भारत की नदियाँ | Rivers Of India In Hindi

Rivers Of India In Hindi मानसूनी जलवायु के परिपेक्ष्य में भारत की नदियाँ विशेष महत्व रखती है. भारतीय सभ्यता और संस्कृति का विकास इन्ही नदी घाटियों में हुआ था. यहाँ के अधिकांश ऐतिहासिक व धार्मिक नगर भारत की प्रमुख नदियों के किनारे ही बसें है. जल, सिंचाई, जल विद्युत, आंतरिक जल परिवहन, औद्योगिक उपयोग आदि सुविधाओं के कारण भारत के आर्थिक विकास में नदियों का महत्वपूर्ण स्थान है. आज के प्रमुख ओद्योगिक व व्यापारिक केंद्र भी नदियों के किनारे ही विकसित है. भारत की नदियाँ के बारे में Rivers Of India In Hindi में हम विस्तार से उतर व दक्षिण भारत की नदियाँ पढ़ेगे.

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भारत की नदियाँ (Rivers Of India In Hindi)

हमारे भारत देश में गत दशकों में कम वर्षा के कारण जल की कमी होने से नदियों के जल का महत्व व्यापक रूप से बढ़ा है. भारत की नदियाँ अपवाह (प्रवाह मार्ग) के आधार पर निम्न दो भागों में बांटी जा सकती है.

  1. हिमालय की नदियाँ या उत्तर भारत की नदियाँ (rivers of north india)
  2. प्रायद्वीपीय या दक्षिण भारत की नदियाँ (Rivers of Peninsular or South India)
  3. आंतरिक अपवाह वाली नदियाँ (internal or interior drainage)

उत्तर भारत की नदियाँ (north east india rivers)

उत्तर भारत की अधिकांश नदियाँ हिमालय पर्वत से ही निकलती है. ये नदियाँ वर्ष भर बहती है, क्योंकि इनका उद्गम स्थान हिमनद होता है. उत्तर भारत की नदियों को तीन अपवाह क्रमों में बाटां जा सकता है.

  1. सिंधु नदी क्रम
  2. गंगा नदी क्रम
  3. ब्रह्मापुत्र नदी क्रम

सिंधु नदी क्रम (indus river system length origintributaries facts history)

इस नदी क्रम में सिंधु व उसकी सहायक नदियाँ सतलज, व्यास, चिनाव, रावी व झेलम शामिल है. इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग ग्यारह लाख वर्ग किलोमीटर है. जिसमें से सवा तीन लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भारत में तथा शेष पाकिस्तान में चला जाता है. अर्थात इन नदियों का उपरी प्रवाह क्षेत्र हमारे देश में ही है.

इनका निचला प्रवाह क्षेत्र पाकिस्तान में है. सतलज नदी का उद्गम कैलाश पर्वत के दक्षिणी ढालों पर मानसरोवर झील के निकट राक्षसताल से है. इस नदी पर पंजाब में रोपड़ के पास भाखड़ा नांगल बांध बनाया गया है. आगे जाकर सिंधु नदी व्यास में मिल जाती है. झेलम नदी पर प्रसिद्ध पर्यटक नगर श्रीनगर बसा हुआ है. [सिंधु नदी सभ्यता के बारे में यहाँ विस्तार से पढ़े-]

गंगा नदी का अपवाह तंत्र (Ganga river drainage system start to end facts history)

गंगा नदी का उद्गम गंगोत्री हिमनद से है. यह देवप्रयाग में अलकनंदा व भागीरथी जल धाराएं मिलकर गंगानदी बनाती है.यह हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है. गंगा की प्रमुख सहायक यमुना नदी, यमुनोत्री से निकलती है. विध्याचल पर्वत से निकलकर चम्बल, बेतवा, व केन आदि नदियाँ यमुना में मिलती है.

यमुना नदी इलाहबाद के निकट गंगा में मिलती है. जो संगम या प्रयाग के नाम से जाना जाता है. उत्तर से राम गंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी व महानंदा तथा दक्षिण से सोन आदि नदियों को मिलाकर गंगा फरक्का के निकट बांग्लादेश में प्रवेश करती है. बांग्लादेश में गंगा नदी को पद्मा नदी कहा जाता है जो बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले ब्रह्मपुत्र से मिलकर डेल्टा बनाती है. गंगा ब्रह्मपुत्र का डेल्टा ‘सुंदरवन’ विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है.

