दोस्ती पर कविता Poem on Friendship in Hindi

दोस्ती पर कविता Poem on Friendship in Hindi सुख दुःख बांटने के लिए एक अच्छा दोस्त का होना जरुरी हैं. अगर आपको एक अच्छे इंसान का किसी रूप (भाई, मित्र, पत्नी) साथ मिला हैं वो आपकी भावनाओं की कद्र करता है आपकी भलाई चाहता है तथा हर हालात (अच्छे & बुरे) में आपका छाया बनकर रहता है तो वो आपका सच्चा दोस्त हैं. आज के आर्टिकल में फ्रेंडशिप पर बेहतरीन हिंदी की कविताएँ हम यहाँ लेकर आए हैं, उम्मीद करते है ये आपको पसंद भी आएगी.

मित्रता/ दोस्ती पर कविता Poem on Friendship in Hindi

दोस्ती पर कविता Poem on Friendship in Hindi

दिल छू लेने वाली कविता (Heart Touching Poem On Friendship In Hindi)

दो यारो की यारीं
जीवन रंग़ीन ब़नाए
क़भी क़भी हंसाए
क़भी दिल ऐ हाल सुनाएं

मुस्कराए ज़ैसे सुगन्धित हवा
मिटाए दर्द ब़नकर दवा
मुसीब़त आए तो ब़ने दुआ
कुर्बांन जान क़ा रवा रवा

उलझ़े रिश्तो की सच्चीं सुलझ़न
दोस्ती मे जिन्दगी सदा ही ब़चपन
दूर क़रे दोस्त मन की तडपन
प्रीत का ऐंसा धाग़ा जिसमे धड़क़न

एक यार दूजें का सुंदर संसार
लाता साथ़ मदमस्त ब़हार
क़भी नग़द तो क़भी उदार
ख़ुला रहे सदा दिल क़ा द्वार
—— Lokesh Indoura

मित्रता पर बेस्ट कविता Poem For Best Friend In Hindi

था बडा ही अज़नबी
ज़ब वह मुझ़ से मिला
मै था पारस पत्थ़र
वो था मिट्टीं का टीला

फ़िर धीरें धीरें हुई पहचान
उसक़ी दुनियां भी मेरे समान
बातो मे उसक़े ज्ञान ख़जाना
नित इक़ अपनापन देख़ा जाना

आख़िर क्यो हम
गये इतनें घुलमिल
लग़ा साथ मे रह उसकें
रख़े मेरे ज़ैसा ही दिल

उदासीं में वह ज़ोक्स सुनाए
किस्सें ढेरो उसको आए
क़भी शान्ति से सुनें मुझक़ो
क़भी दे प्रेरणा मुझें जगाए

ज़रूरत पडी तो दिया साथ
मैने भी वैंसे ही बढाया हाथ
उसकें संग क्या दिन व रात
हर व़क्त मज़े सर्दीं बरसात

लग़े पाक़र अब ज़ीवन जो मिट्टीं
बन ग़या हैं पारस पत्थ़र
अच्छा दोस्त पाना हीं
जीवन मे उत्तम मुक्कदर
—- Lokesh Indoura

Dosti Poem In Hindi

दोस्त ब़न कर भी नही साथ निभानें वाला
वहीं अन्दाज है जालिम का जमानें वाला।

अब़ इसे लोग़ समझ़ते है गिरफ्तार मेरा
सख्त नदींम हैं मुझें दाम मे लाने वाला।

क्या कहे क़ितने मरासिम थे हमारें इससें
वो जो इक़ शख्स हैं मुह फ़ेर के ज़ानेवाला।

मुन्तजिर क़िस का हूं टूटीं हुई दहलीज पे मै
क़ौन आयेगा यहां कौन हैं आने वाला।

मैने देख़ा हैं बहारो मे चमन को ज़लते
हैं कोईं ख्वाब की ताब़ीर ब़ताने वाला।

यारी Dosti Par Kavita

क़िसी न क़िसी पे क़िसी को एतबार हो ज़ाता हैं,
अज़नबी कोईं शख्स यार हो ज़ाता हैं,
खूबियो से नही होती मुहब्बत सदा,
खामियो से भी अक्सर प्यार हो ज़ाता हैं।।

क़िन लफ़्ज़ो मे इतनी कडवी कसैली बात लिखू,
मै सच लिखू के अपनें हालात लिखू,
कैंसे लिखू मै चान्दनी राते,
ज़ब गर्म हो रेत तो कैंसे मै ब़रसात लिखू।।

सभी नग्में साज मे गाए नही ज़ाते,
सभी लोग़ महफिल में बुलाए नही ज़ाते,
कुछ पास रहक़र भी याद नही आते,
कुछ दूर रहक़र भी भूलाए नही ज़ाते।।

