मजदूर पर शायरी Mazdoor Shayari In Hindi

मजदूर पर शायरी Mazdoor Shayari In Hindi: Labour Day Shayari, Wishes, Messages, Sms, Quotes & Status in Hindi for Facebook & Whatsapp Labour Day Wishes Images मजदूर दिवस की शायरी स्टेटस और मजदूर पर कविता आप इस लेख में पा सकते हैं. दोस्तों किसी भी देश की तरक्की में उनके मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान होता है उनके जीवन को हम इन शेरो शायरी की पंक्तियों से समझने का प्रयास करेंगे. हम उम्मीद करते हैं लेबर शायरी इन हिंदी का यह कलेक्शन आपकों पसंद आएगा.

मजदूर पर शायरी Mazdoor Shayari In Hindi

Mazdoor Shayari In Hindi

दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करता हूँ
साहाब वरना सोच तो हमारी भी bmw वाली है।


गधो खा रहे चमनप्राश ,
ओर मजदूरों को मिल रही है घास।


माना कि पढ़े लिखों में काबिलियत होती है
कुछ ऊँचा करने को मगर मजदूर की काबिलियत पर
ज़रा सा भी शक मत करना , उस ऊंचाई
तक पहुचने वाला वो पहला इंसान वही होता है ।


दोनों मजदूर चल पड़े थे अपने अपने काम पर …
एक गम्छा डालकर दूसरा लैपटॉप टांगकर ।।
गम्छा वाला अढ़ाई सौ कमा के तो घर पहुच गया 6 बजे ही…
लैपटॉप वाले 40 हज़ार के लिए रात तक घसना अभी बाकी है ।


Aashiyana humra aaj Tak naa Mila.
Galtfehmi me kuch pal guzar liye khusi ke kahi.
Lekin jab aankhe khuli yekin tab aaya ki
Humra aashiyana toh aa bhi laapata hi hai…


मज़दूरी दुनिया वालो के लिए होती है,
और फ़र्ज़ मा-बाप के लिए🙏


मजदूर हूं पर मजबूर नही कि
अपने अरमानों को पूरा न कर सकूँ


मजदूर शायरी

ईंटों को बोज थोड़ा ओर बड़ा दो साहब
आज बच्चों ने खिलोने की ज़िद की हे


अक्सर वो मजदूर बन जाता है,
अपने बच्चोंन के ख्यायिशोंन के लिये,
उसे बाप कहा करते हैं।


मजदूरी अता करता जाता है गालियाँ देकर साहूकार,
हर मजदूर के हिस्से में अशर्फी नही होती🤔


Hum ye ab tak nahi Jaan paye…
Hum majbur hai isliye majdur hai..
Ya…
Hum majdur hai isliye majbur hai.


किसी को इज़्ज़-ओ-नाज़,किसी को नाम चाहिए,
मैं मजदूर हूँ साहब मुझे पेट के लिए काम चाहिए।


Majbur nahi main majdur..
Hu Ghar sambhalta Ha kushiya bhi
bat ta hu joker nahi main majdur Hu…
kudka Kamata hu aur khwab pure karta hu
aapke jaisa hi aam insan hu maff
karo aam rehta to majdur nahi hota ,


कुछ को मजबूर बना देती है ओर कुछ को
मजदूर ये जिन्दगी भी बहुत जुल्म करती हैं 😑


अमीर तो तब बनते हैं साहब जब
आप मज़दूर का फायदा उठाते है।


zindagi “majdoor” huye ja rhi h…..
aur log “saheb” kah k taana marte h…..


