Round Table Conference In Hindi | गोलमेज सम्मेलन की जानकारी

Round Table Conference In Hindi गोलमेज सम्मेलन की जानकारी: गांधीजी की दांडी यात्रा की सफलता से अंग्रेजों को इस बात का अहसास हो गया कि अब भारत में उनका राज अधिक दिन तक नहीं चल पायेगा. उन्हें भारतीयों को भी सत्ता में हिस्सा देना पड़ेगा. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर ब्रिटिश सरकार ने लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन आयोजित किये. लेकिन ये सम्मेलन सफल नहीं हो सके. golmej sammelan in hindi में हम पहला, दूसरा व तीसरा गोलमेज सम्मेलन तथा गांधी इर्विन समझौता क्या था जानेगे.

Round Table Conference In Hindi गोलमेज सम्मेलन की जानकारी

Round Table Conference In Hindi गोलमेज सम्मेलन की जानकारी

पहला गोलमेज सम्मेलन (1st round table conference)

पहला गोलमेज सम्मेलन नवम्बर 1930 में लंदन में आयोजित किया गया, जिसमें देश के प्रमुख नेता सम्मिलित नहीं हुए. अतः यह सम्मेलन निरर्थक साबित हुआ. भारतीय इतिहास के प्रमुख लेखक विपिनचंद्र ने लिखा हैं कि गांधीजी भारतीय जनता के ह्रदय पर उस समय भगवान् राम की तरह राज्य कर रहे थे.

जब राम ही लंदन में होने वाली सभा में नहीं पहुचें. तो रामलीला कैसे होती. ब्रिटिश सरकार भी जानती थी कि बिना प्रमुख नेताओं को बुलाए बिना लंदन की गोलमेज सभा निरर्थक साबित होगी और ऐसा ही हुआ भी.

गांधी इरविन समझौता (Gandhi–Irwin Pact)

जनवरी 1931 में गांधीजी को जेल से मुक्त कर दिया गया. अगले ही महीने गांधीजी और लार्ड इरविन के साथ कई बैठके हुई. इन्ही बैठकों के बाद गांधी इरविन समझौता पर सहमति बनी, जिनकी शर्ते इस प्रकार थीं. सविनय अवज्ञा आंदोलन को वापस लेना, सारे कैदियों की रिहाई और तटीय इलाकों में नमक उत्पादन की अनुमति देना शामिल था.

रैडिकल राष्ट्रवादियों ने इस समझौता की आलोचना की क्योंकि गांधीजी वायसराय से भारतीयों की राजनैतिक स्वतंत्रता का आश्वासन नहीं ले पाए थे. गांधीजी को इस सम्भावित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केवल आश्वासन मिला था. कांग्रेस की स्थापना को 46 वर्ष हो चुके थे. अब लोग पूर्ण स्वतंत्रता का वायदा ब्रिटिश सरकार से लेना चाहते थे.

दूसरा गोलमेज सम्मेलन (second round table conference)

दूसरा गोलमेज सम्मेलन 1931 के आखिर में लंदन में आयोजित किया गया. उसमें गांधीजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होकर नेतृत्व कर रहे थे. गांधीजी का कहना था कि उनकी पार्टी पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं. उनके दावों को तीन पार्टियों ने चुनौती दी.

  • मुस्लिम लीग का इस विषय में कहना था कि वह भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हित में काम करती हैं.
  • भारत के राजे रजवाड़े का कहना था कि कांग्रेस का उनके नियंत्रण वाले भागों पर कोई अधिकार नहीं हैं.
  • तीसरी चुनौती तेज तर्रार वकील और विचारक भीमराव अम्बेडकर की तरफ से थी, जिनका कहना था कि गांधीजी और कांग्रेस पार्टी निचली जातियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते.

इसका परिणाम यह हुआ कि हर दल और नेता अपने अपने तर्क, अपना पक्ष और अपनी मांगे रखते रहे. जिसका परिणाम शून्य रहा. गांधीजी लंदन से खाली हाथ लौट आए. गांधीजी जैसे ही जहाज से बम्बई उतरे उन्होंने कहा मैं खाली हाथ लौट आया हूँ और सरकार की हठधर्मीता के कारण हमें पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करना पड़ेगा तथा उन्होंने ऐसा ही किया.

तीसरा गोलमेज सम्मेलन (third round table conference)

भारत में जिन दिनों सविनय अवज्ञा आंदोलन चल रहा था. ब्रिटिश सरकार ने लंदन में तीसरा गोलमेज सम्मेलन बुलाया. इंग्लैंड की लेबर पार्टी तथा कांग्रेस पार्टी ने इसमें भाग नहीं लिया. कुछ भारतीय प्रतिनिधि जो अंग्रेजों की हाँ में हाँ मिलाते थे, जरुर शामिल हुए.

सम्मेलन में लिए गये निर्णयों पर एक श्वेत पत्र प्रकाशित किया गया, फिर इसके आधार पर 1935 का गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट पास किया गया. इससे स्पष्ट होता है कि ब्रिटिश सरकार की कांग्रेस को महत्व न दिए जाने की चालों तथा कांग्रेस विरोधी अन्य प्रमुख दलों व नेताओं के कांग्रेस विरोधी दावों के कारण गोलमेज सम्मेलन में हुई वार्ताओं का कोई परिणाम नहीं निकला.

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