भीलवाड़ा का इतिहास | Bhilwara History In Hindi

Bhilwara History In Hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम भीलवाड़ा का इतिहास पढ़ेगे. राजस्थान का महत्वपूर्ण जिला जिसे वस्त्र नगरी या राजस्थान के मैंचेस्टर उपनाम से भी जाना जाता हैं. भीलवाड़ा जिले का इतिहास 300 से 400 साल पुराना हैं. पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध शहर भीलवाड़ा के दर्शनीय स्थलों, इतिहास, भूगोल, जनसंख्या, साक्षरता, क्षेत्रफल के बारें में यहाँ जानकारी दी गई हैं.

Bhilwara History In Hindi

Bhilwara History In Hindi

इतिहास बिंदु Bhilwara History In Hindi
स्थापना वर्ष अज्ञात
संस्थापक भील राजा श्री भलराज
उपनाम वस्त्र नगरी, राजस्थान का मैंचेस्टर
तहसील 16
जनसंख्या 2408523
प्रमुख नदी बनास, बेदाच, कोठारी, खारी, मानसी

भीलवाड़ा जिला राजस्थान, इतिहास, हिस्ट्री इनफार्मेशन

10508.85  वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला यह राज्य के बड़े जिलों में गिना जाता हैं. उद्योग तथा पर्यटन के लिए भीलवाड़ा की अपनी विशिष्ट पहचान हैं. 421 मीटर ऊँचाई पर स्थित भीलवाड़ा शहर 25.35 ° उत्तरी एवं 74.63 ° पूर्वी अक्षांश के मध्य स्थित हैं. इसके उत्तर में अजमेर, दक्षिण में चित्तौड़गढ़, उदयपुर पूर्व में बूंदी तथा पश्चिम में राजसमंद जिले सीमा बनाते हैं. भीलवाड़ा में बहने वाली नदियाँ बनास, बेडच, खारी, मानसी, मेनाली, चन्द्रभागा एवं नागदी हैं.

भीलवाड़ा जिले के इतिहास के सम्बन्ध में कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिसके आधार पर कहा जा सके, इसकी स्थापना कब व किसके द्वारा की गई. स्वतंत्रता से पूर्व यह मेवाड़ राज्य का हिस्सा था. उदयपुर के शासन के अधीन आता था, कई ऐतिहासिक स्थलों के कारण यह पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हुआ हैं. विशेषकर यहाँ हिन्दू धर्म से जुड़े कई धार्मिक स्थल हैं.

बताते है कि भीलवाड़ा का इतिहास 11 वीं सदी का हैं. इसके नामकरण के सम्बन्ध में दो किवदन्तियाँ विशेष प्रचलित हैं, एक के अनुसार कहा जाता हैं कि यहाँ भील जनजाति के लोग निवास करते थे. सदियों से यह भील जाति का क्षेत्र रहा हैं. जिन्होंने मेवाड़ के महाराणाओं खासकर राणा प्रताप की मदद की थी. बलिदानी एवं वीर भूमि भीलवाड़ा का नामकरण स्थानीय शासक भीलराज के नाम पर पड़ा हैं. मगर वर्तमान परिपेक्ष्य में यह दावा कमजोर इसलिए प्रतीत होता है कि यहाँ अनुसूचित जाति के मात्र 17 व जनजाति के 10 प्रतिशत लोग ही रहते हैं. ऐसे में इसे भील जनजाति बहुल क्षेत्र कहना तथ्यगत नहीं हैं.

भीलवाड़ा शहर के इतिहास के सम्बन्ध में दूसरा दावा समीचीन प्रतीत होता हैं. कहते है जब यह क्षेत्र मेवाड़ राज्य के अधीन था तो यहाँ एक सिक्के बनाने वाली टकसाल हुआ करती थी. उन सिक्कों को भिलाड़ी कहा जाता हैं. जो बाद में भीलवाड़ा हो गया. ऐसा भी कहा जाता हैं कि महाभारत काल में अर्जुन ने यहाँ कई युद्ध लड़े थे. यहाँ शिवजी का एक प्राचीन मंदिर भी है जिसे बाड़ा मंदिर या जतुन मंदिर के नाम से जाना जाता हैं.

इस क्षेत्र पर राज्य चौहान व गुहिल वंश के शासकों ने किया. जब मेवाड़ संयुक्त राजस्थान में सम्मिलित हुआ तो 1949 में नये जिले के रूप में भीलवाड़ा अस्तित्व में आया. वर्तमान में जिले में 16 तहसील व उपतहसील हैं. 11 पंचायत समिति, 12 नगर परिषद, 1 नगर पालिका, 7 शहर व कस्बे, 383 ग्राम पंचायत, 1903 राजस्व गाँव हैं. भीलवाड़ा जिले की कुल जनसंख्या 24 लाख, 8 हजार 5 सौ 23 हैं. जिनमें ग्रामीण 1895869 व 512,654 शहरी हैं. जिले की दशकीय वृद्धि दर 19.60 प्रतिशत, साक्षरता 61.37 प्रतिशत हैं.