Best मजदूर Quotes, Status, Shayari, Poetry

मजबूर है हम अपनी परिस्थिति से,
नही तो इस्थिति तो हमारी भी अच्छी थी।


किसी और का ख़रीदा है, मैंने तो सिर्फ़ बोझ है उठाया
मैं एक मजदूर हूँ साहिब, मैंने भला इतना कब कमाया


उसने यह कह कर साथ छोड़ दिया
मेरा बस मजबूर, हूँ मैं. ।।।


हमारी मजदूरी को भी कोई सलाम करलो हम
जेसीबी के ड्राइवर को देख कर दिन निकाल देते है


दूसरों की खुशियों का ठेका लेकर,
हम अपनी खुशियों को मजदूर बना बैठे।


अगर इस जहाँ में मजदूर का न नामों निशाँ होता
फिर न होता हवामहल और न ही ताजमहल होता


मजदूर दिवस पर शेर शायरी, स्टेटस, कोट्स, कविता | श्रमिक दिवस पर शायरी | Labour Day Shayari, Status, Quotes, Poetry & Thoughts | Shayari On Workers Day

मशीन को भले ही अहमियत देती हो ये दुनिया,
लेकिन ये न भूले की मशीन को चलाता और बनाता है मजदूर।


धूप में जल कर तुम्हे छाँव देता है,
ख़ुशी के बहुत से पल हमें मजदूर देता है।


मजबूर हे इसी लिए मजदूर हैं…!


जी हाँ साहेब मैं मजदूर हु,वक़्त,हालातों,परिस्थियों से मजबूर हु।।
दो जून की रोटी को तरसता मेरा परिवार,घर मे जवान बेटी,
बूढ़ी माँ लाचार।। बेटा छोटा कुपोषण का शिकार,
मेहनत मज़दूरी मेरा संसार,।।
शिक्षा,स्वास्थ्य,घर बार से गवार,मालिक के शोषण का शिकार।।
न जाने कब आएगा वक़्त ऐसा,जब मेरी जेब मे भी होगा थोड़ा पैसा।।
जी हाँ साहेब मैं मजदूर हु,वक़्त, हालातों,परिस्थियों,से मजबूर हु।।


मेने मजदूरी कि उसके सब ख्वाब पूरे करने के लीये ।
ओर वो आज कह रहा हैं आप ने किया क्या हैं मेरे लिए ।


उसने कहा अब ओर क्या दोंगे ।
मेने मुस्कुरा के कहा मजदूर हु अब ओर क्या लोगे ।


ये मजबूर दिल तेरी मजदूरी कर कर के थक चुका है,
अब बस इंतज़ार है उस पल का जब तू मेरा मेहनताना चुकाये !❤️
ये मजबूर दिल तेरी मजदूरी कर कर के थक चुका है,
अब बस यही दुआ है मेरी तेरी इस बंदुआ मजदूरी से राहत मिले मुझको 🖤


Mazdoor Shayari | मजदूर शायरी

ऐ जिन्दगी इतना भी ना थका !!
मजबूर हु मजदूर नही !!


दूनिया का काम करता हूं; खुशियां बच्चों के नाम करता हूं।
चोरी नहीं करता गरीब तो जरूर हूं।घर में तो राजा हूं; बाहर मजदूर हूं।


जो बहोत “मजबूर” होता है,
वो ही “मजदूर” बनता है ।


किसी और का ख़रीदा है, मैंने तो सिर्फ़ बोझ है उठाया
मैं एक मजदूर हूँ साहिब, मैंने भला इतना कब कमाया


मजदूर को खोदना , और बाप को *****।
नहीं सीखना चाहिए ।।😂


पास होके भी अपनो से दूर बना देती है।
पैसों की चाहत मज़दूर बना देती है
mazdoor par shayari


पगार तो नही बढ़ा सकते बाबू साहब, फिर बोझ ही बढ़ा दो,
आज मेरे लाड़ले ने खिलौने की मांग की है।
majdur shayari


सस्ते महंगे सभी काम परिवार के खातिर कर लेता है,
वो मजदूर है जो परिवार के खातिर अपने घाव पर मिटटी रगड़ लेता है।
mazdoor diwas shayari


कोई मजबूर है इस लिए मजदूर है और,
कोई मजदूर है इस लिए मजबूर है!
shayari on mazdoor


उसकी ख़ता बस ये है साहब की वो अपने पसीनें की
कमाई खाता है, दुनिया तो उसे मजदूर बुलाएगी ही!
mazdoor ki shayari


मजदूर स्टेटस शायरी इन हिंदी

यहां हर कोई मजदूर है,
कोई मग्रूर तो कोई मजबूर है!


