राष्ट्रीय सुरक्षा पर निबंध Essay on National Security in Hindi

राष्ट्रीय सुरक्षा पर निबंध Essay on National Security in Hindi: राष्ट्रीय सुरक्षा का जटिल प्रश्न है आज भारत की आंतरिक और बाहरी स्थतियों में अधिक फर्क नहीं रह गया हैं. देश को मिटा देने के सपने पालने वाले लोग सरहद के पार भी है और सरहद के अंदर भी. जम्मू कश्मीर राज्य में दशकों में चला आ रहा आतंकवाद भी इसी तरह की एक समस्या हैं. आज हम राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों व खतरे के विषय में इस निबंध में जानेगे.

राष्ट्रीय सुरक्षा पर निबंध Essay on National Security in Hindi

राष्ट्रीय सुरक्षा पर निबंध Essay on National Security in Hindi

एक अवधारणा के अनुसार किसी राष्ट्र के निर्माण में ये चार अनिवार्यतः शामिल होते हैं. भूमि, जनसंख्या, संप्रभुता और सरकार. राष्ट्र की अखंडता को बनाए रखने अर्थात देश की सीमाओं की रक्षा के लिए राष्ट्र का एक अनिवार्य अंग हैं. भारत की सेना देश का गौरव और हमारा विश्वास है. भारतीय सैनिकों ने अपने शौर्य और बलिदान से विश्व में ख्याति अर्जित की.

राष्ट्र के समक्ष सुरक्षा चुनौतियाँ (Security challenges of nation)

भारत के समक्ष सुरक्षा चुनौतियां निरंतर उपस्थित रही हैं. यह चुनौतियां विभिन्न स्तरों पर विद्यमान हैं. शत्रु का खतरा न केवल देश की सीमाओं पर विद्यमान रहता है, अपितु देश के सुरक्षा चक्र को भेदकर आतंकवादी गतिविधियों के द्वारा वह देश के आंतरिक भागों में भी चुनौतियां प्रस्तुत करने का प्रयास करता रहता हैं.

तीसरी तरफ वह देश की एकता के ताने बाने पर भी प्रहार करने का प्रयास करता रहता हैं. इन विभिन्न तरह की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए देश में विभिन्न स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था स्थापित हैं.

भारत पश्चिम में पाकिस्तान से उत्तर में चीन से घिरा हुआ हैं. ये देश भारत पर आक्रमण कर चुके हैं. इन देशों के साथ भारत का सीमा विवाद भी हैं. पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों का सहारा लेकर भारत से परोक्ष रूप से युद्ध छेड़े हुए हैं. भारत की उत्तरी सीमा पर आए दिन गोलीबारी होती रहती हैं. उत्तरी पूर्वी पर चीन आए दिन सीमा का उल्लंघन करता रहता हैं. सीमाओं पर घुसपैठ का खतरा भी लगातार बना रहता हैं. देश में कुछ क्षेत्र अलगाववादी और नक्सलवादी हिंसा से ग्रस्त हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा को हम दो प्रकार से देखते है

  • बाह्य सुरक्षा और
  • आंतरिक सुरक्षा

बाह्य सुरक्षा – External security

बाह्य सुरक्षा से आशय देश की सीमाओं की सुरक्षा से हैं. प्रथम सुरक्षा पंक्ति के रूप में देश की सेनाएं शत्रु का मुकाबला कर उसे परास्त करती हैं. जब युद्ध नहीं होता है और शांतिकाल होता है तब सेनाएं सीमा से कुछ दूर रहती है. उस समय दूसरी सुरक्षा पंक्ति के रूप में सीमा सुरक्षा बल, तट रक्षक बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस व अन्य सुरक्षा बल देश की सीमाओं पर गश्त करते हुए निगरानी रखते हैं.

वे आतंकवादियों, घुसपैठियों और तस्करों को सीमा पार आने से रोकते है. युद्ध की आशंका होने पर सेनाएं सीमा पर आ डटती है और शत्रु का मुकाबला करने के लिए मौर्चा सम्भाल लेती हैं.

भारतीय सेना – Indian Army

भारतीय सेना के तीन अंग है थल सेना आर्मी जमीन पर युद्ध करती है, जल सेना नेवी समुद्री सीमाओं पर युद्ध करती है वायु सेना एयर फ़ोर्स आकाश मार्ग से शत्रु का मुकाबला कर थल सेना और जल सेना की मदद करती हैं. तीनों सेनाओं के अपने अपने अध्यक्ष होते हैं. भारतीय सेना केंद्र सरकार के नियंत्रण में कार्य करती हैं. भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति होता हैं.

