अचलगढ़ के किले का इतिहास | Achalgarh Fort History In Hindi

अचलगढ़ के किले का इतिहास | Achalgarh Fort History In Hindi राजस्थान एक अन्य प्रसिद्ध दुर्ग है जो सिरोही जिले के माउंट आबू के पास स्थित हैं. माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन भी हैं. यहाँ के जैन मंदिर व दर्शनीय स्थल हैं गुरुशिखर यहाँ की सबसे ऊँची पर्वत चोटी हैं. अचल गढ़ का किला देलवाड़ा के जैन मन्दिरों से 8 किमी की दूरी पर स्थित हैं.

अचलगढ़ के किले का इतिहास | Achalgarh Fort History In Hindi

अचलगढ़ के किले का इतिहास Achalgarh Fort History In Hindi

अचलगढ़ का किला आबू से 13 किमी दूर अरावली पर्वतमाला की चोटी पर अवस्थित हैं. आबू का पुराना किला परमार शासकों द्वारा बनवाया गया था. इसी प्राचीन किले के भग्नावशेष पर 1452 ई में महाराणा कुम्भा ने अचलगढ़ का निर्माण करवाया.

इसके निर्माण का उद्देश्य मेवाड़ को गुजरात के सम्भावित आक्रमणों से सुरक्षित करना था. गुजरात के सुल्तान कुतुबशाह और महमूद बेगडा का भी कुछ समय के लिए अचलगढ़ पर अधिकार रहा, जिन्होंने किले के प्राचीन देव प्रतिमाओं को नष्ट किया.

किले की प्राचीर में हनुमानपोल और गणेशपोल दो बाह्य प्रवेश द्वार हैं. जिन पर हनुमान और गणेश की प्रतिमाएं प्रतिस्थापित हैं. इनके पास कफूर सागर जलाशय हैं.

किले के अन्य प्रवेश द्वार द्वारा चम्पापोल और भैरवपोल हैं, जिसमें प्रवेश करने पर किले का भीतर द्रश्य दिखाई देता हैं. किले के अंदर कुम्भा के राजप्रसाद , उनकी ओखा रानी का महल, अनाज के कोठे, सैनिकों के आवास गृह, पानी के विशाल टाँके, सावन भादों की झील, परमारों द्वारा निर्मित खतरे की सूचना देने वाली बुर्ज आदि के भग्नावशेष विद्यमान हैं.

किले में ऋषभदेव और पार्श्वनाथ के दो जैन मंदिर एवं कुम्भा द्वारा निर्मित कुम्भस्वामी का मंदिर भी दर्शनीय हैं.

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अचलगढ़ गिरी दुर्ग का इतिहास achalgarh fort history in hindi

अचलगढ़ का यह दुर्ग पहाड़ी अथवा गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता हैं. ९०० ई के आस-पास इसका निर्माण परमार शासकों द्वारा करवाया गया था. कहा जाता हैं कि गुजरात के परमार शासकों के आराध्य अचलेश्वर महादेव थे, इसकी वजह से इस किले का नाम भी अचलगढ़ रखा गया था.

नौवी दसवीं शताब्दी में माउंट आबू मालवा के परमारों की राजधानी हुआ करता था. इस दुर्ग के सम्बन्ध में मान्यता है कि इसमें भगवान् शिव के निशान बने हुए हैं. यहाँ से एक शिलालेख भी प्राप्त हुआ है जिनमें परमार शासकों के इतिहास की जानकारी मिलती हैं. इस दुर्ग के पास ही काशीनाथ का जैन मंदिर भी हैं.

