सीखने पर सुविचार और अनमोल वचन | Learning Quotes In Hindi

Learning Quotes In Hindi : व्यक्ति जीवन भर कुछ न कुछ सीखता (Learned) रहता हैं. ज्ञान के सीखने की कोई उम्रः नही होती हैं. सीखना इच्छा / जिज्ञासा पर निर्भर करता है जितने अधिक जानने की ललक होगी, वह उतना ही अधिक ज्ञानी बनेगा. सीखना अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है जिसका एक स्तर विद्वता, पांडित्य, विद्वान या पंडित कहलाता है इस श्रेणी पर पहुचने के बाद व्यक्ति औरों को ज्ञान देना आरम्भ कर देता हैं. आज के इस लेख में हम सीखने पर सुविचार (Learning Quotes Hindi, Quotes on Learning) में महापुरुषों के थोट्स जानेगे.

सीखने पर सुविचार और अनमोल वचन | Learning Quotes In Hindi

सीखने पर सुविचार और अनमोल वचन | Learning Quotes In Hindi

जो अपने ज्ञान में वृद्धि नही करता है, वह उसकों कम कर देता हैं.


हमकों यह नही पूछना चाहिए कि कौन सर्वाधिक पांडित्यवान है, बल्कि यह पूछना चाहिए कि सर्वश्रेष्ठ पंडित कौन हैं.


एक अच्छा मनुष्य सदैव छात्र बना रहता हैं.


जो व्यक्ति विद्यार्जन करता है, परन्तु उसका उपयोग नही करता है, वह किताबों का बोझ लादकर ले जाने वाले बोझा ढ़ोने वाला जानवर होता हैं. क्या एक गधा यह समझता है कि वह अपनी पीठ पर एक पुस्तकालय ले जा रहा हैं अथवा लकड़ियों के गट्ठरों का एक बंडल लिए जा रहा हैं.


सब विद्वान बनना चाहते है परन्तु इसका मूल्य कोई नही चुकाना चाहता हैं.

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कर्म करते हुए हम सीखते हैं.


एक अच्छे मस्तिष्क के लिए बहुत कम विद्वता की आवश्यकता होती हैं.


विद्वता एक आदमी को अधिक अच्छा और एक आदमी को बहुत अधिक बुरा बना देती हैं,


हमकों जो कुछ सीखना हैं, वह हम करके सीखते हैं. 


विद्वता और बुद्धिमता के मध्य अधिक तालमेल नही होता हैं.


एक मूर्ख व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवनकाल की अपेक्षा एक विद्वान के जीवन के एक दिन में अधिक अनुभव प्राप्त किया जा सकता हैं.


शठ होना भाग्य की देन है, परन्तु मूर्खता का लाभ उठाने के लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति विद्वान बने.


अध्ययन में अत्यधिक समय व्यय करना आलस्य है, अलंकरण के लिए उसका उपयोग करना कृत्रिमता हैं, उसके नियमों के अनुसार निर्णय करना एक विद्वान के लिए हास्य की सामग्री हैं.


विद्यार्जन बच्चों का खेल नहीं हैं. हम बिना कष्ट सहे विद्यार्जन नही कर सकते है.


एक मनुष्य के लिए वह चीज सीखना असम्भव हैं जिसको वह समझता है कि मैं जानता हूँ.


मनुष्य जब पढाते हैं तो सीखते हैं.


कोई व्यक्ति विद्यार्जन के लिए कभी भी अत्यधिक बुड्ढा नही होता हैं,


धन का प्रेम और विद्या का प्रेम इनका मिलान बहुत कम होता है.


अधिक देखना, अधिक कष्ट भोगना तथा अधिक अध्ययन ये विद्या के तीन स्तम्भ हैं.


जो चीजे कष्ट देती हैं, वे प्रशिक्षित करती हैं.

