बया पर निबंध | Short Essay On Tailor Bird In Hindi

Short Essay On Tailor Bird In Hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम बया पर निबंध जानेगे. कारीगरी की कला में इन्सान को माहिर माना जाता हैं, मगर बया पक्षी के घौसलें बुनने की कला से इन्सान भी चकित रह जाता हैं, गौरेया जैसी दिखने वाली इस चिड़िया का परिचय हम आज जानेंगे. बया (weaver bird) भाषण, स्पीच, अनुच्छेद, लेख आर्टिकल में हम इसके इतिहास, रंग रूप, घौसले, जीवन शैली को करीब से समझने का प्रयास करेंगे.

Short Essay On Tailor Bird In Hindi

Short Essay On Tailor Bird In Hindi

बया को बुनकर चिड़ियाँ कहा जाता है वो इसलिए क्योंकि अपने घौसलें का निर्माण ऐसे ताने बाने से करती है जिसे देखकर कोई भी सोच में पड़ जाए. नन्ही सी यह चिड़ियाँ अपनी मेहनत के दम पर ऐसा सुंदर नीड़ बनाती है जिसकें जैसा कोई सुंदर घर नहीं होता हैं. कुछ दशक पूर्व तक इसे खेतों, नदियों के किनारे पेड़ों पर लटकते लालटेन से झुलेदार घौसले के पास देखा जाता था, मगर अब निरंतर इसकी संख्या घटती जा रही हैं.

आपकों जानकर हैरत होगी, कि बया अपने घौसलें में रात को रोशनी एवं नन्हें बच्चों के लिए झूले का प्रबंध भी कर लेती हैं. अपना घौसला बनाने के लिए नदी की गीली मिट्टी को घास फूस के तिनकों पर डालकर उस पर जुगुनू चिपका देती है जिससे उसका घौसला अँधेरे में भी रोशन रहता हैं. अधिकतर पक्षी दो शाखाओं के मध्य उनके सहारे घौसले का निर्माण करती हैं जबकि बया अपना घौसला किसी लटकती टहनी पर झूलता हुआ ही बनाती है इससे वह शिकारी पक्षियों से न केवल अपने बच्चों को बचा पाती हैं बल्कि उन्हें झूला झूलाने का आनन्द भी दिलाती हैं.

बया का घौसला नर पक्षी द्वारा ही निर्मित होता है वह दिन रात मेहनत करके मनुष्य की भांति अपना बसेरा तैयार करता हैं, फिर वह अपनी आवाज से मादा बया को आकर्षित करता हैं. इस तरह वह जब अपना जीवनसाथी पा लेता है तो दोनों नर मादा साथ साथ रहने लगते हैं. बया घास फूस या कचरे के ढेर से अपना घौसला नहीं बनाती है वरन वह मजबूत किस्म के खरपतवार को अपनी चोंच से काटकर लाती है तथा अपना घर बनाती हैं.

कई बार बया किसान की शत्रु बन जाती हैं, जब पकी फसल पर यह अपने कुटुंब समेत धावा बोलती हैं. यह धान के अलावा कीट, तितली, सीप, घोघा और छोटे मेढक को अपना शिकार बनाती हैं. यह ची ची की आवाज में मधुर कलरव करती हैं. एक पेड़ पर इनके 20-30 घोसलें देखे जा सकते हैं. प्रमुख रूप से यह भारतीय उपमहाद्वीप एवं दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में पाई जाती हैं.

नर बया द्वारा निर्मित घौसला तकरीबन 30 दिनों की अवधी में पूर्ण होता है इसके निर्माण के लिए उसे 400-500 बार घास फूस के तिनके लाने होते हैं. इतनी उड़ान भरने के बाद अपना घर बना पाता हैं. जब कभी ये अपना घौसला छोड़ देते है तो अन्य पक्षी यथा कोयल, गौरेया इसका उपयोग करने लगते हैं. अपने हेंगिग नेस्ट में मादा बया दो से चार सफेद अंडे एक बार में देती है जिसे 15 दिनों तक सेका जाता हैं. जब बच्चें अंडे से बाहर आ जाते है तो 16-18 दिन तक उन्हें चुग्गा दिया जाता है जिसके पश्चात वे उड़ जाते है तथा बया उस घौसलें को भी छोड़ देती हैं.

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