 2 संवत 1007 के दिन नसरपुर में माँ देवकी पिता रतनराय के घर चमत्कारी बालक ने जन्म लिया जिसका नाम उदयचंद रखा गया. जब शासक मीरक शाह को यह खबर मिली तो उसने अपने सेनापति को इस बालक का वध करने के लिए भेजा. सेनापति अपनी पूरी सेना के साथ नसरपुर के रतनराय जी के यहाँ पहुचकर बालक उदयचंद तक पहुचने का प्रयास किया तो झूलेलाल जी ने अपनी दैवीय शक्ति से शाह के राजमहल में आग लगा दी तथा उसकी फौज को पंगु बना दिया.

जब शाह की किसी ईश्वरीय शक्ति के ताकत का अंदाजा हुआ तो वह माँ देवकी के घर गया तथा झूलेलाल जी के कदमों में गिरकर अपने पापों की क्षमा मांगने लगा. इस तरह अल्पायु में ही झूले लाल जी ने आमजन में सुरक्षा का भरोसा दिलाया तथा उन्हें निडर होकर अपना कर्म करने के लिए प्रेरित किया.

सिंध का शासक मीरक शाह जिन्होंने झूलेलाल जी को मारने के लिए आक्रमण किया, उसका अहंकार चूर चूर हो गया तथा वह उनका परम शिष्य बनकर उनके विचारों को जन जन तक पहुचाने के कार्य में जुट गया. शाह ने अपने आराध्य के लिए कुरु क्षेत्र में एक भव्य मंदिर का निर्माण भी करवाया. सर्वधर्म समभाव तथा अमन का पैगाम देने वाले झूलेलाल जी एक दिव्य पुरुष थे.

झूलेलाल का व्यक्तिगत परिचय

नामउदयचंद/संत झूलेलाल
उपनामलालसांई, झूलेलाल, उदेरो लाल,जिन्दा पीर, घोड़ेवारो, पल्लेवारो, ज्योतिनवारो, अमरलाल
जन्म स्थानठठा नगर, नसरपुर, सिन्ध प्रान्त,वर्तमान पाकिस्तान
जन्म तारीखचैत्र शुक्ल द्वितीया संवत 1007
वंशअरोड़वंशी
मातादेवकी जी
पितारतनराय
पेशासंत
गुरुजल देवता
देशअविभाजित भारत
राज्यसिन्ध प्रान्त
धर्महिन्दू
राष्ट्रीयताभारतीय

संत झूलेलाल जी के चमत्कार

झूलेलाल संत जी के समय में मुस्लिम राजा मिरखशाह का राज पाकिस्तान के सिंध प्रांत में था और उनके और उनकी सेना के द्वारा बड़े पैमाने पर हिंदू जनता का उत्पीड़न किया जाता था, साथ ही उन्हें परेशान किया जाता था। इसके पीछे वजह थी सभी हिंदू जनता को इस्लाम कबूल करवाना और उनका धर्मांतरण करवाना।

मुस्लिम राजा के अत्याचार से तंग आकर के हिंदू जनता ने 40 दिन तक वरुण देवता की तपस्या करने का निर्णय लिया और इसके बाद वरुण देवता की कठोर तपस्या की गई। उसके पश्चात एक आकाशवाणी हुई। उस आकाशवाणी में यह बताया गया कि भगवान श्री झूलेलाल का जन्म माता देवकी पिता रतन राय के परिवार में होगा।

इसके पश्चात आकाशवाणी में कही गई बात को हिंदुओं ने जाकर के मुस्लिम राजा के सामने कहा। इसके साथ ही हिंदुओं ने यह भी कहा कि राजा के द्वारा उन्हें सोचने के लिए 7 दिन का समय दिया जाए क्योंकि उनके यहां पर एक संत का जन्म होने वाला है और उसके बाद वह सभी इस्लाम कबूल कर लेंगे और मुसलमान बन जाएंगे। हिंदुओं की बात सुनकर के मुस्लिम राजा काफी खुश हुआ और जोर से हंसा और उन्होंने हिंदुओं को 7 दिन का समय दे दिया।

इसके पश्चात समय व्यतीत होता गया और 7 दिनों के अंदर संत झूलेलाल जी एक पूरे इंसान के तौर पर प्रगट हो चुके थे। इसके बाद झूलेलाल ने कहा कि बादशाह को इस बात को समझा दिया जाए कि हिंदू जनता के खिलाफ वह अनैतिक काम बिल्कुल भी ना करें।