अचलगढ़ क़िले की वास्तुकला 

अचल गढ़ किले का जो पहला द्वार है उसे हनुमान पॉल कहा जाता है और यह हनुमान पोल निचले किले के प्रवेश द्वार के तौर पर काम करता है। इसमें दो ऐसे टावर शामिल है जिनका निर्माण ग्रेनाइट के बड़े ब्लॉक के द्वारा किया गया है  जब चढ़ाई करके आप थोड़ा सा आगे बढ़ते हैं तब आपको इस किले का दूसरा द्वार दिखाई पड़ता है जिसका नाम चंपा पोल है।

अचलगढ़ क़िला माउंट आबू खुलने और बंद होने का समय 

अगर कोई सैलानी यहां पर घूमने के लिए आने वाला है तो उसे बता दे कि यहां पर घूमने का समय सुबह 10:00 बजे से लेकर के शाम को 5:00 बजे तक तय किया गया है क्योंकि प्रशासन के आदेश के अनुसार अचलगढ़ किला सुबह 10:00 बजे से लेकर के शाम को 5:00 बजे तक खुला रहता है। इस बीच पर्यटक किले को घूम सकते हैं।

प्रवेश शुल्क 

इस किले की मुख्य बात यह है कि सैलानियों से किले को घूमने के लिए किसी भी प्रकार की फीस या फिर कोई भी चार्ज नहीं लिया जाता है, क्योंकि गवर्नमेंट के आदेश के अनुसार देशी और विदेशी पर्यटको के लिए किला मुफ्त में घूमने के लिए ओपन किया जाता है।

यात्रा के लिए टिप्स 

अगर आप फोटोग्राफी करने का शौक रखते हैं तो बता दे कि आप अचल गढ़ किले में मौजूद जैन मंदिर की फोटोग्राफी नहीं कर सकते हैं क्योंकि जैन मंदिर की फोटो लेना यहां पर मना किया गया है।

जब आप किला घूमने के लिए आए तब आप ऐसे जूते पहने जो आरामदायक हो क्योंकि कुछ मंदिरों को घूमने के लिए आपको पैदल चलना पड़ सकता है।

अगर आप गर्मी के मौसम में यहां पर आते हैं तो अपने आप को गर्मी से बचाने के लिए आपको अपने साथ छाता अवश्य लेकर के आना है साथ ही आप को हल्के सूती कपड़े पहन कर के आने हैं।

किले में घूमने के दरमियान आपको अपने साथ पानी की बोतल भी अवश्य रखनी है, ताकि प्यास लगने पर आप पानी का सेवन कर सकें।

अचलगढ़ क़िले में आप यह कर सकते हैं 

  • यहां पर आने के पश्चात आप अचलेश्वर महादेव का मंदिर घूम सकते हैं जो कि काफी अट्रैक्टिव है।
  • इसके साथ ही आपको यहां पर पांच धातुओं से बनाई गई नंदी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का मौका भी मिलता है।
  • अचल गढ़ किले में कुछ ऐसे जैन मंदिर मौजूद है जो 500 साल से भी अधिक पुराने हैं, आप उन मंदिरों को घूम सकते हैं, साथ ही स्फटिक आर्किटेक्चर के बारे में भी जान सकते हैं।
  • किले की चोटी पर काली माता का बहुत ही विशाल मंदिर मौजूद है, आप उस मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।
  • यहां पर मंदाकिनी झील भी मौजूद है, उसे भी आप देख सकते हैं। मंदाकिनी जिले अचलेश्वर महादेव मंदिर के ठीक पीछे हैं।

अचलगढ़ क़िला घूमने जाने का सबसे अच्छा समय 

अगर आप अचलगढ़ किला घूमने जाने वाले हैं तो बता दे कि आपको यहां पर या तो सर्दियों के मौसम में आना चाहिए या फिर जब हल्की गर्मी स्टार्ट हो रही हो तब आना चाहिए।

इस जगह का औसत टेंपरेचर 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास में होता है, साथ ही यह एक ऐसा इलाका है जहां पर बरसात के मौसम में काफी भयंकर बरसात होती है। इसलिए सैलानियों को बरसात के मौसम में यहां पर जाने से बचना चाहिए।

इस जगह को देखने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से लेकर के 15 मार्च के बीच का समय होता है। हालांकि अगर आप ठंडी में जा रहे हैं तो ठंडी से बचने के आवश्यक इंतजाम करके ही जाएं।

