बदनोर किले का इतिहास – Badnore Fort History In Hindi

Badnore Fort In Hindi, किलो और दुर्गों के लिए विख्यात राजस्थान की वस्त्र नगरी कहे जाने वाले भीलवाड़ा जिले में स्थित बदनोर का किला अपनी वास्तुकला एवं प्राचीनता के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा हैं. मध्यकालीन वास्तुकला का ये फोर्ट सात मंजिला है, जो भीलवाड़ा शहर के पास एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित हैं. यदि आप राजस्थान के एतिहासिक किलो के भ्रमण पर निकल रहे है तो बदनोर किले का इतिहास का यह आर्टिकल आपको भीलवाड़ा दुर्ग की समस्त जानकारी यहाँ उपलब्ध करवा रहा हैं.

बदनोर फोर्ट का इतिहास – Badnore Fort History In Hindi

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बदनोर फोर्ट का इतिहास – Badnore Fort History In Hindi

बदनोर किले का इतिहास जानने से पूर्व हमें इस स्थान की एतिहासिक जानकारी को समझना चाहिए. बदनोर एक भीलवाड़ा जिले की आसींद तहसील का छोटा सा गाँव है जहाँ यह किला स्थित है जिला मुख्यालय से इसकी दूसरी 70 किलोमीटर हैं. इसी गाँव में बदनोर का किला स्थित है पुराने जमाने में इसे वर्धनपुर के नाम से जाना जाता था.

किले का नाम यहाँ के परमार शासक बदना के साथ जुड़ा हुआ हैं इन्होंने 845 ईस्वी में बदनापुर की स्थापना की थी जो बाद में जाकर बदनोर कहलाया. वही यहाँ से खुदाई में प्राप्त 1439 ई के एक शिलालेख से यह ज्ञात होता है कि इसे वर्धनपुर भी कहा जाता था. हम्मीर रासो में भी बदनोर किले के बारे मे वर्णन मिलता हैं. किले में स्थित चार भुजा मन्दिर के शिलालेख से ज्ञात होता है कि बदनोर किले का निर्माण 1584 में किया गया था. किले में कई मन्दिर एवं धार्मिक स्थित है जिनमें द्वारकाधीश मन्दिर, मैया सीता मन्दिर, गोपाल मंदिर तथा किले से 2 किलोमीटर दूर स्थित कुशला माता मन्दिर प्रमुखतया हैं.

बदनोर किले के खुलने और बंद होने का समय – Badnore Fort Bhilwara Timing In Hindi

पर्यटकों के लिए बदनोर का किला देखने के लिए सवेरे नौ बजे से सायंकाल को 5 बजे तक खुला रहता हैं. जानकारी के लिए बता दे अभी तक किले को देखने के लिए दर्शनार्थी से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता हैं.

बदनोर दुर्ग में प्रवेश के लिए एक बड़ा द्वार है जिसे बड़ा दरवाजा नाम से जाना जाता हैं. बड़ा दरवाजा के पास ही दो मन्दिर बने हुए है. बदनोर किले में कई कारागार की सेल भी बनी हुई है जहाँ कैदियों को रखा जाता था. किले में कई भवन है जिनके आकर्षक खिड़किया बनी हुई हैं. दूर से देखने पर बदनोर का किला पहाड़ी से अद्भुत नजारा पेश करता हैं.

बदनोर किले घूमने जाने का सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit In Badnore Fort In Hindi

यदि आप आने वाले दिनों में बदनोर किले के दर्शन की योजना बना रहे है तो आपकों यहाँ आने के बेस्ट टाइम की जानकारी भी होनी चाहिए. जिस समय मौसम भी अच्छा हो तथा आगंतुकों की आवाजाही भी होती रहे, बदनोर किले को देखने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च माना जाता हैं. मानसून के इस समय तापमान साधारणतया ही रहता है तथा कभी कभार तेज बारिश की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता हैं.

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बदनोर किले  के पास में घूमने लायक दर्शनीय स्थल – Best Places To Visit Near Badnore Fort In Hindi

भीलवाड़ा जिले के बदनोर किले के आस पास कई ऐसे दर्शनीय स्थल है जहाँ आप कम समय में जा सकते है तथा अच्छी डेस्टि नेशन का लुफ्त भी उठा सकते हैं. चलिए अब हम उन पर्यटन स्थानों के बारें में बता रहे हैं जो बदनोर किले के आस पास स्थित हैं.

हरणी महादेव मंदिर – Harni Mahadev Temple In Hindi

राजस्थान के प्राचीन शिव मन्दिरों में से एक हरणी महादेव मन्दिर भीलवाड़ा में स्थित हैं, यह जिला मुख्यालय से छः किमी की दूरी पर स्थित हैं. यदि आप बदनोर किले घुमने के लिए आ रहे है तो हरणी शिवजी मंदिर अवश्य दर्शन करने जाया करे एक गुफा में स्थित प्राचीन शिवलिंग पर आकर्षक मन्दिर बनाया गया था.

