नारी पर अत्याचार पर निबंध | Nari Par Atyachar Essay In Hindi

नारी पर अत्याचार पर निबंध | Nari Par Atyachar Essay In Hindi आए दिन हम समाचार पत्रों और टेलीविजन पर  Nari Par Atyachar की खबरे देखने को मिल ही जाती हैं. एक तरफ हम नारी को देवी लक्ष्मी और दुर्गा का स्वरूप देकर पूजा करते है दूसरी तरफ अपने ही घर में उन पर जुर्म ढहाते हैं. mahila utpidan essay & nari suraksha essay में हम नारी पर हो रहे अत्याचार पर हिंदी निबंध women oppression प्रस्तुत कर रहे है. नारी पर अत्याचार पर निबंध  | Nari Par Atyachar Essay In Hindi

नारी पर अत्याचार पर निबंध | Nari Par Atyachar Essay In Hindi

किसी पर भी अन्याय तथा अत्याचार किसी सभ्य समाज की निशानी नहीं हो सकती हैं. फिर समाज के एक बहुत बड़े भाग यानि स्त्रियों के साथ ऐसा करना प्रकृति के विरुद्ध हैं. नारी को भी वो सभी प्राकृतिक अधिकार हासिल है जो कि एक पुरुष को हैं. उन्हें अबला मानकर उन पर अत्याचार करने का आशय कायरता हैं.

आज किसी भी क्षेत्र में नजर उठाकर देखियें, नारियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रगति में समान की भागिदार हैं. फिर उन्हें कमतर क्यों समझा जाता है यह विचारणीय हैं. हमें उनका आत्मविश्वास बढाकर उनका सहयोग करके समाज की उन्नति के लिए उन्हें साहस और हुनर का सही दिशा में उपयोग करना चाहिए तभी हमारा समाज प्रगति कर पाएगा.

नारी पर अत्याचार एस्से इन हिंदी

क्या आज हम अपने आधुनिक समाज में केवल पुरुषों को ही रखना चाहते है यदि नही तो फिर महिलाओं के साथ अत्याचार क्यों. क्या वो इस देश की नागरिक नहीं अथवा वे सिर्फ नारी है इसलिए उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाए. यदि ऐसा है तो फिर हमारी माँ, बहिन, पत्नी, बहिन, भाभी वो भी तो एक महिला हैं.

आए दिन नारी अत्याचार की घटनाओं में वृद्धि हो रही हैं. दुष्कर्म, बलात्कार, एसिड डालकर चेहरा जला देने, दहेज़ उत्पीड़न और तलाक जैसे अपराध आज भी हमारी सोच पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं.

दिल्ली के निर्भया कांड ने न सिर्फ देश में बल्कि दुनियां भर में इस दरीन्दगी के स्वरूप को जगजाहिर किया हैं. हालांकि मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना से पूरे देश को शर्मिदा किया, मगर जो इसके बाद हुआ वो भारतीय समाज की असली पहचान थी.

दोषियों को तुरंत पकड़ने तथा उन पर कठोर कार्यवाही करने के लिए देशभर में आंदोलन एवं सोशल मिडिया पर जो जन आक्रोश देखा गया, उसी आक्रोश को हम अपने दिल में जिन्दा रखे तो संभव हैं हमारे समाज में इस तरह की घटना को अंजाम देने की कोई दरीन्दा नहीं सोचेगा.

एक तरफ विश्व मंचों पर हम अपने वतन का बखान करने के लिए नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता की उक्ति को जोर से दोहराते हैं. मगर रोज महिला अत्याचार की ये घटनाओं उन्ही दावों की पोल खोल देती हैं.

हमारी कथनी में जहाँ नारियों का सम्मान किया जाता है वहां देवता बसते है मगर असल में तो नारी पर सर्वाधिक अपराध तो हमारे देश में ही होते हैं. देश की राजधानी भी उनमें शामिल हो तो फिर पैरवी करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता हैं.

नारी पर अत्याचार रोकने के उपाय

हमें लगता है युवा पीढ़ी को महिलाओं के प्रति अपनी सोच को बदलने की आवश्यकता हैं. भले ही हमारी पौराणिक उक्ति सत्य ना हो मगर औधे मुहं तो ना गिरे. जहाँ नारियो का सम्मान किया जाता है वहां इन्सान बसते हैं. यह उक्ति आज के समय में सही प्रतीत होती है तथा हमें इसी को चरितार्थ करने का प्रयत्न करना चाहिए.