माउंट आबू में खाने के लिए स्थानीय भोजन 

यहां पर आपको अधिकतर नेचुरल शुद्ध शाकाहारी खाना प्राप्त होता है। इसलिए जो लोग शाकाहारी खाना खाने का शौकीन है, उनके लिए यहां पर वेजिटेरियन खाने की एक से बढ़कर एक वैरायटी है। यहां पर जैन तीर्थ स्थल भी मौजूद है। इसलिए यहां पर काफी भारी मात्रा में शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट मौजूद है। 

इसलिए यहां पर ऐसे लोगों को थोड़ी समस्या हो सकती है जो नॉन वेजिटेरियन है  इस इलाके में आपको पंजाबी, राजस्थानी और चाइनीस खाना आसानी से प्राप्त हो जाएगा। हालांकि पंजाबी और चाइनीस खाना आपको शहर के आसपास में जो रेस्टोरेंट हैं, वहीं पर मिलेगा। आप चाहे तो राजस्थान के लोकल खाने का आनंद भी यहां पर उठा सकते हैं।

अचलगढ़ क़िला माउंट आबू कैसे पंहुचा जाये 

माउंट आबू से तकरीबन 11 किलोमीटर की दूरी पर अचलगढ़ किला मौजूद है, जहां पर पहुंचने के लिए आप सड़क मार्ग, रेलवे या फिर हवाई जहाज का इस्तेमाल कर सकते हैं।

1: फ्लाइट से अचलगढ़ क़िला कैसे पहुचे 

अगर आप हवाई जहाज के जरिए अचलगढ़ किला घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको हम यह बता देते हैं कि माउंट आबू से कोई भी एयरपोर्ट डायरेक्ट तौर पर कनेक्ट नहीं है।

इसलिए अगर आपको अचलगढ़ किला घूमना है तो आपको हवाई जहाज के जरिए सीधा उदयपुर एयरपोर्ट आना पड़ेगा, जहां से अचल गढ़ किले की दूरी तकरीबन 177 किलोमीटर के आसपास में है। उदयपुर एयरपोर्ट पर उतरने के पश्चात आप बस के जरिए, टैक्सी के जरिए माउंट आबू पहुंच सकते हैं और अचलगढ़ किला घूम सकते हैं।

2: ट्रेन से अचलगढ़ क़िला केसे जाये 

ट्रेन के जरिए अगर आप किला घूमने के लिए आ रहे हैं तो आप माउंट आबू रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं और वहां से टैक्सी करके या फिर बस के जरिए अचलगढ़ किले तक पहुंच सकते हैं।

बता दें कि माउंट आबू रेलवे स्टेशन अच्छी तरह से जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है, जहां से आपको दैनिक तौर पर ट्रेन मिल जाती है।

3: सड़क मार्ग से अचलगढ़ क़िला कैसे पहुचे

आप राजस्थान गवर्नमेंट के द्वारा संचालित की जाने वाली गवर्नमेंट बस के जरिए माउंट आबू पहुंच सकते हैं। अगर आपके पास खुद की कार है तो आप कार के जरिए भी यहां तक पहुंच सकते हैं या फिर आप भाड़े पर टैक्सी करके भी किले तक जा सकते हैं।

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आशा करता हूँ दोस्तों आपकों Achalgarh Fort History In Hindi का यह लेख अच्छा लगा होगा. इस लेख में हमने आपकों अचलगढ़ किले के बारे में इन्फॉर्मेशन दी हैं. यदि आपके पास इस तरह के प्राचीन दुर्गों से जुड़ी कोई जानकारी हो तो हमारे साथ भी शेयर करे. यदि आप किलों दुर्गों तथा इतिहास से जुड़े अन्य लेख पढ़ते रहना चाहते हैं तो Hihindi को विजिट करे.

1 thought on “अचलगढ़ के किले का इतिहास | Achalgarh Fort History In Hindi”

  1. अचलगढ़ के किले के बारे में काफी अची जानकारी है सर

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