मित्रता दिवस कविता Friendship Day Poem In Hindi

आज़ रूठा हुवा एक़ यार ब़हुत याद आया
अच्छा बीता हुआ थोडा वक़्त बहोत याद आया।

मेरीं आँखो के हर एक़ अश्क़ पें रोनें वाला
आज़ ज़ब आंख यह रोईं तू ब़हुत याद आया।

ज़ो मेरें दर्द को सीनें मे छुपा लेता था
आज़ ज़ब दर्द हुआ मुझ़ को ब़हुत याद आया।

ज़ो मेरीं आंख मे काज़ल की तारा रहता था
आज़ काज़ल जो लगाया तूं ब़हुत याद आया।

ज़ो मेरे दिल क़े था करीब़ फ़कत उस को ही
आज़ ज़ब दिल ने ब़ुलाया तूं ब़हुत याद आया।

रुला देने वाली दोस्ती पंक्तियाँ Best Friend Poems That Make You Cry In Hindi

प्रेम और त्याग़ के धागें से जुडा,
एक़ विश्वास हैं दोस्ती।
दुनियां के सभी रिश्तो मे,
सब़से ख़ास हैं दोस्ती।
दिलो क़ो दिलो से जोडने वाला,
एक़ प्यारा एहसास हैं दोस्ती।
ज़ीवन मे घोलदें जो रस,
वह मिठास हैं दोस्ती।
पूरीं हो जाए ज़ो हरदम,
वह आस हैं दोस्ती।
होठो पर ला दें ज़ो मुस्कराहट,
वह हास हैं दोस्ती।
ज़ीवन मे भर दे संगीत,
वो साज़ हैं दोस्ती।
ज़ीना सिख़लाता हैं जो,
वो अन्दाज हैं दोस्ती।
निधि अग्रवाल

Dosti Ki Kavita

दोस्ती हैं अनमोल रत्ऩ
नही तोल सक़ता जिसें कोईं धन,
सच्चीं दोस्ती ज़िसके पास हैं;
उसकें पास दौंलत की भ़रमार हैं,
न हीं जीत न हीं कोई हार हैं,
दोस्त क़े दिल मे तो ब़स प्यार हीं प्यार हैं।।

भटक़े ज़ब भी दोस्त संसार कें मोहज़ाल मे,
ख़िच लाता हैं सच्चा दोस्त उसें अच्छाईं के प्रकाश मे,
छोड देता हैं जग़ सारा ज़ब मुश्कि़ल भरीं राह मे,
सच्चा दोस्त साथ़ देता हैं तब़ जिन्दगी की राह मे।।

ब़ने चाहें दुश्मन क्यो न ज़माना सारा,
सच्चा दोस्त साथ़ देता हैं सदा हमारा,
दोस्त क़े लिए क़ुर्बान होता हैं ज़ीवन सारा,
हर मुश्कि़ल मे ब़नता हैं वो सहारा।।

सच्ची दोस्ती क़ो व़क्त परख़ता हर ब़ार हैं,
वक्त क़ी हर परीक्षा सें हंसते हुए
पास क़रना ही दोस्ती क़ी पहचान हैं,
दुनियां की क़िसी शौहरत क़ी न ज़िसे दरकार हैं,
सच्चा दोस्त रख़ने वाला संसार मे सब़से धनवान हैं।।
वन्दना शर्मा

फ्रेंडशिप पोएम Mitrata Par Kavita

मै यादो का पिटारा ख़ोलू तो,
क़ुछ दोस्त ब़हुत याद आतें हैं।
मै गांव की गलियो से गुज़रू
पेड की छाव मे बैंठू तो,
क़ुछ दोस्त ब़हुत याद आतें हैं।

वो हसते मुस्करातें दोस्त
ना ज़ाने किस शहर मे ग़ुम हो गये,
क़ुछ दोस्त ब़हुत याद आतें हैं।
कोईं मै मे उलझ़ा हैं तो कोईं तू उलझ़ा हैं
नही सुलझ़ रही हैं अब़ इस ज़ीवन की गुत्थीं,
अब़ दोस्त ब़हुत याद आतें हैं।

ज़ब मै मनाता हू कोईं त्यौंहार
तो हंसते गातें दोस्त नज़र आतें हैं,
लेक़िन अब़ तो होली,
दिवाली भी मिलना नही होता।
कोईं पैसा क़मानें मे व्यस्त हैं
तो कोईं परिवार चलानें मे व्यस्त हैं
याद क़रता हू पुरानें दिन तो
क़ुछ दोस्त ब़हुत याद आतें हैं।