भीलवाड़ा जिले में कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं. शहर से 8 किमी दूरी पर हरणी महादेव मंदिर हैं. पहाड़ियों से घिरे इस स्थान पर शिवरात्री को विशाल मेला भरता हैं. जिले में बदनोर का किला ऐतिहासिक स्थल है जो शहर से 70 किमी दूर आसींद रोड़ पर स्थित हैं. इसके अतिरिक्त जिले में स्थित अन्य दर्शनीय स्थलों में चावण्डिया तालाब, थला की माता, दरगाह हजरत गुल अली बाबा, गाँधी सागर तालाब, कोटडी, बनेड़ा, मेनाल, जहाजपुर, बिजोलिया, शाहपुरा, माण्डल, माण्डलगढ मुख्य हैं.

भीलवाड़ा के लिए नजदीकी हवाई अड्डा डबोक उदयपुर में हैं. भोपाल जयपुर एक्सप्रेस, अजमेर हैदराबाद स्पेशल, चेतक एक्स प्रेस उदीपुर-जयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस रेलवे मार्ग से भीलवाड़ा को राजस्थान के अन्य जिलों एवं देश के विभिन्न शहरों से जोड़ा गया हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 79 भीलवाड़ा को अजमेर, जयपुर, उदयपुर आदि शहरों से जोड़ता हैं.

भीलवाड़ा के त्योहार (history of bhilwara district rajasthan in hindi)

शीतला शप्तमी

शीतला सप्तमी भीलवाड़ा जिले का सबसे लोकप्रिय त्योहार है और देवी शीतला को समर्पित है। यह त्योहार स्थानीय लोगों द्वारा मनाया जाता है और देवी शीतला की पूजा जिले में स्थित शीतला माता मंदिर में की जाती है। त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र और श्रावण के महीनों में अंधेरे पखवाड़े के 7 वें दिन मनाया जाता है ।

शीतला माता को बच्चों की देवी माना जाता है। यह त्योहार माताओं द्वारा मनाया जाता है, जो अपने बच्चों की भलाई के लिए देवी से प्रार्थना करते हैं।

रंग तेरस (नाहर नृत्य)

भीलवाड़ा जिले का एक और प्रसिद्ध त्योहार रंग तेरस है। यह त्यौहार चैत्र महीने में अंधेरे पखवाड़े के 13 वें दिन मनाया जाता है। इस त्योहार को ‘रंग त्रयोदशी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह “होली” के त्योहार की तरह मनाया जाता है और लोगों में भाईचारे की भावना को समर्पित है।

रंग तेरस देश के अन्य राज्यों जैसे गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी मनाया जाता है। इस त्यौहार पर, किसान धरती माता का धन्यवाद करते हैं। महिलाएं उपवास रखती हैं और संबंधित अनुष्ठानों का पालन करती हैं।

लट्ठ मार होली

लोग रंगों के साथ इस त्योहार का आनंद लेते हैं।

नवरात्र

नवरात्रि भारत के सभी राज्यों में लोकप्रिय है। यह भीलवाड़ा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘नौ रातें’। नौ रातों की इस अवधि के दौरान, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि मार्च-अप्रैल के महीने में आती है, जबकि शरद नवरात्रि सितंबर-अक्टूबर के महीनों में। शरद नवरात्रि के दसवें दिन को दशहरा के रूप में मनाया जाता है।

गणगौर

गणगौर राजस्थान के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह राज्य के सभी जिलों में समान उत्साह के साथ मनाया जाता है। गणगौर का शाब्दिक अर्थ है भगवान शिव और देवी पार्वती का मिलन।

विवाहित महिलाएं देवी पार्वती से अपने पति और परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं जबकि अविवाहित महिलाएं भविष्य में एक अच्छा पति पाने के लिए प्रार्थना करती हैं।

प्रति वर्ष चैत्र मास (मार्च) में गणगौर का त्यौहार मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह महीना हिंदुओं के लिए नए साल की शुरुआत करता है। यह महीना सर्दियों के मौसम के अंत और ग्रीष्मकाल की शुरुआत का भी प्रतीक है। गणगौर अठारह दिन का त्योहार है और स्थानीय लोगों द्वारा पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

गणगौर का एक जुलूस (जुलूस) सिटी पैलेस के ज़नानी-देवड़ी से शुरू होता है और शहर के विभिन्न हिस्सों में जाकर तालकटोरा के पास एक स्थान पर समाप्त होता है। जूलूस में बैलगाड़ी, रथ, पुराने पालकी आदि शामिल होते हैं।

फूलडोल महोत्सव

भीलवाड़ा में एक और त्योहार जो पवित्र महत्व रखता है वह है फूलडोल महोत्सव। भीलवाड़ा में हर साल एक मेला आयोजित किया जाता है जो पांच दिनों तक चलता है। यह त्योहार प्रसिद्ध रामद्वारा मंदिर में होली के बाद मनाया जाता है। यह मंदिर जिले के शाहपुरा क्षेत्र में स्थित है और राज्य भर से लोग इस स्थान पर आते हैं।

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