भारतीय सेना उच्च प्रशिक्षित तथा परमाणु हथियार और शक्तिशाली आधुनिकतम हथियारों से युक्त विश्व की अनुशासित और शक्तिशाली सेना हैं. भारतीय सेना ने वर्ष 1962, 1965, 1971 व 1999 में दुश्मन के आक्रमणों का मुहतोड़ जवाब देकर दुश्मन के दांत खट्टे किये थे.

विश्व के अनेक युद्ध ग्रस्त देशों में युद्धों को रोकने के लिए भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में शान्ति सेना के रूप में कार्य करते हुए विश्व शान्ति की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं. तूफ़ान, बाढ़, भूकम्प, दंगे आदि विपत्तियों के समय सेना नागरिक प्रशासन की मदद भी करती हैं.

विश्व कि दूसरी शक्तिशाली सेनाओं की बराबरी पर बने रहने के लिए भारतीय सेना को आवश्यकता के अनुसार आधुनिकतम हथियार, सैन्य तकनीक और परीक्षण उपलब्ध करवाते रहना आवश्यक हैं. भारत काफी सैन्य सामग्री और तकनीक विदेशों से खरीदता रहा हैं, परन्तु अब भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने पर्याप्त मात्रा में उन्नत तकनीक विकसित करने में सफलता प्राप्त कर ली हैं.

देश के रक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों में भारतीय रक्षा वैज्ञानिक इसी प्रयास में लगे रहते है. भारत सैन्य सामग्री के उत्पादन में आत्म निर्भरता की ओर अग्रसर हैं. अब तो अग्नि व पृथ्वी जैसे शक्तिशाली प्रक्षेपास्त्र, टैंक, तड़ाकू विमान व जहाज तथा अन्य हथियारों का उत्पादन देश में ही हो रहा हैं.

भारत के सुरक्षा कवच – Safety shield of india

  • सुखोई 30 MKi- यह भारत की आवश्यकता के अनुरूप रूस में निर्मित दो शक्तिशाली इंजन वाला लड़ाकू विमान हैं. इस पर ब्रह्मोस एवं निर्भय जैसी क्रूज मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. यह प्रतिकूल मौसम में भी उड़ान भर सकता हैं.
  • ब्रह्मोस मिसाइल– इसका निर्माण रूस एवं भारत के संयुक्त उपक्रम द्वारा किया गया हैं. इसकी मारक क्षमता 290 किमी हैं. यह जमीन समुद्र उपसमूह और आकाश से समुद्र और जमीन पर स्थित लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम हैं. यह मिसाइल पहाड़ी क्षेत्रों के पीछे छिपे लक्ष्य पर भी निशाना लगाने में सक्षम हैं.
  • आई एन एस विक्रमादित्य– यह भारत का विशाल क्षेत्रफल वाला विमान वाहक युद्धपोत हैं. इसका क्षेत्रफल तीन फुटबाल के मैदान के बराबर हैं. यह मिग 29 जैसे कुल 24 विमानों को ले जाने में सक्षम हैं. इस विमान पर पट्टी भी मौजूद हैं.
  • टी 90 एस भीष्म टैंक– इससे 5 किमी के दायरे में प्रहार किया जा सकता हैं. इस टैंक पर किसी भी प्रकार के रासायनिक, जैविक या रेडियो एक्टिव हमले का असर नहीं होता. इसके अंदर बैठकर इसे रिमोट से नियंत्रित किया जा सकता हैं. इसका डिजाइन इस तरह का हैं कि हमला होने पर बम इस टैंक से टकराकर कमजोर पड़ जाता है और उससे निकलने वाले विकीरण टैंक के अंदर बैठे जवानों को हानि नहीं पंहुचा सकते हैं.
  • आई एन एस चक्र 2- यह एक परमाणु संयंत्र युक्त पनडुब्बी है, जो पानी के भीतर 600 मीटर गहराई पर रह सकती हैं. यह लगातार तीन माह तक समुद्र के अंदर रह सकती हैं.

अर्द्ध सैनिक बल और सीमा सुरक्षा – Paramilitary and border security

भारत की थल सीमा की लम्बाई 15200 किलोमीटर तथा जल सीमा की लम्बाई 7516 किलोमीटर हैं. शांतिकाल में विभिन्न अर्द्ध सैनिक बल सीमा की निगरानी रखते हैं. सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ के जवान भारत की पाकिस्तान व बांग्लादेश से लगने वाली थल सीमा पर तैनात रहते हैं.