धूप में जल कर तुम्हे छाँव देता है,
ख़ुशी के बहुत से पल हमें मजदूर देता है।


अरे सूरज जरा कम कर अपने अहँकार के ताप को !
वो मज़दूर हैं इसलिये मजबूर है बाहर निकलने को !


मजबुर हूँ इसलिए मजदूर हूँ अगर दो किताब
पढ़ा होता तो मैं भी अफसर होता।


मजदूर का पसीना सुख ने से पहले उसे
उसकी मज़दूरी मिल जानी चाहिए.


जिंदगी में मजदूर 💪बनना सही है,,
लेकिन मजबूर बनना गलत है।🤑


क्या जायज़ हैं यह फैसला करना, कौन कितना खुश हैं यहां ?
आखिर हैं तो हम सब , कहीं न कहीं,
अपनी अपनी ज़िंदगियों के मजदूर ही जो
खटे जा रहें निरंतर कुछ न कुछ पाने के लिए ।


सुबह निकल पड़ा था हर ‘मजदूर’ दिहाड़ी पर,
किसी के कंधे पे गमछा तो किसी के कंधे पर लैपटॉप।।


जिंदगी की उलझनों में मसरुर हूं
नहीं जानता मैं मजदूर हूं या मजबूर हूं


दुनिया के मज़दूरों एक हो जाओ और अपने पैरों की बेड़ियों को तोड़ दो ,
तुम्हारे पास खोने को कुछ नही है , पाने के लिए सारी दुनिया है


लिए जा रही तू हर रोज़ एक नई इम्तेहान मेरी,
ढोए जा रहे बोझ मुसलसल हम तेरे दिए हर अनचाहे फैसलों की …..
अब तो बता दे कब दे रही मजदूरी तू , अपने इस मजदूर की ।


मजदूरी खुदा का करम है गर अगर हमारे अबू आमा ने
किसी रात को मजदूरी न की होती तो आज रात को हम ना होते।


ये बड़े-बड़े गुंबद बड़ी-बड़ी इमारतें जो राजघराने के कसीदे हैं
गर मजदूर ना होते तो यह दुनिया इतनी खूबसूरत ना होती।


वो मजदूर है अपने बच्चो के भविष्य के लिऐ, वो मजदुर है
अपनी बेटी की शादी के लिऐ वो मजदूर है अपनी पत्नी के सिंदूर के खातिर ,
वो मजदूर है अपने माँ-बाबा की साख के लिऐ वो मजबूर है इसलिये मजदूर नहीं हैं


मजदूर ही तो होते हैं वो मां बाप जो अपने
बच्चो को पालने के लिए पूरा शहर निहार आते हैं😔


कुछ वक्त मजबूरी मैं
मजदूर बना देता है ।
कुछ उम्र से छोटे बच्चों को
हालात बड़ा कर देता है ।


बना के हमारे सरो के ऊपर छत उसने,
सूरज का साया अपने सर ले लिया 🙂
दे गया अपनी मेहनत से आलीशान महल हमको
बारिश मे भीगने के लिए उसने टूटा घर ले लिया


यातनाओं और कड़ी मेहनत से ना डरने वाला बच्चों से डर गया..
एक शाम जब एक मज़दूर ख़ाली हाथ घर गया ।।

मजदूर के लिए शायरी दो लाइन इमोशनल

मजदूर को मजदूर का पसीना शुख नेसे
पहले उसकी मजदूरी देदी जाए 🙏


उस मज़दूर का ही कोई घर नहि नहि
जिसने सब के घर बनाए


मजदूर हूँ मजबूर नही. मजबूत हूँ चूर नहीं ।
मेहनत में रखते है यकीन साहिब वरना हमें कोई फजूली गरूर नहीं


अमीर छोटे ख्वाबों से परे है, क्यूँ की वह मगरूर है
गरीब बड़े ख्वाबों से परे हैं, क्यूँ की वह मजदूर हैं


ज़िंदगी मजदूर हुई जा रही हैं और लोग
इंजिनीयर साब कह के ताने मार रहे हैं . .


