समुद्री तूफ़ान की समस्या प्रभावित क्षेत्र कारण एवं प्रबंधन | Sea Storm Problem Affected Area Cause In Hindi

समुद्री तूफ़ान की समस्या प्रभावित क्षेत्र कारण एवं प्रबंधन | Sea Storm Problem Affected Area Cause In Hindi : समुद्री तूफ़ान को भारत में चक्रवात (Cyclone) भी कहा जाता है. ये चक्रवात उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में विचरण करते है. अतः इन्हें उष्णकटिबंधीय चक्रवात या समुद्री तूफ़ान भी कहते है. भारत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात समुद्री क्षेत्र में उत्पन्न होकर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से भारत में प्रवेश करते है. उष्णकटिबंधीय चक्रवात समुद्र में उत्पन्न होते है, अतः इनमे आद्रता बहुत अधिक होती है. तटीय क्षेत्रों में करने पर ये बहुत भारी वर्षा करते है. तटीय क्षेत्रों में इनकी गति बहुत तेज होती है. जैसे जैसे ये आंतरिक भागों में प्रवेश करते है, इनकी गति व वर्षा की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो जाती है. अपनी तेज गति व वर्षा के कारण तटीय क्षेत्रों में समुद्री चक्रवात से जन धन की हानि होती है.

Sea Storm Problem Affected Area Cause In Hindi

समुद्री तूफ़ान आने के कारण (Cause for the storm In Hindi)

गर्मी के संवहन क्रिया के अंतर्गत सागरों के उपर अधिक ताप के कारण वायु हल्की होकर उपर की ओर उठती है, उनसे बने कम वायुदाब के क्षेत्र को भरने के लिए चारों ओर से हवाएं आती है. इन वायुमंडलीय विक्षोभ से चक्रवात अथवा समुद्री तूफ़ान या आँधी की उत्पति होती है. देश के भीतरी भाग में ये तूफ़ान कितना अंदर तक प्रवेश करेगे यह इस बात पर निर्भर करता है. कि उत्तरी पश्चिमी भारत में तापमान कितना अधिक है व इस कारण न्यून वायुदाब का केंद्र कितना प्रभाव शाली बनता है.

उत्तरी पश्चिमी भारत मर शीतकाल में भी चक्रवाती तूफ़ान आते है, लेकिन ये शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात होते है. इनके उत्तरी पश्चिमी भारत में शीतकालीन वर्षा (मावठ) होती है जो रबी की फसलो के लिए उपयोगी होती है.

भारत में समुद्री तूफ़ान से प्रभावित क्षेत्र (Area affected by sea storm in India)

समुद्री तूफ़ान में पश्चिमी व पूर्वी समुद्र तटीय व उनसे लगते आंतरिक क्षेत्र प्रभावित होते है. अरब सागर के समुद्री तूफ़ान प्राय अप्रैल से जून महीने में पैदा होते है. इनका मार्ग समान्यतया तट के समांतर होता है.

गुजरात तट से ये भारत में प्रवेश करते है. बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले चक्रवात सामान्यत अक्टूबर से दिसम्बर तक पैदा होते है. ये चक्रवात मध्यप्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा व पश्चिमी बंगाल को सर्वाधिक प्रभावित करते है.

समुद्री तूफान पर निबंध (Essay on sea storm)

समुद्री तूफान की उत्पति के समय इनका आकार कम रहता है लेकिन समुद्री क्षेत्र में निर्बाध आगे बढ़ते रहने के साथ इनका आकार व वायु की गति बढ़ती जाती है. इन चक्रवातो की गति लगभग 15 किमी प्रति घंटा होती है. जल क्षेत्र में आने के कारण इनमे बहुत नमी होती है. तटीय क्षेत्र में ये तेज हवा के साथ तेज गति से वर्षा करते है.

वर्षा इतनी भारी होती है कि बाढ़ की स्थति उत्पन्न हो जाती है. पवनो की तेज गति से वृक्ष उखड़ जाते है. विद्युत् के खम्भे व संचार के साधनों के खम्भे क्षतिग्रस्त हो जाते है. कच्चे मकान ढह जाते है. व झौपड़ीया उड़ जाती है, तेज हवा के कारण तटीय क्षेत्र में समुद्री लहरे अंदर तक प्रवेश कर जाती है. इनसे से काफी निराश होता है. नाविकों का जीवन खतरे में पड़ जाता है.

समुद्री तूफ़ान प्रबंधन (Sea storm management)

  • सरकार व सामजिक स्तर पर-समुद्री तूफानों के सम्बन्ध अग्रिम न तन्त्र का अवश्य विकास होना चाहिए. उपग्रह के चित्रों तथा उनसे प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तूफ़ान के मार्ग, पवन की गति व वर्षा की मात्रा की जानकारी प्राप्त होती रहनी चाहिए. इन सूचनाओं को रेडियों व अन्य संचार माध्यमों के द्वारा बार बार प्रसारित किया जाना चाहिए. नागरिकों सुरक्षित क्षेत्र के बारे में जानकारी देनी चाहिए. ताकि वे वहां पहुच सके. इस तरह जनहानि से बचाया जा सके.तूफ़ान की गति कम करने के लिए तटीय क्षेत्रों में संघन वृक्षारोपण अभियान चलाए जाने चाहिए. मछुआरों को तूफ़ान की अवधि के समय समुद्र में प्रवेश करने से रोकने की सलाह व प्रयास किये जाने चाहिए. तूफान प्रभावित क्षेत्रों में सामूहिक बीमा जैसी योजनाएं चलाई जानी चाहिए.
  • व्यक्तिगत स्तर पर- संकट के समय जितने भी प्रबंध किये है, वे व्यक्तिगत ईमानदारी व निष्ठां के बिना सफल नही हो सकते है. व्यक्तियों को चाहिए कि तूफ़ान के बारे में जो भी सूचनाएँ मिल रही है. उनके आधार पर नागरिकों को स्वयं सुरक्षित स्थान पर पहुचे तथा वृद्धों बालकों व महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर पहुचाएं. सरकार व सामाजिक संस्थाओं द्वारा दी जा रही राहत सामग्री का मिल बाट कर उपयोग करे.

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