पशुपालन कैसे करें लाभ कमाई तथा देखभाल | Pashupalan Hindi

Kaise kare Information, History Guide Of Pashupalan Hindi:-पशुपालन इस नाम से सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं. (animal husbandry meaning in Hindi) पशुओं का पालन करने के व्यवसाय को ही पशुपालन कहा जाता हैं. भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि के बाद पशुपालन का सकल घरेलू उत्पाद में सबसे अधिक योगदान रहता हैं. एक कृषक अच्छी तरह जानता हैं कि पशुपालन कैसे करें (How to animal husbandry) लाभ कमाई तथा समुचित देखभाल की जानकारी के बिना इसके अधिक फायदे नही मिल पाते हैं. डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) पूरी तरह animal husbandry पर निर्भर हैं. यदि आप पशुपालन व्यवसाय (Animal husbandry business) की तरफ देख रहे हैं, तो इससे जुडी बेसिक जानकारी आपकों यहाँ मिल जाएगी.

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पशुपालन का महत्व (Importance of animal husbandry):- पशुपालन कृषि का पूरक व्यवसाय हैं. प्राचीनकाल से ही मनुष्य पशुओं का पालन करके उनका उपयोग करता रहा हैं. आधुनिक युग में मशीनीकरण के कारण मानव की पशुओं पर निर्भरता कम होती जा रही हैं.

फिर भी पशुपालन आज भी जनसंख्या के बड़े भाग को रोजगार उपलब्ध करवा रहा हैं. अन्य देशों की तुलना में भारत में सर्वाधिक पालतू पशु हैं. तथा वर्तमान में भारत विश्व में दुग्ध उत्पादन (Milk production) करने वाला पहला देश हैं. पशुपालन के अंतर्गत गाय, भैंस, ऊँट, बकरी, भेड़, घोड़ा आदि का पालन कर उनसे दूध, मांस, ऊन, चमड़ा, गोबर प्राप्त किया जाता हैं तथा इसका उपयोग कृषि कार्यों में भी किया जाता हैं.

पशुपालन से दुग्ध उत्पादन (Milk production from animal husbandry)

दुग्ध उत्पादन खाद्य उत्पाद व्यवसाय का मुख्य भाग हैं. पशुओं की स्तनग्रंथियों से शिशुओं हेतु स्रावित दूध का उपयोग मानव प्राचीन काल से करता आ रहा हैं. दूध देने वाले पशुओं से शिशु के जन्म के तुरंत बाद स्तन से निकलने वाले दूध को खीस (colosturm) कहते हैं.

औसत दूध में 87.3% जल, 4.५% वसा, 4.6% कार्बोहाइड्रेट, 3.5% प्रोटीन, 0.75% खनिज लवण, 0.85% वसा रहित ठोस पदार्थ पाए जाते हैं. भेड़ के दूध में सर्वाधिक प्रोटीन 6.25% तथा गाय के दूध में 3.21% पाई जाती हैं. दुग्ध से दही , क्रीम, मक्खन, मावा, घी, दूध, पाउडर आदि उत्पाद बनाएं जाते हैं.

दुग्ध की उच्च पौष्टिकता के कारण इसमें जीवाणु तेजी से बढ़ते हैं तथा जल्दी खराब हो जाता हैं. दूध को पाश्चरीकरण तथा शीतलीकरण द्वारा कई दिनों तक भंडारित किया जा सकता हैं.

पशुओं की नस्ल की जानकारी (Animal breed information In Hindi)

दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से गाय, भैंस, बकरी आदि का पालन किया जाता हैं. दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से गाय की साहिवाल, सिंध, गिर, देवली, हरियाणवी आदि देशी तथा रेडडेन, होल्स्टीन, जर्सी आदि विदेशी नस्लें हैं. भैंस की मुर्रा, जाफराबादी, सुरती आदि अधिक दूध देने वाली नस्लें हैं. बकरी की जमानापारी, बारबरी, सिरोही आदि नस्लें हैं.

पशु आहार (types of animal food list products names in india)

दुधारू पशुओं व गर्भवती पशुओं को सामान्य आहार के साथ साथ अतिरिक्त पशुआहार दिया जाना चाहिए. पशु को दो तिहाई भाग सूखा चारा व एक तिहाई भाग हरे चारे के रूप में देना चाहिए. प्रत्येक पशु दाने के मिश्रण में ४०% अनाज, ४०% खली व २०% चाकर देना चाहिए, इसके अतिरिक्त प्रत्येक पशु को प्रतिदिन 50ग्राम नमक तथा 30 ग्राम खनिज चूर्ण देना चाहिए.

पशु स्वास्थ्य रोग व टीके (Animal Health Diseases and Vaccines)

पशु का स्वस्थ रहना आवश्यक हैं. पशु के रोग होने पर दुग्ध उत्पादन कम हो जाता हैं. रोगों से बचाव के लिए पशुओं का समय समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए. तथा पशु आवास व पशुओं की सफाई रखनी चाहिए. पशुओं में वायरस, जीवाणु, कवक व कर्मी जनित रोग हो जाते हैं. पशुओं के प्रमुख रोग तथा टीकाकरण का समय निम्न प्रकार हैं.

  • खुरपका या मुहपका रोग- इस रोग के होने पर पोलिवैक्सिन का टीका हर साल लगाया जाता हैं.
  • गलघोंटू– एच. एस आयल एड्ज्युवेंट वेक्सीन हर साल लगाया जाता हैं.
  • गिल्टी रोग– एंथ्रेक्स स्पोर वेक्सीन हर साल दिया जाना चाहिए.
  • तपेदिक- यह बीमारी होने पर बीसीजी वेक्सीन प्रति 3 साल के बाद दिया जाता हैं.
  • चेचक- हर तीन साल में आर पी टिश्यू वेक्सीन दिया जाता हैं.

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