ईश्वर पर सुविचार | GOD Quotes Hindi Thought

GOD quotes in Hindi – विश्व का कोई भी धर्म हो उनमें ईश्वर को सर्वोच्च सत्ता प्रदान की गई हैं. कही इसे अल्लाह, पैगम्बर, गॉड, भगवान, ईश्, वाहेगुरु नामों से पुकारा जाता हैं, मगर उसका स्वरूप एक ही हैं. गॉड कोट्स यानि भगवान ईश्वर पर कोट्स सुविचार थोट्स में हम महान लोगों द्वारा सर्वोच्च सत्ता के बारे में कहे गये विचारों को आज जानेगे.

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ईश्वर तो हैं केवल एक, लेकिन उसके नाम अनेक


मिलता है उसको प्रभु प्यार, जो करता है आत्म सुधार


ईश्वर के घर लगती देर, किन्तु नही होता अंधेर


ईश्वर बंद नही हैं मठ में, वह तो व्याप्त है घट घट में


मंदिर में युगधर्म पले, जन जागृति की ज्योति जले


वही दिखाते सच्ची राह, जिन्हें न पद पैसे की चाह


जन मानस बद्लेगे कौन, जो कर सकते है सेवा मौन


खोजे सभी जगह अच्छाई, ऐसी दर्ष्टि सदा सुखदाई


जहाँ ह्रदय परमार्थ परायण, वहां प्रकट नर में नारायण


पांडव पांच हमें स्वीकार, सौ कौरव धरती के भार


ईश्वर ने इन्सान बनाया, उंच नीच को किसने उपजाया


ईश् न्याय दृढ खरा अटल, वहां न रिश्वत घूस सफल


जो करता है आत्म सुधार, मिलता उसको ही प्रभु का प्यार


लोभ स्वार्थ भोजन का धंधा, करता धर्म क्षेत्र को गंदा


सही धर्म का सच्चा नारा, प्रेम एकता भाई चारा


परहित सबसे ऊँचा कर्म, ममता समता मानव धर्म


जीवन उनका बना महान, जिनका हर पल रत्न समान


प्रभु के बेटे प्रेम सिखाते, निहित स्वार्थी दंगे भड़काते


वही व्यक्ति सच्चा संत, जिसके स्वार्थ अहं का अंत


सतयुग आएगा कब, बहुमत चाहेगा जब


पशुबलि झाड़ फूक जंजाल, इनसे बचे वही खुशहाल


मानव समता के प्रिय मानक, बुद्ध मुहम्मद ईसा नानक


अदालत और पुलिस से बच सकते हैं परमेश्वर से नही.


सत्कर्म ही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा हैं.


परमार्थ मानव जीवन का सच्चा स्वार्थ हैं.


परमात्मा की सच्ची पूजा हैं सद्व्यवहार हैं.


भाग्य को मनुष्य स्वयं बनाता हैं, ईश्वर नही


मनुष्य और कुछ नहीं मात्र भटका हुआ देवता हैं.


ईश्वर को मनुष्य के दुर्गुणों में सबसे अप्रिय अहंकार हैं.


संसार में उत्तम व्यवहार और शुभ कर्म करना ही सच्ची भगवान की पूजा हैं.


ईश्वर सभी को श्रेष्ट उत्तरदायित्व सौपता हैं, पर प्रसन्न उन्ही पर होता है, जो उन्हें निभाते हैं.


ईमान और भगवान ही मनुष्य के सच्चे मित्र हैं.


अंतरात्मा में बैठा हुआ ईश्वर उचित और अनुचित की निरंतर प्रेरणा देता रहता हैं. जो उसे सुनेगा समझेगा, उसे सीधे रास्ते चलने में कठिनाई नही होगी.


मनुष्य एक भटका हुआ देवता है सही दिशा में चल सके, तो इससे बढ़कर श्रेष्ट और कोई नही.


परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी और कर्तव्यपरायण के पास ही सुरक्षित हैं.


ईश्वर विश्वास का अर्थ हैं- उत्कृष्टता के प्रति असीम श्रद्धा रखने का साहस.


लघु से महान, अणु से विभु, आत्मा से परमात्मा, नर से नारायण, पुरुष से पुरुषोत्तम बनने की विचारधारा का नाम आस्तिकता हैं.


सर्वव्यापी, न्यायकारी, निष्पक्ष ईश्वर की प्रसन्नता सत्कर्मों पर आधारित हैं. कर्म के आधार पर ही वह भक्त और अभक्त की परख करता हैं.


ईश्वर कर्तव्य परायण को प्यार करता हैं.


ईश्वर पाप से बहुत कुढ़ता हैं और हमारी चोकिदारी के लिए अद्रश्य रूप में हर घड़ी साथ रहता हैं.


ईश्वर की भक्ति करने का अर्थ हैं- आदर्शवाद को प्रेम करना.


प्रेम ही परमेश्वर हैं.


ईश्वर उपासना का अर्थ है अपने आपकों विकसित करना

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