विधानसभा के बारे में जानकारी | Vidhan Sabha In Hindi

Assembly/ Vidhan Sabha In Hindi:- विधान सभा जिन्हें स्टेट असेम्बली भी कहा जाता है. यह राज्य विधानमंडल का निचला व लोकप्रिय सदन है. भारत के 22 राज्यों में विधानमंडल का स्वरूप एकसदनीय है. जबकि 7 राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है. राज्य के सभी वयस्क मतदाता जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है, इनके द्वारा विधानसभा सदस्य (विधायक) का प्रत्यक्ष निर्वाचन किया जाता है. सामान्यतः इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, परन्तु विशेष परिस्थतियों में इस बढ़ाया अथवा अविश्वास प्रस्ताव पास होने पर विधानसभा को भंग भी किया जा सकता है. राज्य मंत्रीमंडल विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होता है. सतापक्ष को बने रहने के लिए उनका इस सदन में बहुमत अनिवार्य है.

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प्रत्येक राज्य की विधानसभा में न्यूनतम 60 और अधिकतम 500 सदस्य हो सकते है. ये विधानसभा सदस्य विभिन्न विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान द्वारा निर्वाचित होते है.

सदस्यों की योग्यताएं (Members’ qualifications)

  • वह भारतीय नागरिक हो
  • कम से कम 25 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो.
  • उन सभी योग्यताओं को पूर्ण करता हो, संसद द्वारा निर्धारित की गई है.
  • राज्य अथवा केंद्र सरकार में किसी लाभ के पद पर न हो.

कार्यकाल (Tenure)

प्रथम अधिवेशन की तिथि से 5 वर्ष, लेकिन राज्यपाल इसे पूर्व में भी विघटित कर सकता है. (अनुच्छेद 172) विधानसभा के गत स्तर के अंतिम दिन तथा आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तिथि के बिच 6 माह से अधिक का अंतर नही हो सकता. अतः वर्ष में प्रत्येक छ माह में एक और सालभर में दौ बैठक होना अनिवार्य है.

विधानसभा की कार्यवाही का संचालन विधानसभा अध्यक्ष (speaker) द्वारा किया जाता है. जिसका निर्वाचन विधानसभा के सदस्यों द्वारा अपने में से ही बहुमत से किया जाता है. उपाध्यक्ष का निर्वाचन भी विधानसभा के सदस्य अपने में से ही करते है.

अध्यक्ष विधानसभा के भंग होने के साथ ही अपना पद खाली नही करता है, बल्कि नई विधानसभा के अध्यक्ष चुन लिए जाने तक अपने पद पर बना रहता है. विधानसभा के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष तथा दोनों की अनुपस्थिति में विधान सभा द्वारा इस प्रयोजन हेतु नियुक्त कोई भी सदस्य अध्यक्ष पद के कर्तव्यों को पूरा करेगा.

विधानसभा की विशेष शक्तियां (Special Powers of the Assembly)

किसी भी सता पक्ष के साथ बहुमत न होने की स्थति में विरोधी दलों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव केवल विधान सभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है. यदि यह प्रस्ताव पूर्ण बहुमत के साथ पारित हो जाता है. तो राज्य के मुख्यमंत्री तथा मंत्रीमंडल को इस्तीफा देना पड़ता है.

भारतीय संसद में लोकसभा की विशेष शक्ति की ही तरह राज्यों में विधान सभा के पास धन विधेयक को पारित करने की विशेष शक्ति होती है. विधान परिषद् धन विधेयक को अधिकतम 14 दिन तक अपने पास रख सकती है.

अधिवेशन, मतदान और गणपूर्ति

संविधान के किये गये प्रावधान के मुताबिक़ राज्य की विधानसभा के एक वर्ष में दो बैठक होनी अनिवार्य है. जिसके मध्य अधिकतम 6 माह का अंतराल हो सकता है. राज्य में विधानमंडल की बैठक बुलाने और उसके स्थगन का अधिकार राज्यपाल को दिया गया है. जो मुख्यमंत्री की सलाह पर विधानसभा का अधिवेशन बुलाता है. अधिवेशन के लिए गणपूर्ति एक बटा दस रखी गई है.

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