इस पर बादशाह ने जब झूलेलाल की इस बात को जाना तो उन्होंने उल्टा संत झूलेलाल को ही चुनौती दे डाली। इसके पश्चात बादशाह ने जब अपनी आंखों से संत झूलेलाल को देखा तो बादशाह भौचक्के रह गए क्योंकि संत झूलेलाल नीले घोड़े पर पूरी तरह से सुसज्जित होकर सवार थे।

झूलेलाल के उपदेश मुस्लिम शासक पर बेअसर होना

जो उपदेश झूलेलाल जी ने बादशाह को दिए उसका मुस्लिम राजा पर कुछ भी असर नहीं हुआ और उसने झूलेलाल जी को कैद करने का आदेश अपने सिपाहियों को दिया। इस प्रकार से राजा के सिपाहियों के द्वारा झूलेलाल को कैद कर लिया गया। 

जेल में जाने के पश्चात झूलेलाल जी ने जेल के अंदर मौजूद सभी हिंदुओं को आजाद करवाया और खुद भी सभी भक्तों को लेकर के पुगर नाम की नदी के किनारे चले गए और कुछ ही देर में वहां पर एक भव्य मंदिर का निर्माण हुआ, जिसके अंदर रत्न जड़ित झूला झूल रहा था और उसमें भगवान झूलेलाल झूला झूल रहे थे।

जब मुस्लिम शासक के द्वारा जेल की यात्रा की गई तो वहां पर उन्होंने जेल के अंदर झूलेलाल को नहीं पाया। इस पर मुस्लिम शासक के द्वारा बचे हुए हिंदुओं को कहा गया कि तुम्हारा अवतार तो भाग गया, अब तुम सब इस्लाम कबूल कर लो और मुसलमान बन जाओ। 

इसके बाद जब लोगों ने फिर से सिंधु नदी के तट पर जाकर देखा तो वहां पर सोने के सिंहासन पर भगवान झूलेलाल विराजमान थे और उनके एक हाथों में धर्म ध्वजा थी और दूसरे हाथों में गीता थी जिसका पाठ वह कर रहे थे।

लोगों की भीड़ अपने सामने देख कर के झूलेलाल जी ने भक्तों को यह आदेश दिया कि जाओ पवन देव और अग्नि देव जाकर के मुस्लिम राजा के साम्राज्य को जला डालो। इस पर मुस्लिम शासक रोता हुआ और रहम की भीख मांगता हुआ भगवान झूलेलाल के चरणों में गिर जाता है और अपने द्वारा किए गए सभी कामों के लिए क्षमा की याचना करता है।

इस पर भगवान झूलेलाल मुस्लिम शासक को क्षमा दान देते हैं और पवन देव तथा अग्नि देव को शांत रहने के लिए कहते हैं। इसके अलावा झूलेलाल जी ने मुस्लिम शासक को यह भी आदेश दिया कि वह धार्मिक कट्टरता छोड़ दे और जिस धर्म में इंसान को भगवान ने पैदा किया है उसे उस धर्म का पालन करने दे और हिंदू और मुसलमानों को एक ही समझे।

इस पर मुस्लिम शासक के द्वारा हाथ जोड़कर के यह कहा गया कि है पीरों के पीर आपके चरणों में मेरा बारंबार नमस्कार है और इस प्रकार से भगवान झूलेलाल के चमत्कार से हिंदू जनता को मुस्लिम शासक के अत्याचार से आजादी मिली।

संत झूलेलाल के अन्य नाम

भगवान झूलेलाल के एक ही नहीं बल्कि कई नाम है। इन्हें पाकिस्तान में जिंदा पीर और लाल साह के नाम से भी जाना और पुकारा जाता है। इसके अलावा जो लोग हिंदू धर्म के हैं वह संत झूलेलाल को लाल साईं, अमरलाल, जिंद पीर, 

उदेरोलाल जैसे नाम से जानते हैं साथ ही इन्हें वरुण देवता का और जल देवता का अवतार भी माना जाता है। 

भारत के अलग-अलग राज्यों में लोग झूलेलाल को उदेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसाँई, पल्लेवारो, ज्योतिनवारो, अमरलाल जैसे नामों से पूजते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता के लोग चैती चांद के त्यौहार के तौर पर भगवान झूलेलाल जी का त्यौहार काफी हंसी खुशी के साथ सेलिब्रेट करते हैं।

भगवान झूलेलाल के संदेश, शिक्षाएं, सुविचार कोट्स वचन

सर्वधर्म समभाव तथा कर्म की शिक्षा देने वाले झूलेलाल जी ने मानव कल्याण के लिए कुछ संदेश दिए जिन्हें यहाँ सिंधी तथा हिंदी भाषा में बता रहे हैं.

