गांधी जयंती निबंध 2019 – Gandhi Jayanti Essay in Hindi Pdf Download for Class 1-12 Pdf – Gandhi Jayanti par Nibandh

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गांधी जयंती निबंध 2019 – Gandhi Jayanti Essay in Hindi Pdf

गांधी जयंती निबंध 2019 – Gandhi Jayanti Essay in Hindi Pdf

आप सभी को दोस्तों मेरा प्रणाम – 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती है| हम सभी यहा गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के लिए इकठे हुए है | हम Mahatma Gandhi Ji के महान व्यक्ति के बारे में बात करेगे | जिन्होंने हमें सत्य और अहिशा के मार्ग पर चलाना सिखया था | हम गांधी जयंती को पुरे भारत में एक राष्ट्रीय अवकाश के रूप मे मनाते है| महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है | जिसे हम बापू या राष्ट्रपिता के नाम से भी जानते है | आज आप हमारे साथ पढेगे Mahatma Gandhi Jayanti Essay Hindi और सभी विद्यार्थियो के लिए Nibandh On Bapu For School Student Class LKG UKG And 1 2 3 4 5 6 7 8 सभी कक्षाओं के विद्यार्थी अपनी शाला मे गांधी जयंती पर हिंदी में निबंध को आराम से गाँधी जयंती के अवसर पर प्रस्तुत कर सकते है

गांधी जयंती पर निबंध 2019

महात्मा गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2019: हम सभी को पता है कि 2 अक्टूबर को हर साल गांधी जयंती मनाई जाती हैं. इस दिन एक अन्य महापुरुष जिनका नाम लाल बहादुर शास्त्री है उनकी जयंती भी हैं. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सम्मान देने के लिए गांधी जयंती- Gandhi Jayanti मनाई जाती हैं. सत्य एवं अहिंसा के परम पुजारी राष्ट्रपिता गांधी के जन्म दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे 2007 से मनाना शुरू किया था. गांधीजी के सम्मान में इस दिन छात्रों को महात्मा गांधी जयंती का भाषण, गांधी जयंती के लिए निबंध Gandhi Jayanti par essay, ka nibandh आदि बोलने को कहा जाता हैं. कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के विद्यार्थियों के लिए हम गांधीजी जयंती के लिए निबंध लेकर आए हैं.

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गांधी जयंती निबंध 2019 – Gandhi Jayanti Essay in Hindi

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भूमिका:- सत्य एवं अहिंसा को मानवता का धर्म मानने वाले गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था. वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बड़े नेताओं में से एक थे. सत्याग्रह, अहिंसा एवं सादा जीवन और स्वच्छता इनके जीवन के मुख्य सिद्धांत थे. एक ऐसे सैद्धांतिक व्यक्ति से ही प्रभावित हुए बंगाली कवि टैगोर ने उन्हें महात्मा की उपाधि दी थी.

सत्य के साथ प्रयोग उनकी आत्मकथा थी. वे हमेशा सत्य की खोज में अपनी भूलों एवं गलतियों पर नयें एक्स्परिमेंट करते थे. अंग्रेजी सत्ता को भारत से बाहिर करने के लिए पहली बार उन्होंने महिलाओं एवं दलितों को आन्दोलन से जोड़ इसे जन आन्दोलन का रूप दिया. उन्होंने कई व्यापक आन्दोलन चलाकर भारत की आजादी के लिए भूमिका तैयार कर दी थी. वे अस्पर्शयता एवं अस्वच्छता के पूर्ण खिलाफी थे.

गांधी जयंती क्यों मनाते हैं– महात्मा गांधी जिनका पूर्ण नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के काठियावाड़ जिले में हुआ था. पोरबन्दर में जन्में गांधी के जन्म दिन को गांधी जयंती के राष्ट्रीय पर्व के रूप में देशभर में मनाते हैं. इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाते हैं, तथा सभी सरकारी संस्थाओं, विद्यालयों में सरकारी अवकाश भी होता हैं.

गांधीजी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने दिल्ली में एक प्रार्थना सभा के दौरान कर दी थी. उनकी समाधि राजघाट में बनी हुई हैं. जहाँ पर इस दिन राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री सभी बड़े पदाधिकारी आकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजली अर्पित करते हैं. इस दिन देश के भर शैक्षणिक संस्थानों एवं सरकारी कार्यालयों में महात्मा गांधी के कार्यों देश के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता तथा उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये जाते हैं.