सरकार को भी नारी अत्याचार को अंजाम देने वाले मनचलों के लिए विशेष कानूनों तथा कठोर सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए. कई बार आँखे शर्म से झुक जाती है जब कि 5-7 साल की बच्ची के साथ बलात्कार, गैंगरेप जैसी घटना सुनते हैं.

हम किस समाज में जी रहे हैं, यह दरिदों का समाज प्रगति करके कहाँ जाएगा. यदि यही स्वरूप है प्रगति का तो हमें आधुनिक समाज नहीं चाहिए बल्कि दो पीढ़ी पूर्व का समाज लौटा दीजिये. नारी हमारे समाज का मूलभूत अंग है यदि वह पीड़ा और कठिनाइयों में अपना जीवन बिताती है तो समाज आगे बढ़ेगा यह कपोल कल्पना भर है जिसका सत्यता से कोई वास्ता नहीं हैं.

असल में लोगों की सोच में ही अपराध बसा हुआ हैं. आप किसी सामान्य 10 इंसानों से पूछ लीजिये नारी अत्याचारों का कारण क्या है, संभव है आपकों अधिकतर कारण ये गिनाएगे कि जींस नहीं पहननी चाहिए, अकेले नहीं जाना चाहिए, रात को घर से बाहर नही निकलना चाहिए.

गौर करे तो यही कारण है नारी अत्याचार के तो फिर हमारे समाज और जंगल में फर्क क्या रह जाता हैं. पर्यटकों को भी यह ही सलाह दी जाती है कि अकेले न जाए, रात को न जाए. फिर क्या मतलब है कानून का समाज का व्यवस्था का. लकड़ियाँ एवं महिलाएं भी समाज की मुख्य कड़ी हैं.

क्या उन्हें लडकों की तरह पहनने, घूमने की आजादी नही. हमें अपने सोच को बदलना चाहिए. इन्सान की सोच गंदी नहीं हो तो फिर सारी बाते कोई मायने नहीं रखती हैं. बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ अभियान के जरिये भारत सरकार निरंतर बालिकाओं को जन्म देने तथा उन्हें शिक्षित करने के लिए प्रेरित कर रही हैं.

आज देश के कई राज्य ऐसे है जहाँ का लिंगानुपात सामान्य से बहुत नीचे हैं. हमें जरुरत है अपने नजरिये को बदले तभी हम भविष्य में आने वाली बड़ी मुशिबतों से बस सकते हैं. अन्यथा यही हाल रहा तो वे दिन भी आए जाएगे जब कोई माँ अपनी कोख से बेटी को जन्म नहीं देना चाहेगी.

महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार mahila atyachar essay in marathi

मेरे शब्दों में पुरुष प्रधान समाज को अब जागने और जगाने का वक्त हैं. साथ ही महिलाओं को अपनी शक्ति का एहसास करवाने और उन्हें अपनी खोई हुई शक्ति वापिस दिलाने का समय आ गया हैं. नारियां जीवन देना जानती है तो वे लेना भी जानती हैं.

सती सावित्री का प्रसंग उल्लेखनीय हैं जिन्होंने अपने सत्य एवं पतित्व के बल पर अपने पति के प्राणों को भी यमराज से छुड़ा लिया था. नारी शक्ति को अपनी शक्ति स्वयं ही जगानी होगी क्योंकि जिसका मन, आत्मा और विवेक मर चूका हो वो स्वयं मरा हुआ है फिर कैसे किसी को जगाएगा. यही हाल पुरुष प्रधान इस समाज का हैं.

इन अत्याचारों को रोकने के लिए समाज को भी कुछ कदम उठाने चाहिए. आजकल की अश्लील फिल्मों तथा सोशल मिडिया पर इस तरह के कंटेट को रोकने की आवश्यकता हैं. जिसका सीधा नकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता हैं.

यदि बेहद अश्लील ढंग से टीवी पर विज्ञापन नित्य बच्चों को दिखाया जाएगा, उन्हें क्राइम की फ़िल्में ही यूँ दिखाई जाती रही तो एक दिन वह अपराध के खौफ से मुक्त हो जाएगा तथा उसे किसी का कत्ल करने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं होगी. क्योंकि इसकी मानसिक प्रशिक्षण तो उसे बचपन से ही घर बैठे टीवी पर मिल रही थी.

ये ही कुछ बड़ी बाते हैं जिन पर अब सख्त ध्यान देने की आवश्यकता हैं. यदि समय रहते हम इस तरफ ध्यान नहीं दे पाए तो न सिर्फ नारी पर अत्याचार आए दिन बढ़ेगे बल्कि हमारा समाज भी तेजी से गलत दिशा की ओर चला जाएगा, जहाँ से लौटना कठिन हो जाएगा.

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