Harni Mahadev Temple In Hindi

राजस्थान का माहेश्वरी समाज हरणी के महादेव को अपना कुलदेव मानकर पूजते हैं. आस पास के क्षेत्र के लोगों में इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था हैं. शिवरात्री एवं विशिष्ट अवसरों पर यहाँ विशाल जनसैलाब देखने को मिलता हैं.

मन्दिर का नजारा बेहद रमणीय है मन्दिर परिसर में ही यज्ञशाळा और प्रसाद की दुकाने बनी हुई हैं. पीछे की तरफ एक सरोवर भी हैं जो बरसात के दिनों भरा रहता हैं.

यदि आप बदनोर किला देखने के बाद भीलवाड़ा में है तो हरणी महादेव का मंदिर के दर्शन करने के लिए आप रेलवे स्टेशन से सुभाष चौराहा और वहां से बाइला चौराहा जाए जहाँ से हरणी महादेव के लिए बस और रिक्शा आसानी से मिल जाता है जो 10 रूपये के किराए में आपकों मंदिर तक छोड़ देगे.

मंडल – Mandal Bhilwara In Hindi

Mandal Bhilwara In Hindi

जिला भीलवाड़ा एवं बदनोर किले के आस पास के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों में मंडल एक अच्छी जगह है जहाँ आप घूमने के लिए जा सकते हैं. मंडल भीलवाड़ा शहर से सोलह किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं.

मंडल में आप जगनाथ कछवाहा के दुर्ग को भी देख सकते है इसे बतीस खम्भों की छतरी भी कहाँ जाता हैं. जो राजस्थान की बेहतरीन छतरियों में गिनी जाती हैं. इसके निर्माण में बलुआ पत्थर के 32 खम्भों का इस्तेमाल हुआ था. छतरी में एक वृहत आकार का शिवलिंग भी स्थापित हैं.

गायत्री शक्ति पीठ – Gayatri Shakti Peeth Bhilwara In Hindi

Gayatri Shakti Peeth Bhilwara In Hindi

बदनोर किले को देखने के बाद आप भीलवाड़ा जिला मुख्यालय की ओर प्रस्थान कर रहे है तथा शहर के आस पास स्थित दर्शनीय स्थानों को देखना चाहते हैं तो भीलवाड़ा बस स्टैंड के निकट स्थित गायत्री शक्ति पीठ जा सकते हैं. सनातनी हिन्दू परम्परा में गायत्री पीठ का बड़ा महत्व है यह प्रमुख नारी शक्ति पीठ एवं मुख्य हिन्दू देवी के रूप में विख्यात हैं.

धनौप माता जी मंदिर – Dhanop Mataji Temple In Hindi

भीलवाड़ा के पर्यटन स्थलों में धनोप मंदिर अहम हैं. यह भीलवाड़ा शहर से अस्सी किलोमीटर दूर स्थित हैं. बदनोर किला देखने के बाद आप भीलवाड़ा से केकडी वाया फुलिया कलां से माताजी के धाम दर्शन करने जा सकते हैं.

९ मीटर का चरना(घाघरा) और ९ मीटर की ओडणी (साडी) की भव्य प्रतिमा मंदिर में हैं, मेवाड़ क्षेत्र की मुख्य शक्तिपीठ के रूप में धनोप मंदिर को जाना जाता हैं.

धनोप नामक ग्राम में स्थित यह मन्दिर लगभग 11 सौ वर्ष प्राचीन हैं. राजा धुन्धमार के नाम पर इसका नाम धनोप पड़ा था. मंदिर में चार देवियों अन्नपुर्णा, अष्टभुजा, चामुण्डा, बीसभुजा और कालिका के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सकता हैं, नव रात्र में यहाँ विशाल मेला भरता हैं.

श्री चारभुजा नाथ का मंदिर – Shri Charbhujanath Mandir In Hindi

यदि आप बिजनोर किले को देखने के बाद राजसमंद की ओर प्रस्थान करते है तो आप रास्ते में श्री गढ़बोर चारभुजा नाथ मंदिर के दर्शन कर सकते हैं. चारभुजा नाथ मन्दिर भगवान विष्णु को समर्पित है यह समूचे राजस्थान में धार्मिक पर्यटन का एक अहम स्थल हैं.

राजस्थान के राजसमंद ज़िले की कुम्भलगढ़ तहसील के गढ़बोर गांव में अवस्थित इस मन्दिर की उदयपुर से दुरी 112 तथा राजसमंद से 43 किमी हैं. इस भव्य मंदिर का निर्माण 1444 ईसवीं में राजा गंग सिंह ने करवाया था.

ऐसी दंत कथा है कि पांडवों ने हिमालय प्रस्थान से पूर्व चारभुजा नाथ जी की मूर्ति के दर्शन किये थे. मन्दिर के दरवाजे एवं गर्भग्रह सोने व् चांदी से निर्मित हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर को बचाने के लिए 125 युद्ध लड़े गये थे.