एक प्रसिद्ध नायककार ने महात्मा गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि आने वाली पीढियां यकीन ही नही करेगी कि भारत में एक समय में ऐसा महान पुरुष हुआ था. सत्य एवं अहिंसा के पुजारी थे, जिन्होंने भारतीय इतिहास के महापुरुषों की अग्रिम पंकित में स्वयं को स्थापित किया था. भारत के राष्ट्रपिता नव भारत के निर्माता एवं भाग्य विधाता थे.

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गांधीजी के पिताजी राजकोट के दीवान थे, उनकी माता का नाम पुतली बाई था जो बेहद धार्मिक महिला थी, जिनकें विचारों का गांधीजी के जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ा. महात्मा गांधी की आरम्भिक शिक्षा पोरबंदर में फिर राजकोट में हुई.

जब वे 18 साल के हुए उन्होंने दसवीं पास कर ली थी तथा वकालत के लिए उन्हें इंग्लैंड भेज दिया गया था. इससे पूर्व इनका विवाह कस्तूरबा गांधी के साथ मात्र तेरह वर्ष की आयु में ही हो चूका था. जब वे इंग्लैंड से वकालत कर घर पहुचे तब तक उनकी माँ पुतली बाई का देहावसान हो चूका था.

जब वे बेरिस्टर की डिग्री लेकर गुजरात लौटे तो उन्हें एक क्लाईट के केस की सुनवाई की सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा. उन्होंने वहां जाकर देखा कि वहां भारतीय लोगों के साथ अंग्रेजों द्वारा रंगभेद चरम पर था. गांधीजी उनका भेदभाव स्वयं भी भुगत चुके थे.

उन्हें एक बार चलती ट्रेन से इसलिए फेक दिया था क्योंकि वे गोरे लोगों के डिब्बे में चढ़ गयें जिनमें काले अर्थात भारतीय लोगों का प्रवेश निषेध था. उन्होंने भारतीय लोगों के लिए न्याय की लड़ाई बड़ी निडरता के साथ लड़ी तथा अन्तः वे इसमें कामयाब भी रहे.

महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट आए यहाँ आकर उन्होंने भारत के लोगों के साथ गोरी सरकार द्वारा किये जा रहे अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाई, उन्होंने किसानों के हक़ के लिए उनके साथ कई आन्दोलन किए. उन्होंने सबसे पहले रोलेट एक्ट का विरोध किया जिनका उन्हें राष्ट्रव्यापी समर्थन भी मिला. जब भारत आजादी की राह पर था तो वे शस्त्र क्रांति की बजाय सत्याग्रह एवं अहिंसा के रास्ते पर चल रहे थे. इस दौरान उन्हें कई बार जेल की यात्रा भी करनी पड़ी थी.

उनके मुख्य आंदोलनों में बिहार का नील सत्याग्रह, दांडी यात्रा, खेड़ा का किसान आन्दोलन महात्मा गांधी के मुख्य सत्याग्रह थे. उन्होंने आम भारतीयों को स्वदेशी अपनाने के लिए संदेश दिया वे खुद चरखा चलाते थे तथा खादी के बने वस्त्र पहना करते थे. वर्ष 1942 में उन्होंने भारत छोड़ों आन्दोलन की शुरुआत की, इन्ही के अथक प्रयासों के फलस्वरूप 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली, आजादी के बाद भारत में रामराज्य की उनकी कल्पना थी, जो शायद आज तक पूरी नही हो पाई हैं.

गांधीजी छुआछुत में विश्वास नही करते थे, उनका सम्पूर्ण जीवन अछूतों के उद्धार, ग्राम सुधार, नारी शिक्षा और हिन्दू मुस्लिम एकता के संघर्ष में ही व्यतीत हुआ. 30 जनवरी 1948 को दिल्ली की प्रार्थना सभा में जाते समय नाथूराम गोडसे ने गांधीजी पर गोलियां चला दी. उन्होंने वही पर हे राम कहते हुए प्राण त्याग दिए इस तरह गांधीजी मर कर भी आज जिन्दा हैं. गांधी जयंती पर निबंध आपकों अच्छा लगा हो तो आगे जरुर शेयर करे.

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