भारत के गाँव पर निबंध | Essay On Indian Village In Hindi

भारत के गाँव पर निबंध Essay On Indian Village In Hindi: दोस्तों आज हम भारतीय ग्रामीण जीवन (Indian rural life) पर निबंध यहाँ बता रहे हैं. स्कूल में गाँव पर अनुच्छेद भाषण निबंध लिखने को कहा जाए तो कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चें इस निबंध का उपयोग  कर सकते हैं.

भारत के गाँव पर निबंध Essay On Indian Village In Hindi

भारत के गाँव पर निबंध Essay On Indian Village In Hindi

हमारा देश गाँवों के देश के रूप में जाना जाता हैं.  देश की 70 फीसदी आबादी गाँवों में बस्ती हैं  इसी कारण गाँवों को भारत का ह्रदय कहा गया हैं. अगर आप भारत के स्वरूप को देखना चाहते व इसकी आत्मा को समझना चाहते हैं तो  गाँवों की ओर जाना ही होगा. वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक़ भारत में तकरीबन 7 लाख छोटे बड़े गाँव हैं. जिनकी आबादी 3 से 7 हजार प्रति गाँव औसतन हैं. गाँवों का मुख्य रोजगार के साधन कृषि, पशुपालन और छोटे बड़े उद्योग धंधे होते हैं.

भागदौड़ की जिन्दगी से बहुत दूर शांत माहौल में भोले भाले चरित्र वाले लोग जिनके देशीपन मानवता की कद्र केवल अब गाँवों में ही बसकर रह गयी हैं. हरे भरे खेत, फलों के बगीचे और सुंदर प्राकृतिक दृश्य भारतीय गाँवों की विशेषताएं हैं. कही पहाड़ो की गोदी में अथवा नदियों के किनारे बसे गाँवों का मनोरम नजारा दिल को सुकून देने वाला होता हैं.

भारत की संस्कृति, त्यौहार एवं मान्यताओं को गाँवों में आज भी बड़ा महत्व दिया जाता है. हमारे परम्परागत त्योहारों का मूल स्वरूप केवल गाँवों में ही देखा जा सकता हैं. तेजी से हो रहे नगरीकरण और औद्योगिकीकरण ने गाँव की संस्कृति पर भी प्रभाव छोड़ा हैं किन्तु फिर भी शहरों की तुलना में गाँवों ने अपनेपन को बचाए रखने में कामयाबी पाई हैं. यही वजह है कि कहते है भारत को देखना हैं तो गाँवों की तरफ जाओं.

इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि नगरीय जीवन की बजाय ग्रामीण जीवन हर पहलु से उच्च हैं. मगर इसका दूसरा पक्ष यह भी हैं कि आजादी के 75 सालों के बाद भी हमारे गाँव में बसने में किसान, कर्मकार मूलभूत भौतिक सुविधाओं से वचित रहे हैं. गाँवों में शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, शिक्षा के क्षेत्र की तरफ जो ध्यान दिया जाना चाहिए था वह नहीं दिया गया. जिसका परिणाम यह हुआ कि आज आजीविका, शिक्षा स्वास्थ्य और उच्च जीवन स्तर की सुविधाओं के लिए करोड़ो लोग शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं.

गाँवों की समस्याओं को समाप्त करने की दिशा में सरकारे गम्भीरता से नहीं सोच रही हैं.  हालांकि 2022 तक  सभी गाँवों  को बिजली से जोड़ने की योजना से ग्रामीण क्षेत्र में लोग कृषि व अन्य कार्य आसानी से कर पाएगे. वही शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार के लिए गाँवों में प्रबंध की निहायत कमी हैं. अशिक्षा, रूढ़िवादिता, अनियंत्रित जनसंख्या, बेरोजगारी आदि से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को गाँवों के विकास के लिए पहल करनी चाहिए.

भारत की अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से गाँवों पर टिकी हैं. कृषि प्रधान भारत देश की 60 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में बसती हैं उनका मुख्य कार्य कृषि और पशुपालन ही हैं. अतः आधे भारत की अनदेखी करके भारत प्रगति के पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता हैं. समय समय पर केंद्र सरकार की ओर से गाँवों के चहुमुखी विकास के लिए कदम उठाएं गये हैं जिनमें ग्रामीण विकास मंत्रालय की स्थापना करना एक अहम निर्णय था.

बेरोजगारी व गरीबी निवारण, जवाहर ग्राम सम्रद्धि, प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना, मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, अटल आवास योजना, स्वच्छता कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, जननी सुरक्षा योजना, विद्युत् कनेक्शन योजना आदि सरकारी योजनाओं से गाँवों के स्तर को सुधारने में बड़ा लाभ हुआ हैं.

भारत के गाँवों की दशा सुधारने में किसान का अहम योगदान हैं. मगर विगत एक दशक से शहरीकरण में हुई वृद्धि ने गाँवों के विकास की यात्रा को बाधित करने का कार्य किया हैं. रोजगार गाँवों की सबसे बड़ी समस्या हैं जिसके चलते नवयुवक काम की तलाश में शहरों की ओर आते हैं. युवाओं के पलायन को रोकने तथा गाँवों की स्थिति में सुधार के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे एवं लघु उद्योगों को स्थापित किये जाने की आवश्यकता हैं.

गाँवों के विकास के लिए गांधीजी के विचारों को अपनाने की आवश्यकता हैं. उन्होंने कहा था भारत की आत्मा गाँव में बसती हैं. गाँवों की समस्याओं को हल कर उन्हें खुशहाल करने की महत्ती आवश्यकता हैं. मनुष्यता व भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए गाँव में अधिक से अधिक आधुनिक सुख सुविधाएँ एवं उद्योगों की स्थापना करके भारत को विकास के पथ पर तेजी से बढाया जा सकता हैं.

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