उत्तर पूर्व के पर्वतीय इलाके में चीन से लगी सीमा पर भारत तिब्बत सीमा पुलिस आईटीबीपी के जवान निगरानी रखते है तो वही समुद्री सीमा की निगरानी तट रक्षक बल कोस्ट गार्ड के जवान रखते हैं. सीमाओं पर गश्त करते हुए निगरानी रखने वाले ये अर्द्ध सैनिक बल आतंकवादियों, तस्करों और घुसपैठियों को देश में घुसने से रोकते हैं. सीमाओं की निगरानी के लिए देश में अन्य सुरक्षा बल भी मौजूद हैं.

भारत की सशस्त्र सेनाओं के सहयोग के लिए इन अर्द्धसैनिक बलों के अलावा प्रादेशिक सेना, नेशनल कैडेट कोर एन सी सी, नागरिक सुरक्षा दल सिविल डिफेन्स आदि संगठन सेना के सहयोग के लिए तैयार किये गये हैं. सैन्य शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी अपने स्कूल और कॉलेज में चलने वाले एन सी सी से जुड़ सकते हैं.

देश के सामान्य नागरिक प्रादेशिक सेना और नागरिक सुरक्षा दल से जुड़कर सहयोग कर सकते हैं. प्रसिद्ध क्रिकेटर कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी प्रादेशिक सेना से जुड़े हुए हैं. वैसे अनेक देशों में नागरिकों को सैनिक शिक्षा और नागरिक सुरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य हैं.

आंतरिक सुरक्षा (Internal security)

देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस एवं अन्य विशिष्ट अर्द्ध सैनिक बल व आरक्षित बल होते हैं. आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्यतः राज्यों की होती हैं. प्रत्येक राज्य का अपना स्वयं का पुलिस संगठन होता हैं. पुलिस अपने राज्य में अपराधिक एवं समाज विरोधी गतिविधियों से निपटती हैं. और अपराधियों को सजा दिलाती हैं. आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कुछ अन्य सुरक्षा बलों के प्रमुख निम्नलिखित हैं.

  • राजकीय रेलवे पुलिस जी आर पी और रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स आर पी एफ रेलवे की सम्पति की रक्षा करते हुए ट्रेन व रेलवे स्टेशनों पर अपराधों की रोकथाम करते हैं.
  • केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल सी आर पी एफ की आवश्यकता के समय उपद्रव ग्रस्त क्षेत्रों में राज्य की पुलिस सहायता करता हैं.
  • केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल सी आई एस एफ देश में महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों की सुरक्षा करती हैं.
  • स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप एस पी जी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों वी वी आई पी की सुरक्षा में लगा रहता हैं.

देश की सुरक्षा हेतु नागरिकों के कर्तव्य (Duties of citizens for the Security of the Nation)

देश की सुरक्षा की जितनी जिम्मेदारी सेना की है, उतनी ही जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की भी हैं. देश की रक्षा करना हमारा कर्तव्य हैं. इस कर्तव्य का पालन करते हुए हमें

  1. युवाओं को सेना एवं अर्द्ध सैनिक बलों में भर्ती होने के लिए प्रेरित करना चाहिए
  2. देश का कोई भी गोपनीय दस्तावेज या सूचना विदेशियों को न दे, जासूसी जैसी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस प्रशासन को देनी चाहिए.
  3. जब हमारे सैनिक मौर्चे पर लड़ रहे हो तो उन्हें समय पर खाद्य सामग्री, दवाइयाँ तथा आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवानी चाहिए और सेना का मनोबल बनाए रखना चाहिए.
  4. युद्ध के अवसर पर जनता का हौसला किसी भी प्रकार से कम न होने दे
  5. सेना और प्रशासन की पूरी मदद करे और उनके निर्देशों का पालन करें
  6. नागरिक सुरक्षा व्यवस्था जैसे ब्लैक आउट, प्राथमिक उपचार, अग्निशमन आदि में प्रशासन का सहयोग करे
  7. आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी तथा अनावश्यक रूप से संग्रह न करे इस प्रकार का काम करने वाले व्यक्तियों के बारे में पुलिस को सूचित करे.

हमें तन मन धन से राष्ट्र की सुरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए.

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