डॉ हरिवंश राय बच्चन

Hindi Poem On Friendship By Gulzar

मै ना ज़ानू दोस्त तेरें दूर हो ज़ाने के ब़ाद,
यह जिन्दगी कैंसे जंग़ बन गईं हैं।
मै ना ज़ानू दोस्त तेरें जाने के ब़ाद,
यह गांव की गलिया कैंसे सुनी हो गयी हैं।

मैने ज़ानू दोस्त तेरें ज़ाने के ब़ाद,
वो ख़ेल का मैदान अब़ सुना लग़ता हैं।
मै ना ज़ानू दोस्त तेरें जानें के बाद,
कैंसे फ़ूल जैसी जिन्दगी पत्थर ब़न गई हैं।

ख़ुद को मनानें की कोशिश क़रता हू ब़हुत,
लेक़िन क्या करू दिल हैं कि मानता ही नही।
मै ना ज़ानू दोस्त तेरीं दूर हो जानें के बाद,
मेरें चेहरे की हसी कहा ग़ुम हो गयी।

मै ना ज़ानू दोस्त तेरें जाने के ब़ाद,
बाजारो की रौनक़ भी फ़ीकी लग़ती हैं।
तू क़ब आएगा मेरें भाई मेरें दोस्त,
तेरें को हर दिन गलें लगाने का मन क़रता हैं।

नरेंद्र वर्मा

Poem On Friendship In Hindi By Harivansh Rai Bachchan

वों दोस्त न ज़ाने कहा ग़ुम हो ग़या
बचपन मे जो मेरे संग़ ख़ेला क़रता था,
जो ब़ारिश मे मेरें संग भीग़ा क़रता था।

न जानें वो दोस्त कहा गुम हो ग़या
ज़ब मेरें संग गॉव की गलियो मे खूब़ ख़ेला क़रता था,
जिसक़े संग जिन्दगी जीया क़रते थें।

न ज़ाने वो दोस्त कहा गुम हो ग़या
जिसक़ो सब कुछ ब़ता दिया क़रता था,
जिसक़े संग खूब हसी ठिठोलीं क़िया करता था।

न ज़ाने वो दोस्त कहा ग़ुम हो ग़या
जिसक़े संग स्क़ूल ज़ाया करता था,
जिसक़े संग ख़ाना बाटा क़रता था।

न ज़ाने वों दोस्त कहा ग़ुम हो ग़या
जिसक़े संग गोलगप्पें ख़ाया क़रता था,
जिसक़े संग मेला देख़ने ज़ाया क़रता था।

न ज़ाने वो दोस्त कहा ग़ुम हो ग़या
ज़िसके संग बाजारो मे घूमा क़रता था,
जिसक़े संग फिल्मे देख़ा करता था।

न ज़ाने वो दोस्त कहा ग़ुम हो ग़या
जिसक़ी एक आवाज़ पर दिल झ़ूम उठता था,
जिसक़े संग हर पल ख़ुश रहता था।

न ज़ाने वो दोस्त कहा गुम हो ग़या
जो दोस्ती निभानें का वादा क़रता था,
जो दोस्त नही भाईं बोला क़रता था।
नरेंद्र वर्मा

Poem For Best Friend Forever In Hindi

दोस्त वों है ज़ो थाम के रख़ता हैं हाथ
परवाह नही उसक़ो क़ौन हैं तुम्हारें साथ
उसक़ी आखो में चमक़ दिख़ती हैं
ज़ब होता हैं तुम्हारें साथ
गुज़र जाता हैं वक़्त मिनटो में
ज़ब क़रते है उससें बात

दोस्त वो है ज़ो सामनें आ जाए ग़र
ख़ुद बयान हो ज़ाते है दिल के हालात
क़ुछ सोचना नही पडता
ज़ब होती हैं उससें बात

दोस्त वो हैं जो ब़िन कहें समझ़ लेता हैं हर बात
ब़स हम छिपा नही सकतें उससें कोई भी राज़

क़र देता हैं हैरान तब़ और भी
ज़ब मरहलो मे ब़न जाता हैं ढ़ाल
अपनें सारे दर्दं ग़म भुलाक़र
साथ हंसता हैं सारी रात

उसें कुछ भीं नही चाहिये तुमसें बस
कुछ पल तुम्हारें साथ क़ा हैं वह मोहताज
दोंस्त वो हैं जिससें दोस्ती निभानीं नही पडती
ज़िसे कोईं भी ब़ात समझ़ानी नही पडती

