Acharya Charak Life History Samhita Ayurveda In Hindi

Acharya Charak Life History Samhita Ayurveda In Hindi

Biography History Of Acharya Charak In Hindi: हमारा भारत देश बहुत प्राचीन है. हमारे यहाँ अनेक महान वैज्ञानिक और चिकित्सक हुए है. इनमें से एक थे चरक. इनका नाम चरक कैसे पड़ा, इसकी एक मजेदार कहानी है. चरक शब्द का अर्थ है ”चलने वाला”. उन्हें जन सेवा में इतनी रूचि थी, कि ये जगह घूमते एवं जनसाधारण की चिकित्सा किया करते थे. तथा चिकित्सा विज्ञान का प्रचार प्रचार किया करते थे. इसलिए लोग इन्हें चरक के  नाम से जानने लगे.

आचार्य चरक का जीवन परिचय व इतिहास (Introduction and history of Acharya Charak)Introduction and history of Acharya Charak

(Father of Medicine in Ayurveda is Acharya Charaka, Charaka sahita is Most Famous Book For Ayurveda Knowledge. For More Detail Enjoy Video)

इनका सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘चरक संहिता’ जिनके आठ खंड है. इनमें शरीर के विभिन्न अंगो की बनावट, जड़ीबूटियों के गुण तथा पहचान का वर्णन है. इनकी धारणा थी. कि चिकित्सक को दयावान और सदाचारी होना चाहिए. उन्होंने चिकित्सकों के लिए प्रतिज्ञाएं भी लिखी.

नागवंश में इनका जन्म माना जाता है, वैशम्पायन इनके गुरु का नाम था. इन्होने अपनी BOOKS में पश्चिमी भारत का अधिक वर्णन किया. इस कारण संभवतया उनका सम्बन्ध इसी क्षेत्र से रहा होगा. आचार्य चरक कहा करते थे-  ” जो चिकित्सक अपने ज्ञान और समझ का दीपक लेकर बीमार के शरीर को नहीं समझता, वह बीमारी कैसे ठीक कर सकता है”

इसलिए एक अच्छे चिकित्सक को रोग से जुड़े सभी तथ्यों एवं कारणों की गहन पड़ताल के बाद ही रोगी को दवाई दी जानी चाहिए. आचार्य चरक ने भारतीय आयुर्वेद के लिए पाचन, चयापचय तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबायोटिक) के बारे में परिचित करवाया.

शरीर के तीन मुख्य दोष पित्त, कफ और वायु को इन्होने किसी भी बिमारी की जड़ बताया. तथा इनके असंतुलन के चलते शरीर में बिमारी की वजह बनती है. अतः इन्होने शरीर को स्वस्थ करने के लिए इन तीनों विकारों को ठीक करने पर जोर दिया तथा इनके संतुलन स्थापित करने के लिए दवाइयों का निर्माण किया.

चरक संहिता की रचना वैद्य अग्निवेश ने की थी, मगर आचार्य चरक द्वारा इसे संपादित कर आमजन के उपयोगी प्रकरणों को इसमें शामिल किया गया. मूल रूप से यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में है. आधुनिक काल में इसकी उपयोगिता को देखते हुए, कई वैश्विक भाषाओं में इसका अनुवाद किया गया है. हिंदी भाषी लोगों के लिए हिंदी का संस्करण भी उपलब्ध है. आपकों बता दे कि आयुर्वेद का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए भारत में चरक संहिता को एक विषय के तौर पर उनके पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है.

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