ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति व जानकारी | About Universe in Hindi

About Universe in Hindi समस्त आकाशीय या खगोलीय पिंड अनंत आसमान में बिखरे हुए प्रतीत होते है. इस असीम आसमान को अंतरिक्ष (Space) कहा जाता है. अन्तरिक्ष का असीम विस्तार है, इसी में हमारा ब्रह्माण्ड (Universe) है. अन्तरिक्ष के अनन्त फैलाव में खगोलीय पिंडो के असख्य समूह है. विभिन्न तारों एवं उनके अवशेषों, तारों के मध्य गैसों और धूलकणों का एक ऐसा जमाव जो गुरुत्वाकर्षण के कारण एक दूसरे से बंधा है, उसे आकाश गंगा (Galaxy) कहा जाता है.

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लाखों प्रकाश वर्ष की लम्बाई चौड़ाई में आकाश गंगा फैली हुई है. इन्ही अनगिनत आकाश गंगाओं के समूह को ब्रह्माण्ड (Universe) कहते है. जैसा कि हम सभी जानते है, तारों के छोटे समूह को नक्षत्रमंडल कहते है और लाखों नक्षत्रमंडल एवं तारकमध्य गैसों, धूलकणों से आकाशगंगा (Galaxy) का निर्माण होता है. विभिन्न नक्षत्रमंडलों के अंदर तारकीयमंडल स्थित है, जैसे हमारा सौरमंडल.

प्रकाश वर्ष क्या है (light year in hindi)

प्रकाश वर्ष दूरी का मापक है. इसका उपयोग खगोलीय पिंडों के मध्य दूरी मापने के लिए किया जाता है. एक वर्ष की अवधि में प्रकाश तीन लाख किलोमीटर प्रति सैकंड की गति से जितनी दूरी तक जा सकता है, उसी दूरी को एक प्रकाश वर्ष (light year l.y.) कहा जाता है.

इस प्रकार एक प्रकाश वर्ष में लगभग 95 खरब किलोमीटर की दूरी तय करता है, अतः यही दूरी एक प्रकाश वर्ष कहलाती है.

खगोलीय पिंड क्या है in english (What celestial bodies,khagoliya pind)

आसमान में फैले तारे, उल्का, ग्रह, उपग्रह, धूमकेतु आदि जिनमें हमारी पृथ्वी, सूर्य एवं चन्द्रमा भी शामिल है, खगोलीय पिंड कहलाते है. दूर स्थित तारे जो हमें बहुत सूक्ष्म रूप में दिखाई देते है, वे विशाल एयर अति गर्म गैसीय पिंड होते है.

ये तारे हाइड्रोजन एवं हीलियम के सम्मिश्रण से बने है. ये अत्यधिक ऊष्मा एवं ऊर्जा विकिरित करते है. हमारा सूर्य भी वास्तव में एक तारा ही है. तारों की तरह सभी खगोलीय पिंड गैसीय नही होते है. कुछ पदार्थ सिर्फ ठोस पदार्थों से बने है. और कुछ ठोस, द्रव तथा गैसीय तीनों पदार्थों से बने है.

हमें आसमान में तारे बहुत सूक्ष्म और एक दूसरे के पास दिखाई देते है, क्या वास्तव में ये इतने विशाल है और एक दूसरे से इतने दूर स्थित है. इनमें से कुछ की चमक बहुत तेज होती है. और कुछ की बहुत कम. इसका यही कारण है, कि कुछ पिंड स्वयं चमकदार है और कुछ पिंड दूसरे के प्रकाश से चमकते है.

सभी ग्रह एवं उपग्रह सूर्य के प्रकाश से चमकते है, आपके मन में यह बात जरुर आई होगी कि आसमान में रात्रि में चमकने वाली ये सभी वस्तुएं दिन में क्यों नही होती है.

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति (origin of the universe in hindi)

brahmand ki khoj– ब्रह्माण्ड मानव के लिए सदा से ही जिज्ञासा का कारण रहा है. ब्रह्माण्ड उत्पत्ति के सम्बन्ध में भी काफी रोचक किस्सें प्रचलित है. किन्तु वर्तमान समय में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति सम्बन्धी सर्वमान्य सिद्धांत ‘बिग बैंग’ (big bang) है. इस सिद्धांत के अनुसार आज से 13.7 अरब वर्ष पहले एक वृहत प्रभावशाली विस्फोट हुआ जिसे बिग बैंग कहा जाता है.

विस्फोट के बाद ब्रह्माण्ड और खगोलीय पिंडों की उत्पत्ति हुई और तब से इसका विस्तार हो रहा है. ब्रह्माण्ड की अनेकानेक आकाशगंगाओं से मिलकर बना है. पृथ्वी सहित सौर परिवार मन्दाकिनी या ऐरावत पंथ नामक आकाशगंगा (milky way) में स्थित है. प्राचीन समय में भारत में इसकी परिकल्पना आसमान में प्रकाश की नदी से की गई थी. इसलिए इसका नाम आकाशगंगा पड़ा अर्थात् आकाश में बहने वाली नदी.

