अर्थव्यवस्था क्या है, इसके प्रकार व विशेषताएं What Is The Economy In Hindi

अर्थव्यवस्था क्या है, इसके प्रकार व विशेषताएं What Is The Economy In Hindi : नमस्कार फ्रेड्स आज का लेख इकोनोमी क्या होती है अर्थव्यवस्था क्या होती है इसका अर्थ परिभाषा और भारतीय इकोनोमी के बारे में सरल भाषा में इस आर्टिकल में जानकारी दी गई हैं. उम्मीद करते है ये लेख आपको पसंद आएगा.

अर्थव्यवस्था क्या है,प्रकार व विशेषताएं What Is Economy In Hindi

अर्थव्यवस्था क्या है, इसके प्रकार व विशेषताएं What Is The Economy In Hindi

प्रत्येक देश में व्यक्ति अपनी जीविकापार्जन के लिए विभिन्न प्रकार के आर्थिक क्रियाकलाप में संलग्न है. किसान हो या श्रमिक, उद्योगपति हो या दुकानदार, अध्यापक हो या डॉक्टर विभिन्न आर्थिक वर्गों द्वारा संपादित इन विभिन्न प्रकार के आर्थिक कार्यों के सम्पादन के लिए किसी सुव्यवस्थित व्यवस्था संगठन अथवा प्रणाली (Economy) की आवश्यकता होती है.

इस प्रणाली या व्यवस्था को ही अर्थव्यवस्था कहा जाता है. निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि एक ऐसी प्रणाली अथवा व्यवस्था जिसके द्वारा लोग अपना जीविकापार्जन करते है, अर्थव्यवस्था कहलाती है.

अर्थव्यवस्था एक ऐसा ढांचा है जिसमे विभिन्न वस्तुओं के उत्पादकों के बिच आपसी तालमेल व परस्पर सहयोग का जन्म होता है. अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है. जिसमे उत्पादन,विनिमय, वितरण आदि आर्थिक क्रियाएं निरंतर चलती रहती है.

सामान्यत यह कहा जा सकता है कि यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत किसी निश्चित क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का संचालन होता है, अर्थव्यवस्था कहलाती है.

उदहारण के लिए शक्कर का उत्पादन शक्कर मिल द्वारा किया जाता है. शक्कर के उत्पादन के लिए उत्पादक गन्ना किसान से मशीनें व उपकरण उद्योगों से तथा बिजली उर्जा सयंत्रों से प्राप्त करता है.

उत्पादित शक्कर को देश के विभिन्न भागों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए परिवहन के साधनों (रेल, ट्रक, जहाज आदि) की आवश्यकता पडती है.

शक्कर उत्पादन हेतु विभिन्न उत्पादकों के मध्य परस्पर सहयोग व तालमेल का ढांचा ही अर्थव्यवस्था है.

अर्थव्यवस्था का वर्गीकरण (Classification of Economy)

  • आपके गाँव या कस्बें की अर्थव्यवस्था

सम्पूर्ण गाँव या कस्बे के निवासियों की अर्थव्यवस्था का अध्ययन

  • राज्य की अर्थव्यवस्था

राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के निवासियों के आर्थिक क्रियाकलापों का अध्ययन.

  • भारत की अर्थव्यवस्था

सम्पूर्ण देश के निवासियों के आर्थिक क्रियाकलापों का अध्ययन.

अर्थव्यवस्था के प्रकार (types of economy in hindi)

किसी भी देश में उत्पादन, उपभोग, विनिमय, वितरण आदि आर्थिक क्रियाओं का संचालन, अर्थव्यवस्था के स्वरूप पर निर्भर करता है. देश में आर्थिक क्रियाओं के संचालन में राज्य का हस्तक्षेप कितना होगा?

उत्पत्ति के साधनों पर स्वामित्व का आधार क्या होगा? आर्थिक क्रियाओं के संचालन का उद्देश्य क्या होगा? आदि आधारों पर विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को हम निम्न तीन भागों में विभाजित कर सकते है.

  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था
  • समाजवादी अर्थव्यवस्था
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था का इतिहास (History of economy)

अर्थव्यवस्था का सन्धि विच्छेद करने पर यह दो शब्दो से मिलने पर बनता है: अर्थ एवम व्यवस्था. जिसमें अर्थ का अर्थ धन अथवा माल या मुद्रा होता हैं वहीँ व्यवस्था शब्द का अर्थ कार्यप्रणाली से होता हैं.

वैसे तो इकोनोमिक्स अप्रत्यक्ष रूप से मानव सभ्यता के आरम्भिक रूप से चली आ रही हैं मगर इसका सर्वप्रथम प्रयोग आचार्य चाणक्य की पुस्तक अर्थशास्त्र में मिलता हैं जिसकी विषयवस्तु सम्पूर्ण रूप से अर्थ व्यवस्था पर आधारित नहीं थी मगर उसमें इसके बारें में भी बताया गया था.