  • ईश्वर अल्लाह हिक आहे अर्थात ईश्वर अल्लाह एक हैं.
  • कट्टरता छदे, नफरत, ऊंच-नीच एं छुआछूत जी दीवार तोड़े करे पहिंजे हिरदे में मेल-मिलाप, एकता, सहनशीलता एं भाईचारे जी जोत जगायो अर्थात विकृत धर्माधता, घृणा, ऊंच-नीच और छुआछूत की दीवारे तोड़ो और अपने हृदय में मेल-मिलाप, एकता, सहिष्णुता, भाईचारा और धर्म निरपेक्षता के दीप जलाओ.
  • सभनि हद खुशहाली हुजे अर्थात सब जगह खुशहाली हो
  • सजी सृष्टि हिक आहे एं असां सभ हिक परिवार आहियू अर्थात सारी सृष्टि एक है, हम सब एक परिवार है.

झूलेलाल जयंती 2023 डेट

झूलेलाल जयंती अथवा चेटीचंड चैत्र माह की शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाता हैं. इस दिन पहली बार पूर्ण चन्द्र दर्शन होता हैं. वरुण देव का अवतार माने जाने वाले झूलेलाल जी की जयंती का पर्व सिंधियों का सबसे बड़ा पर्व हैं. वर्ष 2023 में यह 23 मार्च के दिन मनाया जाएगा.

इस दिन भारत में गुड़ी पड़वा तथा उगदी को भी मनाते हैं, इस दिन जगह जगह पर मन्दिरों में पूजा अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रम व जुलुस निकाले जाते हैं. इस अवसर पर दिन प्रसाद के तौर पर उबले काले चने व मीठा भात सबको बांटा जाता हैं. चलिओ उर्फ़ चालिहो को चालिहो साहिब भी एक सिंधी पर्व हैं जिन्हें अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार अगस्त या जुलाई माह में सिंधी समुदाय मनाता हैं. चालीस दिन चलने वाले इस पर्व में साधक अपने आराध्य झूलेलाल का आभार प्रकट करते हैं.

झूलेलाल जी आरती

ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा।
पूजा कनि था प्रेमी, सिदुक रखी सेवा।। ॐ जय…

तुहिंजे दर दे केई सजण अचनि सवाली।
दान वठन सभु दिलि सां कोन दिठुभ खाली।। ॐ जय…

अंधड़नि खे दिनव अखडियूँ – दुखियनि खे दारुं।
पाए मन जूं मुरादूं सेवक कनि थारू।। ॐ जय…

फल फूलमेवा सब्जिऊ पोखनि मंझि पचिन।।
तुहिजे महिर मयासा अन्न बि आपर अपार थियनी।। ॐ जय…

ज्योति जगे थी जगु में लाल तुहिंजी लाली।
अमरलाल अचु मूं वटी हे विश्व संदा वाली।। ॐ जय…

जगु जा जीव सभेई पाणिअ बिन प्यास।
जेठानंद आनंद कर, पूरन करियो आशा।। ॐ जय…

यह भी पढ़े-

उम्मीद करता हूँ दोस्तों Jhulelal Biography In Hindi Language का यह लेख आपकों अच्छा लगा होगा. इस लेख में हमने झूलेलाल की जीवनी जीवन परिचय इतिहास जयंती स्टोरी के बारें में जानकारी दी हैं. Jhulelal Biography In Hindi कैसी लगी कमेंट कर अपनी राय जरुर दे, साथ ही आपकों हमारा लेख पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

3 thoughts on “झूलेलाल की जीवनी जीवन परिचय इतिहास जयंती स्टोरी | Jhulelal Biography In Hindi Language”

    • जय झूलेलाल
      अच्छी जीवनी है औऱ भी जानकारी जोड़ना चाहिये।

      Reply

Leave a Comment