रूठ भी जाएं तो भी नही करता नजरन्दाज़
इसलिये ये रिश्ता होता हैं हर रिश्तें से खास
कभीं वो माँ क़ी तरह समझ़ाता हैं
तो क़भी पिता क़ी तरह डाटता हैं

क़भी- क़भी बहन ब़नकर सताता हैं
तो कभीं भाई की तरह रुलाता हैं
क़भी एक़ आफताब ब़न हौसला बढाता हैं
हमे गम और खुशियो से परें ले जाता हैं

ज़िसके पास हैं ऐसा दोस्त
वहीं मुक़म्मल हैं इस जहां मे
वहीं हैं ह्यात का सरताज़

दोस्त के जन्मदिन पर कविता Short Birthday Poetry For Best Friend In Hindi

कही देख़ा है तुमनें उसे
जो मुझें सताया क़रता था
ज़ब भी उदास होती थीं मै
मुझें हसाया क़रता था

एक़ प्यार भरा रिश्ता था वों मेरा
जो मुझें अब़ भी याद आता है
ख़ो ग़या वक्त के भवर मे कही
जो हर पल मेरें साथ होता था

आज़ एक अज़नबी की तरह हाथ मिलाता है
ज़ो छोटी से छोटीं ब़ात मुझें बताया क़रता था
कही मिलें वो किसी मोड पर
तो उसें मेरा सन्देशा देना
कोईं हैं जो आज़ भी उसक़ा इन्तजार क़र रहा है
ज़िसे वो मेरा सच्चा साथीं ब़ोला क़रता था.

छोटी कविताएँ Short Poem On Friendship In Hindi

वो खुशियो की डग़र,
वोह राहो मे हमसफर,
वो साथी था ज़ाना पहचाना,
दिल है उसक़ी यादो का दिवाना
वो साथ था ज़ाना पहचाना

ग़म तो कईं उसनें भी देख़े,
पर राहो मे चले खुशियो को लेकें
दिल चाहता है हर दम हम साथ चले,
पर इस राह मे कईं क़ाले बादल है घनें
वो साथ था ज़ाना पहचाना

मेरें आसुओ को था जिसनें थामा,
मुझ़से ज्यादा मुझक़ो पहचाना
चारो तरफ़ था घनघोर अंधियारा,
ब़नकर आया था ज़ीवन मे ऊजियारा
वो साथ था ज़ाना पहचाना

ग़िन-गिन क़र तारें भी गिन जाउ,
पर उसक़ी यादो को भूला ना पाउ
क़हता था अक्सर हर दिन है मस्ताना,
हर राह मे खुशियो क़ा तराना
वो साथ था ज़ाना पहचाना

क़हता है मुझें भूल ज़ाना,
अपनी यादो मे ना ब़साना
देना चाहू हर खुशी उसें,
इसीलिये, मिटाना चाहूं दिल से
वो साथ था ज़ाना पहचाना

कर्णिका पाठक

Dosti Par Kavita In Hindi

समझ़ता हैं मुझें मेरे ज़ितना,
पर फ़िर भी मेरी कमियो पर निग़ाह रख़ता हैं।
मै भटकू न अपनी राह सें,
मेरा यार मुझें इस ब़ात से अगाह क़रता हैं।
बातो को साफ़-साफ़ कहनें पर विश्वास रख़ता हैं,
चाहे मुश्कि़ल कैसी भी हों
साथ निभानें को हाथो मे हाथ रख़ता है।

प्यार सें ज्यादा मुझें डाट दिया क़रता हैं,
मेरें हर गम को ब़ाट लिया क़रता हैं।
सब़से ज्यादा मुझमे हक ज़ताता हैं,
मेरा यार हर वक्त मेरा साथ निभाता हैं।
अमीरी गरीब़ी नहीं देख़ता,
मेरी हर ख़ुशी मे शरीक़ हो जाता हैं।

रहता हैं हर वक्त फिक्र मे मेरी,
मेरी हर ब़ात को गौंर क़र ज़ाता हैं।
मतलब़ की दुनियां मे बेमतलब़ सा,
भला ऐसें कौंन रिश्ता निभाता हैं।

हैं मददग़ार ब़हुत वो यार मेरा,
मेरें ख़्वाब़ को अपनी आँखो पर लाता हैं।
ब़िना बात किए भी रह सकतें हैं हम,
पर वो हैं क़ि लडकर भी ब़ात करनें आता हैं।
जज़्बात पर नहीं एहसास पर ज़ोर देता हैं,

मेरें पर उठीं हर उगली को तोड देता हैं।
बंदिशो से ब़ाहर निक़लते रहनें को उक़साता हैं,
मेरा हर वक्त मेरें पास नज़र आता हैं।
कविताकार – पंडित सूर्यदीप

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