अर्थव्यवस्था का प्राचीन इतिहास सुमेर राजवंश में चलन में दीखता हैं. इस वंश के शासनकाल में विनिमय प्रणाली प्रचलित थी. तथा मध्यकालीन सम्पूर्ण इतिहास में वस्तु विनिमय तथा मुद्रा विनिमय के आधार पर सम्पूर्ण व्यापार आधारित था.

20 वीं सदी आते आते सम्पूर्ण विश्व बाजार दो महाशक्तियों के अधीन हो गया, जिस दौड़ में अब चीन भी शामिल हो गया हैं.

विकास के आधार पर अर्थव्यवस्था के प्रकार

विकसित अर्थव्यवस्था:– यह अर्थव्यवस्था का विकसित स्वरूप हैं जो अपने उच्च स्तर को प्राप्त कर चुकी हैं. इस अर्थव्यवस्था वाले देश अपने विकास के लिए अधिकतम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर चुके हैं.

इन्हें अपने उत्पाद को बेचने के लिए बाजार की आवश्यकता रहती हैं यही वजह हैं कि आज अधिकतर विकसित देश नयें बाजारों की खोज में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन तथा चीन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के उदाहरण हैं.

विकासशील अर्थव्यवस्था:- यह अर्थव्यवस्था का निम्न स्वरूप हैं जिन देशों की अर्थव्यवस्थाएं अपने निम्न स्तर पर अथवा पिछड़ी हुई अथवा अल्प विकसित हैं.

मुख्य रूप से वे देश जो उपनिवेशवाद का शिकार रहे अथवा अपने ससाधनों का उपयोग नहीं कर पाए हैं वे इसके अंतर्गत आते हैं भारत की अर्थव्यवस्था का स्वरूप विकासशील श्रेणी का हैं.

अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका | Role Of Currency In Economy In Hindi

अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका अपरिहार्य है. यदि यह कहा जाए कि मुद्रा के बिना अर्थव्यवस्था का अस्तित्व ही नहीं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

मुद्रा के सम्बन्ध में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला यह विश्वास कि इसे अर्थव्यवस्था में अन्य सभी के द्वारा स्वीकार कर लिया जाएगा, मुद्रा की उपयोगिता स्वयं सिद्ध कर देता है.

वस्तुतः अर्थव्यवस्था में मुद्रा वह कोई भी वस्तु हैं जिसे वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान की क्रिया हेतु सामान्य स्वीकृति प्राप्त हैं. यह सामान्य स्वीकृति ही अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका को प्रतिष्ठित स्थान प्रदान करती हैं.

अर्थव्यवस्था में मुद्रा के अनेक रूप है जो भुगतान के साधन के रूप में प्रयुक्त होते है. यदपि आम जनता के लिए मुद्रा का सामान्य अर्थ केवल करेंसी बैंक नोट और मुद्रा से है,

अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका धीरे धीरे होने वाले विकास तथा अर्थव्यवस्था के सम्बन्ध में अस्तित्व में आई अवधारणाओं के परिणामस्वरूप अपरिहार्य बनी.

वस्तु विनिमय से लेकर वर्तमान की साख मुद्रा तक मुद्रा विनिमय का माध्यम, खाते की इकाई या मूल्य मापक, मुद्रा का भंडार आदि बन गई है. इसके कारण अर्थव्यवस्था तीव्र गति से आगे बढ़ी है.

पूंजी को गतिशीलता प्रदान करना मुद्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य हैं. अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका को और अच्छी तरह समझने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा इसे समझते हैं.

  • लोककल्याणकारी अर्थव्यवस्था का मूल– इसके तहत बचतों को मुद्रा के रूप में वित्तीय संस्थाओं में जमा करवा दिया जाता है. यह बचत बचतकर्ताओं को उस समय मदद पहुचाती है, जब वह संकट में होता है,
  • निवेश योजनाओं का संचालन- मुद्रा के द्वारा निवेश योजनाओं का संचालन किया जाता हैं. वित्तीय संस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुसार निवेश योजनाओं में हिस्सा बनती हैं.
  • राज्य के कल्याणकारी स्वरूप को बल प्रदान करना- राज्य या सरकार द्वारा नागरिकों के कल्याण हेतु अनेक प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही है. इन योजनाओं पर सरकार को बहुत अधिक व्यय करना पड़ता है. इसकी पूर्ति मुद्रा के माध्यम से ही संभव हो पाती हैं.
  • मुद्रा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक– वर्तमान में मानव का विकास जिस स्तर पर पंहुचा है. वह मुद्रा के आविष्कार से ही संभव हुआ है, मनुष्य के जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ मुद्रा की कोई भूमिका न हो.

उपर्युक्त विवरण से अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका पूर्णतया स्पष्ट हो जाती हैं.

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आशा करते हैं दोस्तों आप समझ गये होंगे कि What Is The Economy In Hindi अथवा अर्थव्यवस्था क्या हैं अर्थ परिभाषा, निबंध, स्वरूप, विशेषताएं, प्रकार, भारत की अर्थव्यवस्था का स्वरूप आदि. यदि आपकों हमारा ये लेख पसंद आया हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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