बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय निबंध Short Essay On bina vichare jo kare so pache pachtaye In Hindi

बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय निबंध Short Essay On bina vichare jo kare so pache pachtaye In Hindi: आज हम एक महत्वपूर्ण दोहे और कहावत (बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय) पर आधारित निबंध स्पीच अनुच्छेद लिखने जा रहे हैं. स्कूल स्टूडेंट्स इस निबंध की मदद से बिना विचारें जो करे, सो पाछे पछताय। काम बिगारै आपनो, जग में होत हसाय पर विस्तृत निबंध रचना कर सकते हैं.

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बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय निबंध Short Essay On bina vichare jo kare so pache pachtaye In Hindi

कवि गिरधर हिंदी के बड़े कवि रहे है जिन्होंने अपने विचारों को कुंडलियों के रूप में कलमबद्ध किया. सरल भाषा में लिखी गिरधर की कुंडलियाँ जीवन का नीति सार और गूढ़ अर्थ प्रस्तुत करती हैं. बिना बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय उनकी यह पंक्ति आज का जीवन सत्य हैं. यह प्रत्येक इन्सान को महान सीख प्रदान करती हैं.

गिरधर अपनी इस कुंडली के माध्यम से कहते है कि बुद्धि एवं विवेक सपन्न मानव को किसी की देखादेखी अथवा कहने पर करने की बजाय प्रत्येक कर्म को सोच समझकर ही करना चाहिए. जो इंसान अपने कार्य को बस करने भर के लिए सोच विचार नहीं करता हैं उसका काज बिगड़ जाता है तथा वह उपहास का पात्र बनकर रह जाता हैं.

अपना काम बिगड़ने से खिन्न मन पर लोगों के आक्षेप सहन करना बड़ा मुश्किल होता हैं. उसे हर समय अपनी विफलता पर घुटन महसूस होने लगती हैं इसलिए किसी कार्य के विपरीत परिणामों तथा उससे होने वाली मानसिक वेदना से बचने का सरल सा उपाय यह है कि हम जो कुछ करे उसे सोच समझकर ही करे.

अंग्रेजी की एक मशहूर कहावत है जिसका हिंदी में अर्थ यह है कि कुछ भी करने अथवा कहने से पूर्व सोचो. यह बुद्धिमान इंसान की निशानी होती हैं. एक समझदार व्यक्ति कोई काम करने से पहले सोचता है जबकि इसके विपरीत एक मुर्ख व्यक्ति काम करने के बाद उसके परिणाम देखकर सोचता है तथा पछताता हैं.

कई बार बिना सोच विचार कर कहे वचन आफत की पुड़ियाँ बन जाते हैं. मनुष्य की अधिकतर समस्याओं की जड़ उसकी अनियंत्रित वाणी तथा अविवेकपूर्ण किये गये कर्म होते हैं. जिसके नतीजे में उनके मन को पीड़ा तथा दिल को कष्ट के सिवाय कुछ भी अर्जित नहीं होता हैं.

मनुष्यता और पशुत्व में मौलिक अंतर इतना भर है कि काम तो दोनों करते है मगर इंसान सोच समझकर एक योजना के साथ कार्य की तरफ हाथ बढ़ाता हैं वही एक पशु अथवा मुर्ख आदि पहले काम को अंजाम तक पहुचाता हैं इसके पश्चात उसके लाभ हानि हित अहित के पहलुओं का विश्लेषण करता हैं, जबकि उस समय इन बातों का कोई महत्व नहीं रह जाता हैं.

जीवन में हम ऐसे लोगों को भी देखते है जो केवल इसलिए किसी काम में लग जाते है क्योंकि उसका दोस्त, पड़ोसी अथवा दुश्मन भी वह कार्य कर रहा हैं. या फिर सारे लोग उस कार्य की ओर प्रवृत्त हैं. तैसे वैसे वह उस कार्य को पूरा तो कर लेता है मगर बाद में जब परिणाम समक्ष आते है तो उनके पास पछताने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचता हैं.

आज के युग में विचार को उतना मूल्य नहीं दिया जाता हैं जितना कि ट्रेंड को. बिजनेस में इन्वेस्ट करना हो या कोई डिग्री या डिप्लोमा लेना हो या करियर की प्लानिंग अमूमन हम जो अधिकतर लोग करते है या किसी के कहने पर उस दिशा में प्रवृत्त हो जाते हैं. हमने न कुछ आगे की सोची न अतीत की.

ऐसे हालातों में एक अनजान भीड़ का मुसाफिर बनकर आधे सफर ही रास्ता छोड़ना पड़ता हैं. अमुक कार्य को करने से पूर्व बिलकुल भी सोच विचार न करने के कारण वह सर्वाधिक कीमती वस्तु अपना समय यूँ ही बर्बाद कर देते हैं तथा फिर से एक नई दिशा में नई दौड़ की तैयारी करनी पड़ती हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि चाहे आप विद्यार्थी हो या बिजनेस मैंन या स्कोलर किसी भी कार्य को करने से पूर्व अच्छी तरह सोच विचार कर लेना अपने आप में आधी सफलता अर्जित कर लेने जितना अहम हैं यदि हम सोच विचार कर काम नहीं करेगे तो पछताने के सिवाय हमारे पास कोई काम नहीं बचेगा.

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