सीखने पर सुविचार

मनुष्य बचपन से ही कुछ ना कुछ सीखता है जो उसके व्यक्तित्व का विकास करते हैं और जीवन को नए आयाम एवम् नई दिशा प्रदान करते हैं।


किसी भी कार्य में दक्षता प्राप्त करने के लिए मनुष्य को उस कार्य को सीखना पड़ता है।


कितने महापुरुष हुए चाहे पुराने काल की बात हो या वर्तमान काल की उन्होंने सीखकर ही कितने मुश्किल कार्यों को मुमकिन किया और अनेक महान कार्य किए। अपने कार्य में महारत हासिल करने के लिए सीख और कोशिश से अपने मुकाम की प्राप्ति की।


बच्चों में बचपन से ही अच्छे संस्कार सिखाने पर उनके भविष्य कल्याण में सहायक होते हैं और बच्चे का चरित्र निर्माण एक आदर्श रूप प्रस्तुत करता है। 


बच्चा सीखकर ही बड़ा होता है नई नई गतिविधियाँ सीखता है तो उसके व्यक्तित्व का विकास होता है।


मनुष्य अपने सपनों को पूरा करना चाहता है तो सीख की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है तभी अपने सपनों को साकार कर पाता है।


सीखकर ही अपने सपनों को श्रेष्ठ रूप देकर इंसान खुशी प्राप्त कर सकता है।


किसी बात का ज्ञान सीख के द्वारा ही प्राप्त होता है और उसकी महत्वपूर्णता पता चलती है। कोई बात अनजानी ही लगती है और अधूरा ज्ञान ही देती है अगर पूरी तरह न सीखी जाए।


जीवन में सुख समृद्धि का विकास करना है तो सीख कर ही प्राप्त किया जा सकता है। जीवन नीरस और खाली रहता है अगर कुछ न सीखा जाए। खुशी का अहसास सीख के माध्यम से होता है।


जीवन में मनुष्य को कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए भले गलतियाँ हो या परेशानी आए लेकिन सीखना बंद नहीं करना चाहिए। आगे चलकर  जीवन सीख से निखरता ही है।


मनुष्य को जीवन में बहुत कुछ करना चाहिए जिसके लिए वो अनेक प्रयास करता है और गलतियाँ भी होती हैं। मनुष्य को अपनी गलतियों से सीख मिलती है इसलिए कभी गलतियों से घबराना नहीं चाहिए।


मनुष्य अपने जीवन में नई नई बातें सीखकर अपने जीवन को सफल बना सकता है एवं उच्च शिखर पर पहुँचने का सामर्थ्य प्राप्त कर सकता है। अपने प्रत्येक दिन को सुनहरा बना सकता है।


जो मनुष्य अपने सुख दुख सहना सीख जाता है व जीवन जीना सीख जाता है। प्रत्येक परेशानियों में सकारात्मक पहलू देखना सीख जाता है।


मनुष्य को निस्वार्थ भाव से एक दूसरे को मदद करना सीखना चाहिए जो ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति करवाता है।


मनुष्य को अनेक अध्याय अपने जीवन की राहों से ही सीखने को मिल जाते हैं जिनमें अच्छे बुरे दोनों अनुभवों का समावेश होता है।

अभिभावकों द्वारा बच्चों में सिखाई गई अच्छी आदतें, अच्छे संस्कार, अच्छी बातें, सही मार्गदर्शन उनका भविष्य उज्जवल बनाते हैं एवम् बड़े होने पर उसका असर दिखता है।


मनुष्य को ना कहना भी सीखना चाहिए लेकिन किसको हाँ और किसको नहीं कहना चाहिए यह महत्वपूर्ण है। यह वास्तविक तथ्य सीखकर मनुष्य कभी धोखा नहीं खाता है।


मनुष्य को कभी सीखने से परहेज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि सीखकर ही मनुष्य अपने व्यक्तित्व को उत्कृष्ट बना सकता है।


जीवन में नई नई बातों को सीखने पर जानकारी बढ़ती है जिसके ज़रिए मनुष्य को जीवन में आगे बढ़ने के मार्ग मिलते हैं।


मनुष्य अगर धन कमाना चाहता है उसमें वृद्धि करना चाहता है तो सीखना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। सीखने की अच्छी आदत को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए।


मनुष्य को एक दूसरे से सकारात्मक रूप से सही ज्ञान सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए कभी मना नहीं करना चाहिए। जितना हो सके सही रूप से सीखना चाहिए।


मनुष्य अपनी ज़िन्दगी से बहुत कुछ सीखता है जिन्हें अमल करने पर जीवन सफल हो जाता है एवम् जीवन पथ के लिए उचित स्वरूप प्रस्तुत करता है।


मनुष्य को अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सीखते रहना चाहिए इससे व्यक्तित्व का विकास ही होता है। जीवन में सुख, शांति, सफलता, समृद्धि मिलती है।


