भारतीय मुद्रा रुपया का इतिहास | History Of Indian Rupee In Hindi

History Of Indian Rupee In Hindi मानव ने अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति केवल स्वय के साधनों से नही कर सकता. उसे अपनी कुछ आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए दूसरों द्वारा उत्पादित वस्तुओं पर निर्भर रहना पड़ता हैं. दुसरे द्वारा उत्पादित वस्तुओ को प्राप्त करने हेतु उसे प्रतिफल की आवश्यकता होती हैं. परन्तु यह समस्या उत्पन्न होती हैं कि यह प्रतिफल किस तरह चुकाया जाए, मानव सभ्यता के प्रारम्भिक वर्षो में व्यक्ति की आवश्यकताएं सिमित थी. वह अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए अन्य वस्तुओं के बदले स्वय द्वारा उत्पादित वस्तुओं देकर लेता था.

भारतीय मुद्रा रुपया का इतिहास ( History Of Indian Rupee In Hindi)

इस प्रकार प्रारम्भ में वस्तु विनिमय का प्रचलन हुआ, परन्तु धीरे-धीरे मानव की आवश्यकताएं बढती गईं, तब वस्तु विनिमय द्वारा यह काम असम्भव प्रतीत होने लगा. अत: ऐसे माध्यम की आवश्यकता महसूस हुई जो प्रतिफल के रूप में सभी को स्वीकार्य हो जो लाने ले जाने में सुगम हो, मानव की इसी आवश्यकता ने मुद्रा (Currency) को जन्म दिया.

मुद्रा विनिमय का एक सर्वसुलभ एवं आसान साधन हो गया. प्रारम्भ में मुद्रा के रूप में सर्वाधिक महत्वपूर्ण वस्तुओ को ही अपनाया गया. धीरे-धीरे इसमे परिवर्तन हुआ और बाद में धातु से निर्मित मुद्राएँ यथा- सोने-चांदी, ताबे, लोहे आदि के सिक्के प्रचलन में आए. परन्तु धातुओ की सिमित मात्रा तथा निर्माण की लागत अधिक होने के कारण बाद में पत्र मुद्रा (Paper money) का प्रचलन प्रारम्भ हुआ.

वर्तमान में विश्व के सभी देशो में कागजी मुद्रा का प्रचलन हैं. साथ ही बहुत ही कम मूल्य के सिक्को का प्रचलन भी हैं.

भारत की मुद्रा रुपया का इतिहास & जन्म (indian currency history )

भारत में वर्तमान में मुद्रा के रूप में रुपया अपनाया गया हैं. जुलाई 2013 में रूपये के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष संकेत (indian rupee symbol ) ₹ चिन्ह जारी किया गया हैं, जिस प्रकार कि अमेरिकन डॉलर का संकेत चिन्ह $ हैं. एवं इंग्लैंड की मुद्रा पाउंड का चिह्न £ हैं.

वर्तमान में रूपये के निम्न नोट (indian currency notes ) प्रचलन में हैं.- 1,2,5,10, 20, 50, 100, 500, 2000 रूपये. 1 रूपये का नोट (1 rupee note ) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा छपवाया जाता हैं. इस नोट पर भारत सरकार के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं. 1 रूपयें के अलावा अन्य सभी मूल्य के नोटों की छपाई (Printing of notes) का कार्य भारतीय रिजर्व बैंक ( देश का केन्द्रीय बैंक) द्वारा किया जाता हैं. इन नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर के हस्ताक्षर होते हैं. नोटों पर नोट का मूल्य (indian currency value) भारतीय सविधान में उल्लेखित सभी 22 भाषाओं में लिखा होता हैं.

भारत की मुद्रा में सिक्के (coins in indian currency)

प्रचलित नोटों के अलावा भारतीय मुद्रा में कुछ सिक्के भी प्रचलित हैं, ये सिक्के धातु के बने होते हैं. वर्तमान में भारत में 25 पैसे, 50 पैसे, एक रुपया, दो रूपये, पांच रूपये, एवं 10 रूपये के सिक्के प्रचलित हैं. परन्तु अब 25 पैसे एवं 50 पैसे का प्रचलन बंद हो गया हैं. इनका प्रचलन राजस्थान व अन्य कई राज्यों में लगभग न के बराबर रह गया हैं. इसका कारण रेजगारी की कमी होना एवं महंगाई का बढ़ जाना भी हैं. पहले 1 पैसा, 2 पैसे, 5 पैसे, 10 पैसे एवं 20 पैसे के सिक्के भी प्रचलित थे.

