कणाद का परमाणु सिद्धांत | Kanada Atomic Theory

Kanada Atomic Theory In Hindi- महर्षि कणाद प्राचीन भारत के वैज्ञानिक एवं दार्शनिक थे. संसार पर सबसे न्यूनतम कण परमाणु का सिद्धांत (Atomic Theory) इन्ही महाशय ने सबसे पहले दिया था. इस कारण इसे कणाद का परमाणु सिद्धांत (Kanada Atomic Theory) के रूप में जाना जाता है. कहा जाता है, कि कणाद ऋषि फलों की तलाश में वन में विचरण कर रहे थे. राह में चलते चलते हाथ में रखे एक फल को नाखूनों से कुरेद रहे थे. इसी दौरान इन्हें सबसे अंतिम उस कण के बारे में विचार आया और वही कणाद सिद्धांत (Kanada Theory) की वजह बना.

कणाद का परमाणु सिद्धांत | Kanada Atomic Theoryकणाद का परमाणु सिद्धांत Kanada Atomic Theory

प्राचीन भारतीय एवं ग्रीक दार्शनिक द्रव्य के अज्ञात एवं अद्रश्य रूपों से सदैव चकित होते रहे. पदार्थ की अविभाज्यता के मत के बारे में भारत में बहुत पहले, लगभग 500 ईसा पूर्व विचार व्यक्त किया गया था.

भारतीय दार्शनिक महर्षि कणाद ने प्रतिपादित किया था, कि हम द्रव्य को विभाजित करते जाए तो हमें छोटे छोटे कण प्राप्त होते जाएगे और अंत में एक सीमा आ जाएगी जब प्राप्त कण को पुनः विभाजित नहीं किया जा सकेगा, अर्थात वह सूक्ष्मतम कण अविभाज्य रहेगा.

इस अविभाज्य सूक्ष्मतम कण को उन्होंने परमाणु कहा. एक अन्य भारतीय दार्शनिक पकुधा कात्यायम ने इस मत को विस्तृत रूप से समझाया और कहा कि ये कण सामान्यत संयुक्त रूप में पाए जाते है. जो हमे द्रव्यों के भिन्न रूपों (तत्व, यौगिक, मिश्रण) को प्रदान करते है.

लगभग इसी समय 460 से 370 ई.पू. ग्रीक दार्शनिक डेमोक्रिट्स एवं लियुलीपस ने सुझाव दिया था, कि यदि द्रव्य (पदार्थ) को विभाजित करते जाए, तो एक ऐसी स्थति प्राप्त होगी. जब प्राप्त कण को पुनः विभाजित नहीं किया जा सकेगा. इस अविभाज्य कणों को परमाणु (अर्थात अविभाज्य) कहा था.

उपरोक्त सभी दार्शनिक विचारों पर आधारित थे. सन 1808 में जॉन डोलटन ने परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया तथा परमाणु की खोज का श्रेय इन्हें ही दिया जाता है.

डाल्टन ने द्रव्यों की विभाज्यता का विचार प्रदान किया, जिसे उस समय पर दार्शनिकता माना था. ग्रीक दार्शनिकों जे द्वारा द्रव्यों के सूक्ष्मतम अविभाज्य कण, जिसे परमाणु का नाम दिया था. उसे डाल्टन ने भी परमाणु का नाम दिया था. डाल्टन का यह सिद्धांत रासायनिक संयोजन के नियमों पर आधारित था.

डाल्टन के परमाणु सिद्धांत में द्रव्यमान संरक्षण के नियम एवं निश्चित अनुपात के नियम की युक्तिसंगत व्याख्या की. ऋषि कणाद की atomic theory को आज भी काफी महत्व दिया जाता है. इन्होंने ब्रह्मांड को 9 भिन्न भिन्न तत्वों से निर्मित बताया था, जिनमें हवा, आकाश, समय, दिमाग, आत्मा, पृथ्वी, जल और प्रकाश को आज भी ब्रह्मांड की उत्पति के मूल तत्व माने जाते थे. कणाद ने कहा था कि संसार में विद्यान हर सजीव व निर्जीव वस्तु परमाणु से मिलकर बनी है, इसके बिना किसी भी वस्तु की कल्पना भी नहीं की जा सकती है.

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