एकसाथ दो किरदार निभाता हूँ।
बनाकर औरों का , घर अपना चलता हूँ
हूँ मैं , साहब
पर जग मैं मजदूर कहलाता हूँ।


आरामतलबी की जिंदगी से कोसों दूर हूँ…..
हाँ मैं एक मेहनतकश मजदूर हूँ….
जला नहीं मैं धूप में हिला नहीं मैं धूप में….
आदतों से अपनी मजबूर हूँ …
हाँ मैं एक मेहनतकश मजदूर हूँ


राजकुमारी की तरह लाड़ लड़ाती हे वो अपनी बेटी को,
माना कि मजदुर हे लेकिन माँ तो हे।


वो तपती धूप मे निकल जाता है ,पैरों मे छाले तो होंगे,
वो दो वक़्त की रोटी के लिए कहीं भी चले जाता है..


दुनिया में रहता हूं
फिर भी हूँ
दुनिया से दूर
क्यूंकि वर्ग मेरा है मज़दूर
सब मशीन को देते हैं इज़्ज़त
जो सबके ज़हन में बसा है
किसको है फुर्सत
कि वो देखे मेरी मजबूरी
दिन रात कैसे करता हूं मज़दूरी


दुनियां में बादशाह बने फिरते हैं,
पर लोगों की फरमाइशों में दबे मजदूर ही तो हैं।।


वो एक नवाब शौक रखने वाला आज
परिवार के कारण मजदूर बन गया🍃


ज़िन्दगी के सफर में
हर कोई है मजदूर यहां
कोई दो वक्त की रोटी के लिए
मजदूरी कर रहा है,
तोह कोई अनगिनत चाहतो के लिए…


तप्ती धूप ने शरीर का रंग ही बदल दिया
चीज़ों के बोझ ने कंधों को ही झुका दिया
फिर भी हर सवेरे काम पे निकल पड़ता हूँ मजबूर हूं
मे मजदूर हूँ हर रोज़ कमाता हूं हर रोज़ खाता हूं गर न मिले काम किसी दिन
भूखे पेठ ही सो जाता हूं


दूर खड़े कुछ लोग मुझे
मजदूर समझ बैठें।
पास जाने पर
साहब कहने लगे।


में मालिक, तुम मजदूर हो,ये फर्क मिट जाएगा,
जब अपना कर्म समज कर सब एक हो के देश के लिये अपना धर्म बजायेंगे।


सभी शिकायतें कर रहें सियासत से कि उनका कसूर है।
वो चुप था बस काम कर रहा मजबूर था कि वो मजदूर हैं।।


लूटकर मजदूरों की बरसों की मेहनत,
कहते हो बरसेगी खुदाई देख लेना


मजदूर हूँ मजबूर नहीं
बेबाक हूँ बाईमान नहीं बदन तपा कर,
बोझ उठा कर भी रखी ऐसी नींव
जिसने ना जाने कितनो को दी सुकून की नींद


उम्मीद का झोला लिए चलता है,दो वक़्त की,
ईमानदारी की, खा के जो जी ले,वहीं है मजदूर।।


मजबूरी का सफर इंसान को कई बार मजदूरी तक ले जाता है..


दो रोटी और आधी सब्जी बयान
करती है एक मजदूर कि कहानी।


कभी ख्वाहिश थी बच्चों की, कभी घर की जरूरत थी..
इन हालात के ही कारण वो मजबूर हो गया..
बढ़ती रही ज़िम्मेदारीयां कंधों पर उसकी, बोझ तले जिनके वो मजदूर हो गया..
रिश्ते उसके भी थे कई, पिता था, पति था, भाई था, बेटा था..
पर इस दुनिया में वो मजदूरी के नाते ही मशहूर हो गया..


वो भी मजदूर ही है,
जो लाखों कमाकर भी घर खुश नहीं लौटता ।


धूप की तपन ने शरीर का रंग बदल दिया
बच्चों की ख्वाहिश पूरी करनी थी उसने
कंधों को झुका दिया….. था तो मे भी
इंसान लेकिन इस पेट ने मजदूर बना दिया

यह भी पढ़े

उम्मीद करता हूँ दोस्तों आपकों मजदूर पर शायरी Mazdoor Shayari In Hindi का यह आर्टिकल पसंद आया होगा, यदि आपकों मजदूर शायरी का लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *