परमाणु शक्ति और मानव पर निबंध | Essay On India And Nuclear Power In Hindi

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Essay On India And Nuclear Power In Hindi

Essay On India And Nuclear Power In Hindi

प्रस्तावना– प्राकृतिक पदार्थों का विश्लेषण करते करते मनुष्य उसकी अंतिम इकाई परमाणु तक जा पंहुचा. किन्तु उसे इतने से ही संतोष नहीं हुआ, उसने परमाणु को विखंडित कर उसके अंदर झाँकने का भी प्रयास किया. परमाणु का विखंडन करते हुए उसे उसमें छिपी अपार ऊर्जा का पता चला. इस ऊर्जा का प्रयोग उसने किया महाविनाश के उपकरण परमाणु बम को बनाने में, आज अनेक देशों के पास परमाणु बम और उससे भी अधिक विनाशकारी हाइड्रोजन बम हैं.

परमाणु शक्ति का विकास– महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन ने सिद्ध किया कि पदार्थ को ऊर्जा में तथा ऊर्जा को पदार्थ में परिवर्तित किया जा सकता हैं. उनके अनुसार एक औंस ईधन से 15 लाख टन कोयले के बराबर शक्ति प्राप्त की जा सकती हैं. इससे पूर्व ही वैज्ञानिक रदरफोर्ड ने 1919 ई में प्रथम परमाणु विस्फोट करने में सफलता प्राप्त की थी.

इसके बाद अमेरिका के वैज्ञानिकों ने 1945 ई की 13 जुलाई को एलामोगेडो के रेगिस्तान में परमाणु बम का परीक्षण किया और सफलता प्राप्त की, इसके बाद सोवियत रूस ने 1949 ई में इंग्लैंड ने 1952 ई में तथा फ्रांस ने 1960 ई परमाणु विस्फोट किये. 1964 ई में चीन, 1974 ई में भारत और 1998 ई में पाकिस्तान आदि देशों ने अपने आपकों परमाणु सम्पन्न देशों की पंक्ति में शामिल किया. आज तो रूस और अमेरिका हाइड्रोजन बम बनाने वाले देश बन गये हैं. हाइड्रोजन बम की क्षमता हिरोशिमा पर गिराए गये बम से एक सौ गुना अधिक हैं.

परमाणु शक्ति का विनाशक स्वरूप– 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 ई को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी नामक नगरों पर परमाणु बम गिराए. वहां व्यापक विनाश हुआ. सारा संसार अमेरिका के  अमानवीय कृत्य से स्तम्भित हो गया. दूसरी ओर विश्व के अनेक देशों ने अमेरिका के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए एक एक कर परमाणु बम बनाना प्रारम्भ किया.

आज पाकिस्तान जैसे छोटे देश भी परमाणु सम्पन्न राष्ट्र बन गये हैं. यदि ये संहारक अस्त्र आतंकवादियों के हाथ पड़ गये तो सारा विश्व की न जाने कितनी आबादी नष्ट हो जाएगी. इस खतरे ने विश्व के समझदार लोगों की नीद उड़ा दी हैं.

परमाणु शक्ति का कल्याणकारी रूप– परमाणु शक्ति विनाशक ही नहीं, कल्याणकारी भी हैं. आज इसके सहयोग से घातक रोगों की चिकित्सा की जा रही हैं. ऊर्जा के क्षेत्र में परमाणु शक्ति का चमत्कारी उपयोग देखा जा सकता हैं. फसलों की वृद्धि, रेडियो कोबाल्ट और कीटाणुओं से उनकी रक्षा अब आइसोटोप्स द्वारा सुगम हो गयी हैं. इसके अलावा नदियों का प्रवाह बदलने पर्वतों को काटने आदि श्रमसाध्य कार्यों को सम्पन्न करने में परमाणु शक्ति का सकारात्मक प्रयोग किया जा रहा हैं. परमाणु शक्ति चालित बिजलीघर तथा पनडुब्बी इसके कल्याणकारी रूप का प्रभाव हैं.

परमाणु शक्ति कितनी सुरक्षित– यदपि परमाणु शक्ति ऊर्जा का स्वच्छ और असीम स्रोत माना जाता हैं किन्तु विश्व में अनेक बार ऐसी घटनाएं हुई हैं. जो परमाणु शक्ति के सुरक्षित प्रयोग के बारे में शंकाए उत्पन्न करती हैं. रूस में चेरनोविल संयंत्र से घातक रेडियोएक्टिव पदार्थ का रिसाव तथा अभी कुछ समय पूर्व जापान में सुनामी और भूकम्प से वहां के परमाणु संयंत्रों को हानि पहुची हैं. और फैले विकिरण के उदहारण सामने हैं. अतः परमाणु शक्ति के सुरक्षित प्रयोग को लेकर लोग आशंकित हो गये हैं.

भारत में परमाणु शक्ति– भारत में 1956 में ट्राम्बे में भाभा परमाणु अनुसन्धान केंद्र की स्थापना की गई. इस केंद्र द्वारा कल्याण हेतु परमाणु शक्ति का उपयोग सम्भव हो गया हैं. 1961 ई में इसका और विस्तार किया गया. 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरन क्षेत्र में भूमिगत प्रयोग किया गया. इस प्रकार भारत विश्व का छठवां परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बन गया. परमाणु विस्फोटों से खनिजों का पता लगाना, नहर खोदना तथा भूमिगत जलाशय बनाना आदि कार्य सम्भव हो गये हैं. आशा है परमाणु शक्ति के कल्याणमय प्रयोग के नयें द्वार खुलेगे.

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