शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध | Essay On The Purpose Of Education

Essay On The Purpose Of Education:किसी भी व्यक्ति की उन्नति और विकास के लिए शिक्षा का बड़ा महत्व हैं. “importance of education essay ” शिक्षा के बिना प्रगति संभव नही हैं, यदि आप जिन्दगी में बहुत आगे बढना चाहते हैं. अथवा सफल होना चाहते हैं. शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण हैं. इसके बिना किसी व्यक्ति के आगे बढ़ने की कल्पना करना व्यर्थ हैं.भारत में शिक्षा के उद्देश्य और महत्व पर short essay on education में इसके कुछ पहलुओ पर चर्चा करेगे. आखिर सही क्या सही अर्थ क्या हैं. व समग्र शिक्षा के उद्देश्य क्या होने चाहिए जिनकी प्राप्ति में आगे कदम बढ़ाएं जाने चाहिए.

शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध/ Shiksha Ka Uddeshya Par Nibandh

Essay On The Purpose Of Education

‘सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात विद्या अथवा शिक्षा वही हैं जो हमे मुक्ति दिलाती हैं.

यह मुक्ति अन्धकार से, अज्ञान से तथा अकर्मण्यता से हैं. बालक जन्म से लेकर जीवन पर्यन्त कुछ न कुछ सीखता रहता हैं किन्तु औपचारिक शिक्षा प्राप्ति के उद्देश्य उसके सामने स्पष्ट होने जरुरी हैं. आज हमारी शिक्षा निति केवल जीवन निर्वाह की शिक्षा व्यवस्था ही दे रही हैं. जबकि होना यह चाहिए.

कि शिक्षा जीवन निर्वाह की अपेक्षा जीवन निर्माण का उद्देश्य पूरा करे.

शिक्षा किसी भी राष्ट्र की मेरुदंड कही जा सकती हैं.

शिक्षा का महत्व (importance of education)

जो संस्कारवान, स्वस्थ, श्रमनिष्ट, संस्कृतंनिष्ट, साहसी एवं कुशल नागरिकों का निर्माण कर सके, इसलिए शिक्षा एक तरफ व्यक्ति निर्माण का कार्य करती हैं तो दूसरी ओर राष्ट्र निर्माण का भी अप्रत्यक्ष रूप से कार्य करती हैं. यदि किसी राष्ट्र का समुचित विकास तथा उसके नागरिकों का सही व्यक्तित्व का निर्माण करना हैं तो उसकी शिक्षा के उद्देश्य का होना आवश्यक हैं. शिक्षा वस्तुतः कोई पाठ्यक्रम या डिग्री प्राप्त करना भर नही हैं. बल्कि जीवन में चलने वाली सतत प्रक्रिया हैं. जो कुछ न कुछ सिखाती रहती हैं. शिक्षा से ही व्यक्ति और राष्ट्र के चरित्र का निर्माण होता हैं. यदि किसी देश की शिक्षा व्यवस्था उद्देश्यपूर्ण और अच्छी होगी तो उसके नागरिको का चरित्र भी अच्छा होगा.

भारत में शिक्षा के उद्देश्य (The purpose of education in India)

गांधीजी भी शिक्षा को चरित्र निर्माण के लिए अनिवार्य मानते थे. वे कहते थे शिक्षा के सही उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए. आज के शिक्षा स्वरूप व शिक्षा प्रणाली में आई गिरावट के कारण ही अपने संचित ज्ञान तथा देश की महान परम्पराओं के प्रति उपेक्षा के भाव, माता-पिता व गुरुजनों के प्रति आदर भाव में कमी, विलासिता व सुविधाओं की ओर बढ़ता आकर्षण, प्रदर्शनप्रियता व उपभोक्तावाद आदि का प्रभाव जीवन में बढ़ रहता हैं. सत्य, अहिंसा, करुणा, अपरिग्रह, सहिष्णुता, ईमानदारी तथा उदारता जैसे महान मानवीय मूल्य जीवन से लुप्त हो रहे हैं. मूलत: शिक्षा वह नही हैं जो हमने सीखी हैं बल्कि शिक्षा तो वह हैं जो हमे योग्य बनाती हैं ‘ नास्ति विद्या सम चक्षु’ अर्थात विद्या के समान कोई दूसरा नेत्र नही हैं. शिक्षा ही वह नेत्र हैं जो जीवन सघर्ष को जीतना सिखाता हैं.

विद्यार्थी जीवन में शिक्षा के उद्देश्य (Objectives of education in student life)

आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में शिक्षा का बड़ा महत्व हैं, आज के समय में शिक्षा अच्छी नौकरी और पद हासिल करने का एक माध्यम बन चूका हैं. मगर शिक्षा का सही उद्देश्य व्यक्ति के आगे बढ़ने के लिए रास्तों का निर्माण करना हैं. हमारी शिक्षा का स्तर ही हमे बौद्धिक और मानसिक स्तर से मजबूत बनाने का कार्य करता हैं. आज के समय में प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन में कुछ सबसे अच्छा करने का सपना पालता हैं, जिनके माता पिता भी अपने बेटे को डोक्टर या इंजिनियर बनाना चाहते हैं, उनका एक ही जरिया होता हैं. उद्देश्य पूर्ण व गुणवता युक्त शिक्षा.

ऐसा नही हैं डोक्टर या इंजिनियर या अध्यापक बनने वाले ही विद्यार्थी शिक्षा अर्जित करते हैं, बल्कि अन्य क्षेत्र जैसे खेल, संगीत, फिल्म किसी भी क्षेत्र में जाने वाला विद्यार्थी निरंतर शिक्षा अर्जित करने की कोशिश करती हैं. यही शिक्षा उन्हें अपने प्रोफेशन को बेहतर ढंग से करने का आत्मविश्वास पैदा करती हैं. देश भर में लगभग सभी राज्यों के अपने शिक्षा बोर्ड हैं, जो विशेष लक्ष्य के साथ राज्य के सभी विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते हैं. अंत में इतना ही कहना उचित होगा, सब पढ़े सब बढे.

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