मनुष्य जब जिसके साथ हो उनके साथ आनंदित महसूस करना चाहिए और महत्व देनी चाहिए क्योंकि साथ समय के अनुसार एक सा नहीं रहता। मनुष्य को हर किसी के सकारात्मक साथ को इंजॉय करना सीखना चाहिए।


मनुष्य अगर हर पड़ाव में युवा रहना चाहता है तो उसे सीखने की कला हर वक्त सीखनी चाहिए क्योंकि जब वह सीखना छोड़ देता है उस समय वह युवा नहीं रहता है। सीखना मन मस्तिष्क को जवान रखता है।


जीवन में मनुष्य को अनेक असफलताओं का सामना करना पड़ता है जिनसे घबराने के बजाय हमें इन असफलताओं से सीख प्राप्त करनी चाहिए जो सफलता के रास्ते खोल देती है।


मनुष्य अपनी जिंदगी से बहुत कुछ सीखता है। किताबों से तो अक्षर ज्ञान होता है लेकिन मनुष्य को वास्तविक सीख जीवन के अनुभवों से ही प्राप्त होती है।


मनुष्य को अपने पतन से बचना है तो जिंदगी में सीखने की आदत को अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहिए। ज़िम्मेदार बनकर हर रूप में कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए।


जीवन में अगर ठहराव आता है तो जीवन नीरस हो जाता है। जीवन को स्फूर्ति से भरने के लिए, नई ताज़गी देने के लिए सीख का रास्ता अपनाना उचित होता है।


जीवन को शानदार और सुंदर बनाना है तो स्वयं के अंदर सीखने की ललक पैदा करनी चाहिए। जीवन डर कर शांति पूर्वक नहीं जिया जा सकता है बल्कि बिना डर के जीवन जीना सीखना चाहिए।


मनुष्य समय और हालातों से बहुत कुछ सीखता है जो उसे वास्तविक संदर्भ से अवगत कराते हैं। जीवन की सच्चाई का अनुभव मनुष्य सीख कर ही कर सकता है।


मनुष्य को अच्छे बुरे की समझ, सही गलत की पहचान बुरे वक्त में होती है और बुरा वक्त मनुष्य को मनुष्य की हकीकत से इत्तेफाक कराता है और दुनिया का वास्तविक चेहरा दिखाता है। अतः ये कहा जा सकता है कि बुरा वक्त मनुष्य को सही सीख देता है।


जीवन में अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अथक कोशिश की ज़रूरत होती है। मनुष्य को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कोशिश करना सीखना चाहिए जो हार को भी जीत में बदलने का सामर्थ्य रखती है।


मनुष्य जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियों से गुज़रता है। मनुष्य को इन परिस्थितियों से भागना नहीं चाहिए बल्कि इन परिस्थितियों का डटकर सामना करना सीखना चाहिए।


मनुष्य को अपने ज्ञान में बढ़ोत्तरी करने के लिए सीखते रहना चाहिए। ज्ञान का भंडार असीमित है जो कभी खाली नहीं होता मनुष्य जितना भी सीखे कम लगता है क्योंकि प्रत्येक दिन नया रूप लेकर आता है।


जीवन पथ पर हर मनुष्य व प्रत्येक वस्तु कुछ न कुछ सीख देती है जिसे हमें ग्रहण करना चाहिए, जीवन पथ पर स्वयं के लिए लाभकारी ही साबित होते हैं।


जीवन में हमें कभी कर्म करने से पीछे नहीं हटना चाहिए क्योंकि मनुष्य अपने कर्मों से ही सीखता है और जीवन में उन कर्मों का असर दिखाई भी पड़ता है।


मनुष्य का यह कहना कि हम तो सबसे ज्यादा ज्ञानवान है मिथ्या सोच है क्योंकि मनुष्य हर पल सीखता ही है और ज्ञानी अपने वचनों से ज्यादा अपने कार्यों से महान बनते हैं। महानता सीख से ही प्राप्त होती है।


जीवन में कष्ट मनुष्य को असहनीय लगते हैं लेकिन यह दुख दर्द मनुष्य को जीवन में वास्तविक पाठ सिखाते हैं जो जीवन में कई रूपों से सहायक सिद्ध होते हैं।


मनुष्य जीवन में कोशिश कर कार्य करते हुए सीखकर ही अपने लक्ष्यों की प्राप्ति करते हैं।


सीख वो क्रिया है जिसका पालन न करके मनुष्य अधूरा ही है वो पूर्णता सीखकर ही प्राप्त करता है जो जीवन को नया रूप प्रदान करती है।

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