Essay on Durga Puja in Hindi- दुर्गा पूजा पर निबंध 2018 – Durga Puja Essay In Hindi

Essay on Durga Puja in Hindi- दुर्गा पूजा पर निबंध 2018 – Durga Puja Essay In Hindi

दुर्गा पूजा निबंध हिंदी में (Essay on Durga Puja): आपकों और आपके समस्त परिवार को Durga Puja 2018 की हार्दिक शुभकामनाएं. 15 से 19 अक्टूबर 2018 को भारत में दुर्गा पूजा का उत्सव धूम धाम के साथ मनाया जाएगा. आज के इस दुर्गापूजा के लिए हिंदी निबंध, दुर्गा पूजा एस्से में हम हिन्दुओं के मुख्य त्योहार दुर्गा पूजा के इतिहास, मनाने का कारण इससे जुड़ी कथाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं. यदि आप विद्यार्थियों के लिए Durga Puja Essay की सर्च कर रहे हैं तो कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के स्टूडेंट्स के लिए सरल भाषा में दुर्गा पूजा निबंध 100, 200,300,400, 500 शब्दों में यहाँ दिया जा रहा हैं.Essay on Durga Puja in Hindi- दुर्गा पूजा पर निबंध 2018 - Durga Puja Essay In Hindi

दुर्गा पूजा 2018 निबंध- Durga Puja Essay

दुर्गा पूजा का महत्व (Importance of Durga Puja)

भारत को त्योहारों का देश कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी. यहाँ अनेक जातियों व धर्मों के लोग निवास करते हैं. और सबके अपने अपने त्योहार हैं. किन्तु दुर्गापूजा हिन्दुओं का ऐसा त्योहार हैं जिसकी धूम पुरे दस दिन तक रहती हैं.

और इन दस दिनों के दौरान भारत भक्ति रस में डूबा नजर आता हैं. हर पर्व या त्यौहार का प्रत्येक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान हैं. क्योंकि इनसे न केवल आनन्द की प्राप्ति होती हैं. बल्कि जीवन में उत्साह व नवऊर्जा का संचार भी होता हैं. दुर्गापूजा भी एक ऐसा ही त्योहार हैं जो हमारे जीवन में उत्साह और ऊर्जा का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं.

दुर्गा पूजा का त्योहार कब है (When is the festival of Durga Puja)

दुर्गा पूजा त्योहार वैसे तो साल में दो बार आता हैं. एक बार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में जिसे वासन्तिक नवरात्र कहा जाता हैं एवं दूसरी बार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में जिसे शारदीय नवरात्र कहा जाता हैं.

किन्तु इन दोनों में शारदीय नवरात्र का बड़ा महत्व हैं. और इसे अधिक धूमधाम के साथ मनाया जाता हैं. यह हिन्दू समाज का एक महत्वपूर्ण त्योहार हैं. जिसका धार्मिक आध्यात्मिक नैतिक व सांसारिक महत्व हैं. भक्तजन इस अवसर पर दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं. अतः इसे नवरात्र के नाम से जाना जाता हैं.

दुर्गा पूजा की कथा कहानी (Story of Durga Puja)

दुर्गा पूजा का सम्बन्ध एक पौराणिक कथा से हैं, जिसके अनुसार देवताओं के राजा इंद्र व दैत्यों के राजा महिषासुर के बिच भयंकर युद्ध छिड़ गया था. इस युद्ध में देवराज इंद्र की पराजय हुई और महिषासुर इन्द्रलोक का स्वामी बन बैठा.

तब देवतागण ब्रह्माजी के नेतृत्व में विष्णु जी व शिवजी की शरण में गये. देवताओं की बाते सुनकर विष्णु तथा शंकर क्रोधित हो उठे. फलस्वरूप उनके शरीर से एक पुंज निकलने लगा, जिससे समस्त दिशाएं जलने लगी.

यही पुंज अंत में देवी दुर्गा के रूप में परिवर्तित हो गया. सभी देवताओं ने देवी की आराधना की और उनसे महिषासुर का नाश करने का निवेदन किया. सभी देवताओं से आयुध व शक्ति प्राप्त कर देवी दुर्गा ने महिषासुर को युद्ध में पराजित कर उसका बढ़ कर दिया. इसी कारण उन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता हैं.

दुर्गा पूजा पाठ पूजा विधि के बारे में  (how to do durga puja)

शारदीय नवरात्र यानी दुर्गापूजा का आरम्भ आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही हो जाता हैं. इस दिन कलश की स्थापना की जाति हैं. इसके बाद देवी दुर्गा की प्रतिमा पूजा स्थल के मध्य स्थापित की जाती हैं.

दुर्गा की मूर्ति के दाई और महालक्ष्मी, गणेश और विजया नामक योगिनी की और बायीं और कार्तिकेय, देवी महासरस्वती तथा जया नामक योगिनियों की प्रतिमा रहती हैं.

चूँकि भगवान शंकर की पूजा के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती हैं. अतः उनकी पूजा भी की जाती हैं. इस तरह नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती हैं.

किन्तु नवमी तक चलने वाले इस महापूजन की वास्तविक धूमधाम की शुरुआत षष्ठी के दिन प्राण प्रतिष्ठा के साथ शुरू होती हैं. बंगाल में षष्ठी के दिन प्राण प्रतिष्ठा के दिन इस विधान को बोधन अर्थात् आरम्भ कहा जाता हैं. इसी दिन माता के मुख से आवरण हटाया जाता हैं.

दुर्गा पूजा पर निबंध लेखन हिंदी इंग्लिश संस्कृत में (Essay on Durga Puja)

नौ दिनों तक दुर्गा पूजा के बाद दशमी तिथि के दिन शाम को प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता हैं. इस दिन को विजयादशमी या दशहरा के रूप मनाया जाता हैं. दशमी को विजयादशमी के रूप में मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा है.

भगवान् राम ने रावण पर विजय पाने के लिए देवी दुर्गा की पूजा की थी. इसलिए इस दिन को लोग शक्ति पूजा के रूप में भी मनाते हैं. एवं अस्त्र शस्त्र की पूजा करते हैं. अन्तः राम इसी दिन देवी दुर्गा के आशीर्वाद से रावण पर विजय पाने में सफल रहे थे.

तब से इस दिन को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप रावण, कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता हैं.

कहीं कहीं इस दिन शमी वृक्ष की पूजा की जाती हैं. बंगाल की दुर्गापूजा पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं. दुर्गापूजा के दौरान बंगाल खुबसूरत पंडालों एवं दुर्गा की प्रतिमाओं से सज जाता हैं.

दुर्गा पूजा मनाने का कारण (why durga puja is celebrated)

भारत में हर त्योहार को मनाने के पीछे एक सामाजिक कारण होता हैं. दुर्गा पूजा को मनाने के पीछे एक सामाजिक कारण हैं. भारत एक कृषि प्रधान देश हैं. आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष तक किसान खरीफ की फसल काटकर उसका उचित मूल्य प्राप्त कर चुके होते हैं.

इसके बाद अगली फसल के बोने तक उनके पास पर्याप्त समय होता हैं. इस समय को त्योहार के रूप से मनाने से उनके जीवन में उत्साह एवं नवऊर्जा का संचार होता हैं. और इसकी समाप्ति तक वे पुनः परिश्रम करने के लिए उर्जावान हो जाते हैं.

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