10 lines on Maharaja Suraj Mal in Hindi

Maharaja Suraj Mal history: भरतपुर के जाट राजघराने से सम्बन्ध रखने वाले ह्रदयविराट जाट सम्राट को अपनी देशभक्ति के लिए आज भी बड़े सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है, उनके जीवन व इतिहास से जुड़ी 10 पंक्तियाँ यहाँ दी गई है, जिससे आप उनकी जीवनी को संक्षिप्त में जान सकेगे.

10 lines on Maharaja Suraj Mal In Hindi

1# महाराजा सूरजमल (1707-1763) भरतपुर के प्रसिद्ध शासक थे.

2# इन्ही जाट सम्राट सूरजमल ने भरतपुर शहर की स्थापना की थी.

3# मराठों के पतन के बाद सूरजमल ने गाजियाबाद, रोहतक, झज्जर, आगरा, धौलपुर, मैनपुरी, हाथरस, बनारस, फर्रुखनगर के इलाके को जीतकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया था.

4# सूरजमल ने विदेशी आक्रान्ताओं से उत्तर भारत को बचाने में अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगा दी थी.

5# महाराजा सूरजमल एक बहुमुखी व्यक्ति थे.

6# सूरजमल के पिता का नाम बदनसिंह था, जिन्होंने डींग को अपनी राजधानी बनाया था.

7# जयपुर के उत्तराधिकारी युद्ध में सूरजमल के सहयोग से इश्वरीसिंह विजयी हुए और गद्दी पर बैठे.

8# सूरजमल से पूर्व जाट नेता गोकुल भी औरंगजेब की मन्दिर मूर्ति विध्वंस निति के प्रबल विरोधी रहे. गोकुल के बाद राजाराम ने मुगलों के अत्याचारों का प्रबल विरोध किया तथा सिकन्दरा में स्थित अकबर के मकबरे से बहुमूल्य रत्नों और सोने चांदी के पत्थरों को उखाड़ लिया. राजाराम के बाद चुंडामन ने आजीवन मुगलों से संघर्ष किया.

Maharaja Suraj Mal history In Hindi (महाराजा सूरजमल का इतिहास)

महाराजा सूरजमल भरतपुर के लोकप्रिय शासक थे. इनका जन्म 1707 ई में हुआ था. इनके पिता बदनसिंह ने डींग बसाकर इसे अपनी राजधानी बनाया, जबकि सूरजमल ने भरतपुर शहर की स्थापना की. जयपुर के महाराजा जयसिंह की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी के युद्ध में सूरजमल के सहयोग से इश्वरीसिंह विजयी हुए थे.

मई 1753 ई में सूरजमल ने फिरोजशाह कोटला पर अधिकार कर लिया. मराठों ने जनवरी 1754 से मई 1754 तक भरतपुर के कुम्हेर के किले को घेरे रखा पर वे इस किले को नही जीत पाए और उन्हें संधि करनी पड़ी. पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमदशाह अब्दाली के हाथों करारी हार के बाद शेष मराठा सैनिकों के खाने पीने ईलाज व कपड़ो की व्यवस्था महाराजा सूरजमल ने की.

सूरजमल ने अपने प्रभुत्व क्षेत्र में किले व महल बनवाएं जिनमें लोहागढ़ का किला भी शामिल हैं. मराठों के पतन के बाद सूरजमल ने गाजियाबाद, रोहतक, झज्जर, आगरा, धौलपुर, मैनपुरी, हाथरस, बनारस, फर्रुखनगर इलाके जीत लिए.

इस प्रकार महाराजा सूरजमल एक बहादुर नेता थे तथा उन्होंने अनेक संघर्ष किये और विजय पाई. सूरजमल ने विदेशी आक्रान्ताओं से उत्तर भारत को बचाने में अपनी पूरी कोशिशे लगा दी, वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. वे एक दूरद्रष्टा भी थे. वे मनुष्य का एकमात्र धर्म मानवता में विश्वास करते थे. 25 दिसम्बर 1763 को नवाब न्जीबुद्दोला के साथ युद्ध में शाहदरा दिल्ली में महाराजा सूरजमल वीरगति को प्राप्त हुए, भारत के इतिहास में इनका उल्लेखनीय योगदान है.


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