Maa Shayari in Hindi | माँ पर शायरी कविता

Shyari poem on mother in hindi के इस आर्टिकल में हमने अपने पाठकों के लिए बेहतरीन शायरी हिंदी में का कलेक्शन किया हैं.माँ और बेटा एवं बेटी के जन्म कन्या भ्रूण हत्या पर आधारित आप आकर्षक शायरी और कविताएँ हमारे इस लेख से प्राप्त कर सकते हैं.

माँ पर शायरी कविता (Best Maa Shayari in Hindi)

माँ पर शायरी (maa baap shayari)

(1)

मेरी रूह तुझे हर पल रही हैं धिक्कार.
ऐ माँ तेरी पवित्र पहचान आज कलंकित हो गई.
तेरि वात्सल्य की धाती आज काले अक्षरों में अंकित हो गई.

(2)

तेरि कोख मेरे दर्द की कर्जदार हो गई,
दूध से भरी छाती मेरे रुदन से दागदार हो गई,
अरे माँ ये क्या आज तेरि आँखों में पश्चताप और ग्लानी के भाव.

(3)

फिर भी ये न भर पाओगे मेरे दर्दीले जख्मो के घाव
ऐ माँ मेरी झोली में दे दे मुझे तू एक भीख
ले ले मुझ से तू माँ मेरी एक सीख.

(4)

इस बार कोई नन्ही कली तेरी कोख में पले
उसे नौ महीने तक तेरी कोख का आंचल मिले
मेरी बस इतनी सी हैं ख्वाइस
मत करना तू सामाजिक बन्धनों से समझोता
कोख में तेरी मेरा भईया हैं या बहना
अपनाना उसे तू मानकर अनमोल गहना
उस पर न करवाना तू हमला कातिलाना
जिन्दगी को मत देना मौत का बहाना तू
तूने जो नही राखी माँ की ममता की लाज
मै बेटी होने का कर्ज चुकाती हु आज
अब तो तू माँ संभल जाना
अब न बनाना तू कोख कब्रगाह का ठिकाना
मेरी रूह तुझे अभिशापों से मुक्त कर देगी
दामिनी मेरी बहिन जन्म लेकर तेरी
झोली खुशियां से भर देगी
(माँ बेटी की कविता)

(5)

ऐ खुदा तूने गुल जो गुलशन में जगह दी
पानी को दरिया में जगह दी
तू उसको जन्नत में जगह देना
जिसने मुझे 9 महीने अपने गर्भ में जगह दी.

(6)

फूल कभी दुबारा नही खिलते
जन्म कभी दुबारा नही मिलता
मिलते हैं हजारों लोग पर
हजारों गलतियाँ माफ़ करने
वाले माँ बाप नही मिलते.

(7)

नीद अपनी भुलाकर सुलाया हमकों
गोद अपनी दबाकर समझाया हमकों
दर्द मत देना खुदा की उस तस्वीर
को जमाना जिन्हें माँ बाप कहता हैं.

(8)

हर कलाकार अपनी कला को
अपना नाम देता हैं, लेकिन
माँ जैसा कलाकार दुनिया में
कोई नही … जो स्वयं के बच्चे को
जन्म देकर नाम पिता का देती हैं.

माँ पर कविता हिंदी में (mother poem in hindi )

हम पर ही जब खंजर चले
फिर क्यों माँ हम तेरि कोख में पले,
जब मुझे औजारों से खीचा
मैंने सोचा नानी ने भी तो तुम्हे था सीचा
फिर भी नही तुम्हारा दिल पसीजा
ऐसी भी क्या दी हमे बेरहम सजा
मै चीखती चिल्लाती रही
तेरि ममता सो गई कही
ऐ माँ तू ममत्व के नाम पर क्यों इतनी
हैवान हो गई
तेरी वात्सल्य की वो प्रीत जाने कहा खो गई
जब मेरे आसू खून बनकर बह रहे थे.
एक पल तो तूने सोचा होता
नानी ने भी कोख में तेरे टुकड़े कर कभी फेका होता
तभी माँ तुझे होता इस दर्द का अहसास
मै अब रूह बनकर सदा रहूगी तेरे आस पास
जो तूने ही दी मुझे बेरहम सजा
मै क्या दू अब तुझे जीवन का वो मजा
किलकारियों से सदा रहेगा तेरा घर सूना
वधु के बिना क्या करेगे वर
सुनने को तरसेगे तेरे कर्ण कोयल सी मीठी बोली
तेरे आगन में नही होगी अब कभी खुशियाँ की होली
इतनी बेरहमी से किया मेरा कत्ल
मांस के टुकडो में तब्दील हो गई मेरी शक्ल
इंसान की रूह को कपा देने वाला वह मंजर
फिर भी नही रोके तूने वह हाथ जो उठाते हैं खंजर
उन सबका जीवन होगा हाला
जिसने मुझे टुकड़े-टुकड़े कर मार डाला
वात्सल्य को करके बदनाम
कतल कर पूछती हो कातिल का नाम
मेरा बेटी होना था गुनाह
फिर क्यों आज तेरा अस्तित्व हैं बेपरवाह
जब खंजर से तुमने मुझपर वार किये हजार
तब मेरे अश्को से बनकर बही हैं खून की धार
करके मुझ पर हमला कातिलाना
जीते जी दिया जिन्दगी को मौत का बहाना
एक न एक दिन तो सबको था जाना
माँ तूने क्यों अपनी ही कोख को बना दिया
कब्रगाह का ठिकाना
आज भाग्य लिखने वाली वह लेखनी भी टूट गई होगी
देख कर वह खुनी मंजर विधाता भी तुजसे रूठ गई होगी
माँ की कोख में मिली मुझे मौत
ऐ माँ क्यों बुझा दी तूने अपनी ही हाथो जीवन की जोत
फिर भी नही पसीजी तेरि छाती
कलंकित हो गई तेरि ममता की धाती
माँ जब भी हो तुझे दर्द का अहसास
मेरी चीख सदा रहेगी तेरे आस पास
फिर करना तुम मेरे दर्द का अहसास
जो नासूर बनकर सदा रहेगा तेरे आस पास

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