ब्रह्मपुत्र नदी अपवाह तंत्र (brahmaputra river history origin start to end start to end length)

ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट कैलाश पर्वत से निकलकर पूर्व में बहती हुई हिमालय के पूर्वी छोर तक जाती है. यहाँ इसे सांगपो नदी कहते है. यहाँ से दक्षिण तथा फिर पश्चिम में मुड़कर यह नदी असम में बहती हुई, बांग्लादेश में जाकर गंगा में मिल जाती है. ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ- दिवांग, लोहित आदि इसके विपरीत दिशा में आकर मिलती है.

इसके दाहिने किनारे पर मिलने वाली सहायक नदियाँ भारेली, सबन्सीरी, मानस आदि है. दिवांग, लुहित, कपिली, धनसिरि, बूरी दिहिंग आदि नदियाँ बाएँ किनारे पर आकर मिलती है. ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह में मिट्टी की अधिकता होती है. डेल्टाई भाग में गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियाँ मधुमती, पद्मा, सरस्वती, हुगली, भागीरथी आदि जल धाराओं में बंट जाती है.

दक्षिण भारत की नदियाँ (south Indian rivers in Hindi)

दक्षिणी भारत की नदियाँ ग्रीष्म काल में जल की मात्रा में कमी रहती है. अधिकतर नदियां पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है. यहाँ की अधिकतर नदियाँ बंगाल की खाड़ी में, कुछ अरब सागर में मिल जाती है. दक्षिणी भारत में नदियों को प्रमुखतः दो भागों में बाँट सकते है.

  1. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली (indian rivers falling in bay of bengal)
  2. अरब सागर में गिरने वाली (rivers falling in arabian sea)

बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ (list of rivers fall into bay of bengal)

प्रायद्वीपीय पठार की अधिकांश नदियाँ पश्चिम से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है. यहाँ की प्रमुख नदियाँ दामोदर, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, भीमा, महानदी, तुंगभद्रा व पेन्नार आदि है. इनमें से कुछ नदियों के बारे में जानकारी इस प्रकार है.

कावेरी नदी (Kaveri & Cauvery River facts history starting point cities issue)

कर्नाटक के दुर्ग जिले से निकलती है. कावेरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है. इसका जल कर्नाटक व तमिलनाडु के बिच विवाद का कारण बना हुआ है. कावेरी नदी के डेल्टा से तंजावूर का उपजाऊ जिला बना है, जिसे दक्षिण का उद्यान कहते है.

महानदी (Mahanadi river in hindi its origin tributaries delta flows states & dam)

छतीसगढ़ के रायपुर जिले से निकलती है. इस पर हीराकुंड बाँध बनाया गया है. इसका डेल्टा बहुत उपजाऊ है.

कृष्णा नदी (krishna river in hindi dams flow route origin)

महाबलेश्वर के पास पश्चिम घाट से निकलती है. विजयवाड़ा के पास कृष्णा नदी पर एनिकट बनाकर नहरें निकाली गई है. यह डेल्टा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है.

गोदावरी नदी (godavari river nadi history in hindi)

यह प्रायद्वीप पठार की सबसे बड़ी नदी है. यह नदी पश्चिम घाट में महाराष्ट्र राज्य में नासिक के पास त्रियम्बकम से निकलती है. इसके अंतिम भाग में चौड़ाई अधिक है. यह त्रिकोणाकार डेल्टा बनाती है.

अरब सागर में गिरने वाली भारतीय नदियाँ (arabian sea rivers)

अरब सागर में गिरने वाली नदियों में नर्मदा व ताप्ती प्रमुख है. नर्मदा सबसे लम्बी नदी है. यह अमरकंटक से निकलती है, यह भ्रंश घाटी में बहती है. इसमें जबलपुर के पास भेड़ाघाट की संगमरमर की चट्टानों तथा कपिलधारा प्रपात का द्रश्य बड़ा ही मनोरम है. ताप्ती नदी मध्य प्रदेश के बेतूल जिले से निकलती है. माही लूनी, साबरमती आदि नदियाँ भी अरब सागर में गिरती है.

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