महाराणा प्रताप पर दस पंक्तियाँ 10 Lines On Maharana Pratap In Hindi

महाराणा प्रताप पर दस पंक्तियाँ 10 Lines On Maharana Pratap In Hindi: राणा प्रताप हिस्ट्री इन हिंदी पर आधारित 10 लाइन मेवाड़ के सपूत महाराणा प्रताप के जीवन पर आधारित यह छोटा निबंध के रूप में स्टूडेंट्स उपयोग कर सकते है.

10 Lines On Maharana Pratap In Hindi

महाराणा प्रताप पर दस पंक्तियाँ 10 Lines On Maharana Pratap In Hindi

1# महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ़ में हुआ तथा मृत्यु 19 जनवरी 1597 को चावंड में हुई.


2# 28 फरवरी 1572 ई को महाराणा प्रताप का राज्यारोहण हुआ था.


3# महाराणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की और जीवनभर उनके विरुद्ध संघर्ष किया, विशेषकर अकबर के साथ.


4# स्वतंत्रता एवं सार्वभौमिकता के लिए संघर्ष के साथ साथ महाराणा प्रताप का विविध अन्य क्षेत्रों में भी पर्याप्त योगदान रहा.


5# प्रताप ने युद्धों में दिवंगत वीरों के उत्तराधिकारियों के पुर्नवास के लिए अपूर्व प्रयास कर मानवाधिकारों के संरक्षण का आदर्श स्थापित किया.


6# प्रताप ने राष्ट्रप्रेम, सर्वधर्म सद्भाव, सहिष्णुता, करुणा, स्वाधीनता के लिए युद्ध, नीतिगत आदर्शों की पालना, मानवाधिकारों की सुरक्षा, स्त्री सम्मान, पर्यावरण एवं जल संरक्षण सर्वसामान्य को आदर तथा साहित्य एवं संस्कृति के प्रति सम्मान में बहुत योगदान दिया.


7# महाराणा प्रताप सभी धर्मों का आदर करते थे यह उनके व्यक्तित्व की अनूठी विशेषता थी, हाकिम खां सूरी उनके सेनापति, भामाशाह उनके प्रधानमंत्री बनाया था.


8# राणा प्रताप ने ने विश्ववल्लभ और व्यवहार आदर्श इन दो ग्रथों की रचना करवाई.


9# देश की सम्रद्धि बनाए रखने के लिए प्रताप ने धातुओं की खदानों की सुरक्षा की ओर प्रमुखता से ध्यान दिया.


10# राणा प्रताप की समाधि चावंड के निकट बान्डोली गाँव में हैं.

महाराणा प्रताप के इतिहास पर कुछ पंक्तियाँ Few Lines On Maharana Pratap History In Hindi

प्रताप सिंह (महाराणा प्रताप) बचपन से ही बहादुर और साहसी थे। दरबारियों और जनता दोनों को उसके गुणों पर गर्व था। उन्होंने अपने जीवन में बहुत पहले ही घुड़सवारी, हथियार और युद्ध की रणनीति की कला में महारत हासिल कर ली थी।

प्रताप सिंह (महाराणा प्रताप) की शादी 17 साल की उम्र में हुई थी। उनकी पहली पत्नी अजबदे ​​पंवार थीं। १९५९ में उन्हें अपने पहले बेटे, अमर सिंह का जन्म हुआ था।

1567 में प्रताप सिंह (महाराणा प्रताप) केवल 27 वर्ष के थे जब मुगल सेना ने चित्तौड़ पर कब्जा कर लिया था। पूरा शाही परिवार गोगुन्दा के लिए रवाना हो गया। प्रताप मुगल से लड़ना चाहता थे लेकिन बड़ों ने किसी तरह उसे ऐसा न करने के लिए मना लिया।

जब 1572 में उदय सिंह द्वितीय की मृत्यु हुई, तो उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले अपने पुत्र जगमल को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। शाही दरबारियों और वरिष्ठ रईसों ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने प्रताप सिंह को गोगुन्दा में अगले महाराणा के रूप में ताज पहनाया।

महाराणा प्रताप ने कभी भी अकबर को भारत के राजा के रूप में स्वीकार नहीं किया। इसलिए अकबर ने मेवाड़ पर कब्जा करने का फैसला किया। 

उसने चित्तौड़गढ़ पर विजय प्राप्त करने के लिए अपनी सेना के जनरल, जयपुर के राजा मान सिंह को भेजा। मान सिंह के पास महाराणा प्रताप से भी बड़ी सेना थी। महाराणा की सेना संकरी हल्दीघाटी दर्रे पर मुगल सेना की प्रतीक्षा कर रही थी। यह गोगुन्दा का एकमात्र मार्ग था।

लड़ाई 18 जून 576 को लड़ी गई थी। महाराणा प्रताप और उनकी सेना ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। प्रताप और उनका पसंदीदा घोड़ा चेतक घायल हो गए। महाराणा के आदमियों ने उन्हें युद्ध का मैदान छोड़ने के लिए मजबूर किया। 

मुगल सेना ने भी पहाड़ियों में न लड़ने का निश्चय किया। भामाशाह की सहायता से महाराणा प्रताप ने अपनी सेना का पुनर्गठन किया। उसने मेवाड़ के अधिकांश खोए हुए क्षेत्रों पर पुनः अधिकार कर लिया।

29 जनवरी 1597 को 57 वर्ष की आयु में चावंड में एक शिकार दुर्घटना में लगी चोटों के कारण महाराणा प्रताप की मृत्यु हो गई।

प्रताप गौरव केंद्र को महाराणा प्रताप के पौराणिक जीवन को गौरवान्वित करने के लिए उदयपुर में खूबसूरती से बनाया गया है। लोग वहां जा सकते हैं और इसे मुफ्त में देख सकते हैं।

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