Dussehra Essay In Hindi And English Language | दशहरा पर निबंध

Dussehra Long Essay In Hindi Language: Dusshera also called Vijayadashami, it is an important festival of India.  before 20 days of Diwali Dussehra celebrated, this Dussehra Essay In Hindi And English helpful for students and kinds. students they read in class 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10. if you searching Dussehra festival Essay long and short length giving the blow.

Dussehra Essay In Hindi And English Language | दशहरा पर निबंध

Dussehra Essay In Hindi And English Language | दशहरा पर निबंध
दशहरा पर निबंध

Dussehra is an important festival of the Hindus. it falls in the month of October. it is celebrated in honor of Rama’s victory over Ravana.

it is celebrated for ten days. in the first nine days, there are dramas. they are based on Ramayana. they tell us that Rama was an obedient son. he kept his word of honor. he was very brave. he was sacrificing. he was a loving brother and good husband.

on the tenth day, a big fair is held. huge effigies are set up. they are of Ravana, his son meghnath and his brother Kumbh  Karan. they made of bamboos and paper. fireworks are kept inside. in the evening a procession comes. it represents Rama, Lakshmana, and their armies.

at sunset, Rama shoots arrows at the effigies. the Dussehra festival has a lesson for us. it shows the victory of goodness over evils.

दशहरा पर निबंध- Dussehra Essay In Hindi

दशहरा हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह अक्टूबर के महीने में मनाया जाता है। यह रावण पर राम की जीत के सम्मान में मनाया जाता है।

यह दस दिनों तक भारतभर में मनाया जाता है। पहले नौ दिनों में, रामायण पर आधारित नाटक होते हैं। वे हमें बताते हैं कि राम एक आज्ञाकारी पुत्र थे वों एक आदर्श पुरुष थे, तथा सभी के साथ उनके रिश्ते आदर्श रूप में राम ने निभाया। राम बड़े साहसी थे। तथा बहादुर वीर योद्धा थे, वो एक अच्छे भाई व पति थे.

दशहरे के दसवें दिन एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है. रावण उसका पुत्र मेघनाथ व भाई कुंभकर्ण के विशाल पुतलें बनाए जाते है. जिन्हें बाँस व कागज से बनाया जाता है, तथा इसके अंदर विस्फोटक सामग्री भरी जाती है. दशहरा की रात को विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है, जिनमें कलाकारों को राम, लक्ष्मण व उनकी सेना के रूप में सजाया जाता है.

रात के समय इन पुतलों में राम द्वारा तीर चलाकर रावण की हत्या की जाती है. बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में दशहरा का नाटक मनाया जाता है.

दशहरा पर निबंध

हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में दशहरा भी एक त्यौहार है. यह आसोज सुदी दशमी को मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है. कि इस दिन भगवान राम ने राक्षसों के राजा रावण को मारकर विजय प्राप्त की थी. इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहते है.

दशहरा शरद ऋतू का एक महत्वपूर्ण त्योहार है. दस दिन पहले से जगह जगह पर रामलीला शुरू होती है. दशमी के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाएं जाते है. इन पुतलों पर फटाखें बांधे जाते है. इससे अनेक प्रकार की आवाजे निकलती है.

इस मौके पर भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की झांकी भी निकलती है. दशहरा पर क्षत्रिय लोग अपने शस्त्रों की पूजा करते है. दशहरा का त्योहार पाप पर पूण्य की और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है. इससे हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है.

दशहरा पर निबंध / Essay on Dussehra in Hindi

हमारे देश भारत में कई त्योहार जैसे होली, दीपावली, रक्षाबंधन, ईद, क्रिसमस, दशहरा आदि त्योहार प्रमुखता से मनाया जाता है. दशहरा आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है, कि इसी दिन भगवान राम ने रावण पर विजय पाई थी, इसलिए इसे विजयदशमी भी कहा जाता है.

इससे पूर्व नौ दिन नवरात्र होते है. इन दिनों जगह जगह रामलीलाएं होती है. दसवें दिन रावण वध की लीला होती है और रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते है. इस प्रकार यह त्योहार अन्याय पर न्याय, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. विजयादशमी मानव जाति का विजय पर्व है.

दशहरा क्यों मनाया जाता है– इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था, इसी उपलक्ष्य में दशहरा मनाया जाता है.

दशहरे को विजयदशमी क्यों कहते है– भगवान राम ने लंका विजय के समय समुद्र तट पर नौ दिन तक भगवती विजया की आराधना की थी. भगवती की कृपा से दुष्ट रावण पर राम ने विजय पाई थी. इसलिए दशहरा को विजयादशमी भी कहा जाता है.

कैसे मनाया जाता है दशहरा का त्योहार– वर्तमान समय में अपने पारंपरिक रीती रिवाजों के अलावा जगह-जगह मेले आयोजित किये जाते है. जिसमें राम और रावण से जुडी हुई झांकिय होती है. शाम के समय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है.

दशहरा पर रावण का पुतला क्यों जलाया जाता है– दशहरे पर प्रतिवर्ष रावण के पुतले जलते हुए देखकर हमारे मन में यह बात दृढ़ हो जाती है कि अत्याचारी का न केवल अंत बुरा होता है, बल्कि आने वाली पीढियाँ भी उनके कुकृत्यों को कभी क्षमा नही करती है.

विजयादशमी (दशहरा) की रामलीला– रामलीला में श्रीराम के जन्म का, सीता- स्वयंवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद, सीता हरण, हनुमान द्वारा लंका दहन, लक्ष्मण मेघनाद युद्ध और रावण वध आदि कथा प्रसंगों का प्रदर्शन होता है.

दशहरा की कथा– विजयादशमी को लेकर ऐसी पौराणिक कथा है कि समुद्रतट पर राम ने नौ दिन तक भगवती विजया की उपासना की थी. दसवें दिन रावण पर विजय पाई थी. ऐसी कथा भी है कि इसी दिन पांडवों ने अन्यायी कौरवों पर विजय पाई थी. इसी तिथि पर देवताओं के राजा इंद्र ने वृत्रासुर नामक दैत्यराज को हराया था. दशमी तिथि को विजय नामक मुहूर्त होता हैं, जो सभी कार्यों में सिद्धिदायक होता है.

दशहरा का महत्व– विजयादशमी के दिन ही श्रीराम ने अन्यायी और दुष्ट रावण पर विजय पाई थी. कौरवों पर पांडवों को और वृत्रासुर दैत्य पर देवराज इंद्र को विजय मिली थी. इस प्रकार इस त्योहार से अन्याय पर न्याय की, असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की विजय की सीख मिलती है. जो कोई अत्याचार या कुकृत्य करता है, उसका विनाश अवश्य होता है. इसलिए हमें भी बुरे कार्यों से दूर रहना चाहिए.

शमी वृक्ष की पूजा- दशहरे के दिन शमी अर्थात खेजड़ी के वृक्ष की पूजा की जाती है. इसके पीछे लोगो की धारणा यह है, कि शमी वृक्ष की पूजा से द्रढ़ता और तेजस्विता प्राप्त होती है.

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