ऐरावत पथ के अतिरिक्त अन्य कई प्रमुख आकाशगंगाएं है. तारों के समूह से ही आकाशगंगाओं का निर्माण होता है.हमारी पृथ्वी का सबसे निकटतम तारा सूर्य है, जो पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है. अन्य तारों की रोशनी एवं चमक भी लगभग सूर्य के समान ही होती है. लेकिन वे सूर्य से अधिक दूर होने के कारण हमें अत्यंत छोटे दिखाई देते है. इन सब के अतिरिक्त एक विशेष आकृति वाला तारा जो हमेशा दिखाई नही देता है, वह तारा काफी आकर्षक व निराला है. इसका नाम है पुच्छल तारा या धूमकेतु.

इसकी रचना बर्फ, धूल, छोटी चट्टानों और गैसीय पदार्थों से हुई है. इनकी गति बहुत तेज होने कारण गैसीय पदार्थ पूंछ की तरह सरंचना बना लेते है, इन्ही कारण इसे पुच्छल तारा (पूछ वाला तारा) कहा जाता है. धूमकेतु का सिर हमेशा सूर्य की तरफ एवं पूंछ विपरीत दिशा में होती है.

सूर्य के चारों ओर एक निश्चित पथ पर परिक्रमा करते है, वे कभी सूर्य के निकट आते है तो कभी दूर चले जाते है. यह स्थति एक निश्चित अवधि के बाद होती है. तब उन्हें साफ देखा जा सकता है. सबसे चर्चित पुच्छल तारा हैली है, जो प्रति 76 वर्ष में दिखाई देता है. इसे 1986 में देखा गया था. अब यह पुनः 2062 में दिखाई देगा.

ब्रह्मांड की उत्पत्ति का बिग बैंग सिद्धांत (big bang theory in hindi)

जैसाकि हम जानते हैं कि हब्बल ने यह खोज की थी कि ब्रह्मांड का विस्तार (फैलाव) हो रहा है। उस समय अन्य वैज्ञानिकों के साथ-साथ हब्बल को भी अपनी इस असाधारण खोज के मायने स्पष्ट नहीं थे। इस मुद्दे पर विचार स्वरूप जोर्ज लेमाइत्रे और जोर्ज गैमो ने गंभीर प्रयास किए। इन दोनों वैज्ञानिकों के अनुसार यदि आकाशगंगाएं बहुत तेज़ी से हमसे दूर भाग रहीं हैं तो इसका अर्थ यह हुआ कि अतीत में किसी समय जरुर ये आकाशगंगाएं एक साथ रहीं होंगी।
वस्तुतः ऐसा लगा कि 10 से 15 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड का समस्त द्रव्य एक ही जगह पर एकत्रित रहा होगा। उस समय ब्रह्मांड का घनत्व असीमित (Infinite density) था तथा सम्पूर्ण ब्रह्मांड एक अति-सूक्ष्म बिंदू (Infinitesimally small) में समाहित था। इस स्थिति को परिभाषित करने में विज्ञान एवं गणित के समस्त नियम-सिद्धांत निष्फल सिद्ध हो जाते हैं। वैज्ञानिकों ने इस स्थिति को गुरुत्वीय विलक्षणता (Gravitational Singularity) नाम दिया है।
किसी अज्ञात कारण से इसी सूक्ष्म बिन्दू से एक तीव्र विस्फोट हुआ तथा समस्त द्रव्य इधर-उधर छिटक गया। इस स्थिति में किसी अज्ञात कारण से अचानक ब्रह्मांड का विस्तार शुरू हुआ और दिक्-काल की भी उत्पत्ति हुई। इस घटना को ब्रह्माण्डीय विस्फोट का नाम दिया गया। अंग्रेज ब्रह्मांड विज्ञानी सर फ्रेड हॉयल ने इस सिद्धांत की आलोचना करते समय मजाक में ये शब्द गढ़े- ‘बिग बैंग’।
बिग बैंग सिद्धांत ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे अधिक मान्य सिद्धांत है। परंतु जिस सैद्धांतिक स्थित पर भौतिकी या गणित प्रकाश डालने में असमर्थ है, उसको मानने के हमारे पास क्या सबूत है? दरअसल भौतिकी को अपने सिद्धांतों पर उस समय संदेह हो जाता है, जब वह उसे अनंत की तरफ ले जाते हैं। बहरहाल, बात सबूत की।
वैज्ञानिक जोर्ज गैमो ने 1940 के दशक में यह अनुमान लगाया कि बिग बैंग ने उत्पत्ति के कुछ समय में ब्रह्मांड को उच्च तापमान विकिरण से भर दिया होगा! उन्होंने यह भी अंदाज़ लगाया था कि ब्रह्मांड के विस्तार ने उच्च तापमान विकिरण को धीरे-धीरे ठंडा कर दिया होगा और उसके अवशेष माइक्रोवेव के रूप में देखे जा सकते हैं। वर्ष 1965 में आर्नो पेंजियाज और रोबर्ट विल्सन ने अनजाने में ही माइक्रोवेव विकिरण की खोज की। इस बड़े सबूत के कारण ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बिग बैंग सिद्धांत को सर्वाधिक मान्यता प्राप्त है।

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