भूस्खलन के कारण प्रभावित क्षेत्र एवं प्रबंधन | Landslide Causes, Effects and Types And Major Areas In Hindi

भूस्खलन के कारण प्रभावित क्षेत्र एवं प्रबंधन | Landslide Causes, Effects and Types And Major Areas of Landslides In Hindi : मिट्टी व चट्टानों का ढ़लान पर उपर से नीचे की ओर खिचकने, लुढ़कने तथा गिरने की प्रक्रिया को भूस्खलन कहते है. भूस्खलन यदि बहुत बड़े परिमाण में होता है, तो उस क्षेत्र में गड़गड़ाहट धीरे धीरे शुरू होती है बाद में तेज आवाज के साथ मलबा नीचे की ओर गिरता है.

भूस्खलन के कारण (landslides causes and effects in hindi)

भूस्खलन के लिए किसी एक कारण को उत्तरदायी नही माना जा सकता है, अपितु कई कारक मिलकर भूस्खलन जैसी आपदा को जन्म देते है.

  • landslides का प्राकृतिक कारण- इसमें चट्टानों की सरंचना, भूमि की ढाल, चट्टानों में वलन व भ्रष्ण, वर्षा की मात्रा व वनस्पति का अनावरण आदि प्रमुख कारण है. नवीन मोडदार पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन अधिक होते है. क्योकिं वहां उत्थान की सतत प्रक्रिया के कारण चट्टानों को जोड़ कमजोर होते रहते है. व ढाल भी अधिक होता है. ऐसें में तीव्र वर्षा हो जाए तो वह स्नेहन का काम करती है.
  • landslides के मानवीय कारण– landslides जैसी प्राकृतिक आपदा को मानव ने अनियंत्रित विकास के कारण और अधिक बढ़ा दिया है. वन विनाश व मिट्टियों पर वृक्षों की जड़े अपनी मजबूत पकड़ छोड़ देती है, अतः मृदा अपरदन शुरू हो जाता है. सड़के, रेल मार्ग, सुरंगो के निर्माण तथा खनन से मानव landslides को बढ़ावा देता है.

भारत में landslides प्रभावित क्षेत्र

भारत में landslides हिमालय क्षेत्र में अधिक होता है. इसके बाद पश्चिमी घाट क्षेत्र है. इन क्षेत्रों में जहाँ नदियाँ प्रवाहित होती है. वहां landslides अधिक मात्रा में होता है. पूर्वोतर भारत, जम्मू कश्मीर जहाँ नयी सडको के निर्माण का कार्य हुआ वहां भी landslides अधिक होते है. समुद्री किनारों सागरीय लहरों के कारण भी landslides होता है.

भूस्खलन की समस्या पर छोटा निबंध, cause and effect of landslide essay

भूस्खलन नदियों का मार्ग अवरुद्ध कर देता है. तो कही आवागमन के मार्गों को अवरुद्ध कर देता है. मार्ग अवरुद्ध हो जाने से जन जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है. मांग पर पूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है. भूस्खलन आबादी वाले क्षेत्रों में होता है तो उससे जन धन दोनों की हानि होती है. लोग मकान के मलबे के ढेर में दब जाते है. उतरांचल में भी landslides से भारी जन धन की हानि होती है.

landslides से नदियों के मार्ग अवरुद्ध हो जाते है. तथा वहां अस्थायी झील बन जाती है. यह झील कभी टूटती है तो बाढ़ से जन धन की हानि होती है केदारनाथ में आई बाढ़ इसका उदहारण है.

भूस्खलन व प्रबंधन (landslide and its management in hindi)

  • सरकारी व सामाजिक स्तर पर (At government and social level)- भारत में होने वाले लैंडस्लाइड का 90 प्रतिशत से अधिक भूस्खलन वर्षा ऋतू में होता है. अतः पर्वतीय क्षेत्रों में जहाँ कही भी परिवहन के मार्गों का निर्माण हुआ है, उन मार्गो के दोनों ओर वर्षा निकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए. मार्गों के निर्माण के दोनों ओर 45 डिग्री के कोण पर मलबे को निर्माण के दौरान ही हटा देना चाहिए. यदि हटाना संभव नही हो तो मजबूत दीवार बनाकर दीवारों को सहारा दे देना चाहिए.
  • व्यक्तिगत स्तर पर (At the personal level)- स्वयं के वाहन पर जाते समय यदि भूस्खलन संभावित क्षेत्र में वर्षा प्रारम्भ हो गई हो तो वाहन को एक किनारे रोक दिया जाए. पर्वतीय क्षेत्रों में मकान मजबूत धरातल पर बनाये जाए. भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध होने पर फंसे हुए व्यक्तियों की दिल से हर तरह की हर संभव मदद की जाए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *