अमेरिका की स्वतंत्रता का इतिहास | History of USA Independence In Hindi

नमस्कार अमेरिका की स्वतंत्रता का इतिहास History of USA Independence In Hindi में हम अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के बारे में संक्षिप्त में हिंदी में जानेगे. भारत की तरह संयुक्त राज्य अमेरिका भी लम्बे समय तक ब्रिटिश उपनिवेश था. व्यापक अमेरिकी क्रांति के बाद यूएसए को आजादी मिली. हिंदी में स्वतंत्रता आंदोलन की मुख्य घटनाओं को समझेगे.

अमेरिकन स्वतंत्रता का इतिहास History of USA Independence In Hindi

अमेरिका की स्वतंत्रता का इतिहास History of USA Independence In Hindi

USA जिनकी full फॉर्म यूनाईटेड स्टेट of अमेरिका के नाम से जाना जाता हैं, आबादी के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुल्क. जो 50 से अधिक संघ राज्यों से बना हैं, USA को नईं दुनिया उपनाम से भी जाना जाता हैं.

उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में स्थित इस सुपर पॉवर नेशन की राजधानी वाशिगटन डीसी हैं. जिसका क्षेत्रफल 98 लाख वर्ग किलोमीटर हैं, 40 करोड़ की आबादी समाए हुए USA भारत की तरह विविध संस्क्रतियो और सभ्यता का मिश्रित रूप हैं.

अमेरिका की स्वतंत्रता (America’s Freedom In Hindi)

एक समय सयुक्त राज्य अमेरिका भी भारत की तरह ही इंग्लैंड का उपनिवेश राज्य था, जिन्हें अपनी स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए लम्बा सघर्ष करना पड़ा. 4 जुलाई 1776 का दिन अमेरिका के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन हैं.

इसी दिन 13 उत्तरी राज्यों ने स्वय को इंग्लैंड के प्रभुत्व से आजाद घोषित कर दिया था. इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 4 जुलाई को अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस (independence day usa) मनाया जाता हैं.

अमेरिका वासियों को जब इंग्लैंड की शोषणकारी नीतियों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई तो इन्होने गुलामी के इस चंगुल से निकलने की ठान ली और 1775 में अमेरिकी स्वतन्त्रता संग्राम का बिगुल बजा दिया.

अमेरिकिन की एकजुटता और इंग्लैंड के प्रशासको को दमनकारी निति के कारण उनकी भावना और तीव्र होती गईं. उसी का नतीजा था कि अगले ही वर्ष 4 जुलाई 1776 को एक वर्ष के स्वतन्त्रता संग्राम से यूनाइटेड स्टेट अमेरिका को आजादी मिल गईं.

तत्कालीन ब्रिटिश शासक जार्ज तृतीय की कठोरतापूर्वक और दमनकारी निति ने अमेरिकन की भावनाओं को भडकाने का काम किया.

स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेजी उपनिवेशवाद का विरोध करने वाला अंग्रेजी नवयुवक टॉमस पेन ने कोमनसेन्स नामक किताब लिखी. जिन्होंने लोगों की भावना को और मजबूत करने का काम किया.

यही से अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा की पहल शुरू की गईं थी. 7 जून को स्वतन्त्रता का प्रस्ताव रखा गया. 28 जून को इसे कांग्रेस के समक्ष प्रस्तुत किया गया. जिन्हें 2 जुलाई को सर्वमत से पास करने के बाद 4 जुलाई को आजादी की घोषणा कर दी गईं.

अमेरिका की क्रांति के कारण (Reasons for America’s Revolution In Hindi)

इंग्लैंड एवं स्पेन के मध्य 1588 ई. में जल युद्ध हुआ था, इस युद्ध के नतीजे इंग्लैंड के पक्ष में रहे थे. परिणामस्वरूप अमेरिका जिन्हें नईं दुनिया भी कहा जाता हैं, इस पर इंग्लैंड का आधिपत्य हो चूका था.

प्रशासन की द्रष्टि से सयुक्त राज्य अमेरिका को तीन भागो में विभाजित किया गया उतरी भाग, मध्य भाग और दक्षिणी भाग. कृषि के उपयोगी जमीन होने कारण यहाँ व्यापारिक फसलों का बड़ी मात्रा में उत्पादन किया जाने लगा. इस दोरान ब्रिटिश सम्राज्य के लोग बड़ी तादाद में अमेरिका की ओर रुख करने लगे.

इंग्लैंड ने अमेरिका को अपना उपनिवेश बनाकर अधिक से अधिक मात्रा में धन लुटने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी, उसी का नतीजा था कि यहाँ का मूल निवासी किसान और उद्योगपति पिछड़ता चला गया और इंग्लैंड का खजाना दिन ब दिन भरता गया.

अमेरिकी क्रांति के पीछे कोई एक कारण न होकर कई मुख्य कारण थे  जिनमे अहम कारण था अंग्रेजो द्वारा खेतिहर किसानो को अपनी जमीन से बेदखल कर उन्हें बेरोजगार करना, इस तरह की निति का परिणाम था. कि कुछ ही वर्षो में बेरोजगार क्रशको और मजदूरों की तादाद बढती गईं.

लोगों में असंतोष पनपने लगा. अमेरिका का समाजिक ढांचा स्वतन्त्रता प्रेमी था. जो समतावादी विचारधारा को मानते थे, उनके इस विचार को मजबूत करने का काम इंग्लैंड के उन लोगों ने किया जो सम्राज्यवादी निति के विरोधी थे और अमेरिका में प्रवासी बनकर अपना जीवन निर्वहन कर रहे थे.

इसके अतिरिक्त एक अहम कारण जो इस क्रांति का था वो था अंग्रेजो द्वारा सभी आर्थिक और राजनितिक सस्थाओ पर एकाधिकार करना, स्वय को अपने ही घर लुटा हुआ महसूस करने वाली अमेरिकन जनता के दिल में आजादी की ललक विकसित होती गईं.

अमेरिका की क्रांति कब हुई (When did the US revolution In Hindi)

ऊपर बताये गये कारणों के अतिरिक्त कुछ अन्य तत्कालीन कारण भी इस क्रांति के जन्म का कारण रहे. जार्ज तृतीय का अकुशल शासक और उनकी अदूरदर्शी सोच का ही नतीजा था कि 1774 में अमेरिकन क्रांति का बिगुल बजा.

सभी प्रान्तों के कांग्रेस सदस्यों ने फिलाडेल्फिया में बैठक की, और ब्रिटिश सरकार से स्वशासन प्राप्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया. मगर ब्रिटिश सरकार इन कांग्रेसी नेताओ की बात मानने से इनकार कर दिया.

इस बिच राष्ट्रवादियो और ब्रिटिश सरकार के मध्य युद्ध आरम्भ हो गया. 19 अप्रैल को लेक्सिंगटन से स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई.

जार्ज तृतीय की अदुर्दार्शिता पूर्ण निति फिर से सामने आई उसने सभी विद्रोहियों को देश द्रोही करार दिया. उनके विद्रोह के स्वर को दबाने के लिए बड़ी संख्या में सैनिको को सेना में भर्ती किया जाने लगा.

इससे न केवल अमेरिकन के मन में असंतोष पनपा बल्कि ब्रिटिश लोगों ने भी गलत निर्णय समझा टॉमस पेन ने इसके विरोध में कॉमनसेंस पुस्तक लिखी.

अमेरिकन स्वतन्त्रता संग्राम के नेताओ ने भी महसूस किया कि उन्हें आजादी के लिए बाहरी सहायता की आवश्यकता पड़ेगी. इसके लिए इन्होने फिलाडेल्फिया में एक सभा बुलाकर 4 जुलाई 1776 को सभी 13 अमेरिकन स्टेट की आजादी की घोषणा कर दी.

अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के परिणाम (The consequences of the American Freedom Struggle In Hindi)

अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम एक अद्भुत कायाकल्प था, क्युकि इससे पूर्व ब्रिटेन को पराजित करना असम्भव माना जाता था, क्युकि अब तक कोई भी शक्ति या राष्ट्र ब्रिटेन को पराजित नही कर पाया था. मगर अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम ने इस मिथक को झूट साबित कर दिया.

इस संग्राम के बाद फ़्रांस स्पेन पुर्तगाल जैसे देश भी ब्रिटेन से सीधी टक्कर लेने लगे.यह पहला अवसर था जब ब्रिटेन की नौसेना को पराजय का सामना करना पड़ा.

अमेरिका की स्वतन्त्रता से अन्य उपनिवेशक राष्ट्र भी अपनी स्वतन्त्रता के सघर्ष को तेज करने लगे, लोकतान्त्रिक मूल्यों की आधुनिक विश्व में नई पहचान मिलने लगी. इंग्लैंड सरकार की दोषपूर्ण शासन व्यवस्था,

प्रारम्भ में अंदरूनी मामलों में कम हस्तक्षेप फिर अपने असली रूप में आना, फ़्रांस के सात लगातार सात वर्षो के दौरान युद्ध, साथ ही इंग्लैंड सरकार की कठोरतापूर्ण दमनकारी नितियाँ अमेरिका की स्वतन्त्रता संग्राम की क्रांति का कारण बनी.

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