स्वतंत्रता दिवस पर भाषण | Speech on Independence Day

Speech on Independence Day-यहाँ एकत्रित आदरणीय अध्यापकों, अभिभावकों तथा फूल की तरह खिलते हुए मेरे प्यारे भाइयो और बहिनों, जैसा कि सर्वविदित हैं. आज हम अपना 71 व़ा स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं.

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण (Independence Day Short Speech)

15 अगस्त 1947 को हमे आजादी मिली थी. उसके बाद से आज तक हम विकास के सभी क्षेत्रो में अच्छी रफ़्तार से आगे बढ़ रहे हैं. इसी का परिणाम हैं कि दुनिया के किसी हिस्से में कोई भारतीय रहता हैं तो गर्व से कहता हैं, हम हिंदुस्थानी हैं. यही छोटी-छोटी चीजे दिखाती हैं हमे अपने माधुरेवतन से कितना प्रेम हैं.
आधी रात को स्वतंत्रता;
भोर पर जाएं;
एक छोटी सी गति से कम;
एक छोटी सी बहुत ज्यादा और प्रतिबंधों;
लेकिन कभी नहीं उदास;
नहीं खड़े करने के लिए झिझक;
यात्रा के लिए जारी;
भोर जीतने करते हैं।
भारत की आजादी को हासिल करने के लिए तक़रीबन 100 वर्ष का खुनी संघर्ष करना पड़ा. लाखों लोगों ने अपने वतन की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी थी. आज स्वतंत्रता दिवस 2017 के इस अवसर पर ऐसे वीर सपूतों को सच्चे दिल से नमन करता हू. जिन्होंने अपने स्वार्थ को सीधा करने के लिए बुद्द की भूमि कही जाने वाली इस भारत-भूमि पर मानवता का कत्लेआम शुरू कर दिया था, ऐसे अत्याचारियों के विरुद्ध के आजादी के रखवाले अपना सीना तानकर खड़े हो जाते थे.

वो अहिंसा की मूरत जो चले तो अकेले थे, मगर कुछ ही कदम पर उनके पीछे जुलुछ उमड़ चूका था. एक लाठी के सहारे चलने वाले उसी इंसान को समझने में कमजोरी कर दी थी. कि सत्य और अहिंसा जैसी बातों में कितना दम हो सकता हैं. राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, हजारो स्वतन्त्रता सैनानी, साहित्यकारों, समाजसुधारको के सयुक्त प्रयासों से आखिर भारत देश की जनता जाग उठी, इसका नतीजा था. ब्रिटेन के सपने तार-तार जो भारत को आने वाले कई सैकड़ो वर्षो तक गुलाम रखना चाहते थे.

जब भी इस भारत भूमि की जनता मूड में आई हैं, कोई विदेशी ताकत आँख भी नही उठा सकी हैं, भले ही आज हम राज्यों भाषाओ और धर्मो में विभाजीत हैं, हमारी एक ही पहचान हैं, हम भारतीय हैं, हमारे सभी भारतीय भाई-बहिन हैं. हमे फिर से एक होना होगा, फिर से जनता के मूड को जगाना होगा. क्युकि भले ही आज हम स्वतंत्र हैं, हमारे शासक हमारे द्वारा ही चुने जाते हैं. मगर स्थति बड़ी विकट हैं.

71 साल पहले तो एक ही समस्या थी. वो थे, अंग्रेज मगर आज हम भीतरी और बाहरी समस्याओ से ग्रस्त हैं. कभी सीमा पर तो कभी हमारे द्वारा पनपाई गईं, समस्याए खड़ी हो जाती हैं. इस वीर भूमि पर जन्म लेने वाला एक पुरुष नारी एक योद्धा होता हैं, भले ही समय बदलाव के साथ स्थ्तियाँ बदल गईं हो. मगर समस्याओं का इजाफा हुआ हैं. सीमा पर जाकर दुश्मन की गोली झेलना ही देशभक्ति नही हैं, हम हमारे देश में रहकर भी अपने व्ययसाय नौकरी के करते हुई भी राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं. चाहे रिश्वत खोरी हो या बढती आबादी, स्वच्छता, अशिक्षा, देश के दुश्मनों को समर्थन ऐसे हजारो विषय हो सकते हैं. जिनमे हम सक्रिय रूप से भूमिका निभाकर इस देश की जनता को जाग्रत कर सकते थे. जब जनता मूड में आती हैं, तो संग्राम होता हैं, हमे फिर से देश के भीतर इस समस्याओ के विरुद्ध सयुक्त लड़ाई करनी होगी.

इसी के साथ मै अपनी वाणी को विराम देना चाहुगा.

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