परन्तु कई वर्षो से इनका प्रचलन बंद हो चूका हैं. सरकार ने अब 25 पैसे या इससे कम मूल्य के सिक्कों का प्रचलन बंद कर दिया हैं. भारतीय मुद्रा रूपये की सबसे छोटी इकाई पैसा हैं.एक रूपये में 100 पैसे होते हैं. 1 रूपये में 1 पैसे के 100 सिक्के होते हैं. दो पैसे के पचास एवं 5 पैसे के 20 सिक्के होते हैं. 10 पैसे के 10 सिक्के तथा 20 पैसे के 5 सिक्के, 1 रूपये के बराबर होते हैं. एक रूपये में 25 पैसे के चार सिक्के, 50 पैसे के दो सिक्के होते हैं. रूपये के विभिन्न सिक्को की तुलना कई प्रकार से कर सकते हैं.

रुपया का इतिहास (history of indian rupee in hindi)

रुपया शब्द भारत की मुख्य भाषा संस्कृत का शब्द हैं जिनका शाब्दिक अर्थ चांदी (SILVER) होता हैं. संस्कृत भाषा का रूप्यकम् शब्द भी रुपया से बना हैं, जिसका अर्थ चांदी का सिक्का (Silver coin) होता हैं. हो सकता हैं भारतीय मुद्रा के प्रारम्भिक समय में चांदी के सिक्के हुआ करते हो. और रुपया शब्द का पहला प्रयोग अफगान आक्रान्ता शेरशाह सूरी ने 1541 में किया था. भारत में सिक्के का प्रचलन सूरी के काल से ही माना जाता हैं. इनके द्वारा निकाला गया रुपया तक़रीबन 12 ग्राम वजन में था. उस समय सोने के सिक्कों (Gold coins) को मोहर और तांबे के सिक्के (Copper coins) को दाम कहा जाता था.

सूरी द्वारा प्रचलित रुपया आज भारत की मुद्रा (Currency of india) हैं. उस 12 ग्राम के सिक्के में लगभग 92 फीसदी चांदी थी शेष मिश्रित धातु का हुआ करता था. उपनिवेशिक काल के दौरान सिक्के के आकार और वजन में कई बदलाव भी किये गये. उन्नीसवी सदी के शुरूआती दशकों को रूपये की गिरावट का दौर कहा जाता हैं. अधिक मात्रा में चांदी की कमी के कारण भारतीय रुपया पश्चिमी देशो के सोने के सिक्को की प्रतिस्पर्धा नही कर पाया. भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation of currency) आज भी जारी हैं.

भारतीय रूपये का प्रतीक (indian currency symbol)

रूपये के जन्म से लेकर ब्रिटिश शासन और इक्कीसवी सदी के शुरुआत तक रूपये को दर्शाने के लिए हिंदी में रू तथा अंग्रेजी में re ( एक रूपये के लिए) एवं Rs प्रतीक का प्रयोग किया जाता था. 15 जुलाई 2010 को भारतीय मुद्रा रुपया को अन्य देशो की तरह एक अधिकारिक प्रतीक चिह्न मिल गया हैं. आइआइटी गुहावटी के प्रोफ़ेसर डी उदयकुमार द्वारा डिजायन किया गया ₹ चुन लिया गया हैं.

अब रुपया अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पौंड, जापानी येन और यूरोपीय संघ के यूरो के बाद भारतीय मुद्रा ₹ पांचवी मुद्रा बन चुकी हैं, जिनका अपना प्रतीक चिन्ह हैं. ₹ को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाता हैं. जबकि पाकिस्तान में इसे स्टेट बैंक आफ़ पाकिस्तान जारी करता हैं. भारत में रुपये का दशमलवीकरण 1957 में हुआ इससे रुपया पैसो में विभाजित हो गया. इससे पूर्व तक यह 4 आने, 8 आने,16 आने में बटा हुआ था.

 

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