बागोर साहिब गुरुद्वारा – Bagore Sahib Gurudwara In Hindi

Bagore Sahib Gurudwara In Hindi

बदनोर किले को देखने के बाद दसवें गुरु गोविन्द सिंह की यादों को सहेजे हुए बागोर साहिब गुरूद्वारे में माथा टेकने जा सकते हैं यह प्राचीन गुरुद्वारा गुरु गोविन्द सिंह की यात्रा के उपलक्ष्य में निर्मित किया गया था. यह भीलवाड़ा की मंडल तहसील के बागोर गाँव में स्थित है जिसकी मंडल से दूरी 20 किमी के आसपास हैं.

चामुंडा माता का मंदिर – Chamunda Mata Mandir In Hindi

भीलवाड़ा और बदनोर किले के निकट स्थित दर्शनीय स्थलों में चामुंडा माता का ऐतिहासिक मन्दिर भी मुख्य है जो शहर से मात्र 5 किमी दूर हरणी की पहाड़ियों में स्थित हैं. इस मंदिर के सम्बन्ध में जन मान्यता है कि माँ चामुंडा चोरो से गाँव के लोगों को सावधान करती थी. वह आवाज देकर कहती थी एक बार एक चोर ने मा के हाथ पर वार किया तो देवी ने क्रुद्ध होकर तीन चोरों के सिर त्रिशूल से अलग कर दिए.

मिनाल वॉटरफॉल – Menal Waterfall In Hindi

आप भीलवाड़ा की यात्रा पर है और प्रकृति के मनोरम दृश्यो का लुफ्त उठाना चाहते है तो आपकों भीलवाड़ा से 80 किमी दूर मिनाल की यात्रा करनी होगी. मिनाल झरना जो डेढ़ सौ मीटर की उंचाई से गिरता है देखने में बेहद मन को शान्ति देने वाला अनुभव देता हैं. देश और राज्य के अन्य क्षेत्रों से लोग मिनाल झरने को देखने के लिए विशेष रूप से जुलाई और अक्टूबर के दौरान आते हैं.

भीलवाड़ा में खाने के लिए स्थानीय भोजनालय

बदनोर किला राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में स्थित है और बदनोर किले को देखने के लिए हर साल लाखों सैलानी देश और विदेश से भीलवाड़ा शहर पहुंचते हैं। अब जाहिर सी बात है कि जब यहां पर सैलानी आते हैं, तब वह यहां की लोकल चीजों को खाने का मजा भी उठाना चाहते हैं। भीलवाड़ा शहर में मुख्य तौर पर आपको मीठे और मसालेदार भोजन प्राप्त होता है।

यहां पर मिलने वाला गुलाब जामुन भी लोगों को काफी भाता है। इसके अलावा यहां पर अमरूद का गूदा, दूध, चीनी और एक चुटकी नमक के साथ लाल मिर्च मिला करके तैयार की गई आइसक्रीम भी लोगों को काफी पसंद आती है, साथ ही यहां पर खाने के लिए बाटी चूरमा, कचौड़ी, भेलपुरी जैसी चीजें भी उपलब्ध है, जिसे एक बार खा लेने पर व्यक्ति बार-बार उसे खाने की इच्छा रखता है।

बदनोर किला भीलवाड़ा कैसे जाए 

बदनोर किला भीलवाड़ा शहर में आसींद रोड पर तकरीबन 70 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। अगर आप बदनोर किला घूमने के लिए जाना चाहते हैं तो आप भीलवाड़ा से बस पकड़ सकते हैं और अगर आप बस पकड़ने में असमर्थ हैं तो आपको भीलवाड़ा में लोकल कई टेंपो भी मिल जाते हैं, जो आपको सीधा बदनोर किला लेकर के जाते हैं। अगर आपके पास खुद की गाड़ी है तो आप खुद की गाड़ी से भी बदनोर किला तक पहुंचा सकते हैं।

फ्लाइट से बदनोर फोर्ट कैसे पहुंचे?

अगर कोई व्यक्ति हवाई जहाज के जरिए बदनोर किला घूमने के लिए आने वाला है तो वह उदयपुर हवाई एयरपोर्ट का टिकट ले सकता है, क्योंकि बदनोर किले के पास में उदयपुर हवाई अड्डा मौजूद है, जिसकी दूरी भीलवाड़ा शहर से तकरीबन 165 किलोमीटर के आसपास में है।

उदयपुर में मौजूद यह हवाई अड्डा अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली और भारत के दूसरे शहरों से काफी अच्छी तरह से कनेक्टेड है। उदयपुर एयरपोर्ट पहुंचने के पश्चाताप लोकल टैक्सी के जरिए या फिर बस की सहायता से किले तक आसानी के साथ पहुंच सकते हैं।

बदनोर फोर्ट ट्रेन से कैसे पहुंचे?

कोई व्यक्ति अगर रेलवे के जरिए किला घूमने के लिए आने वाला है, तो उसे भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन पर उतरना चाहिए या फिर वह चाहे तो श्यामपुरा रेलवे स्टेशन पर भी उतर सकता है, क्योंकि बदनोर किले के सबसे पास में यही दोनों रेलवे स्टेशन पड़ते हैं। इन दोनों ही रेलवे स्टेशन पर इंडिया के तमाम राज्यों से ट्रेन का संचालन होता रहता है। यहां पर आप ट्रेन के जरिए आसानी से आ भी सकते हैं और आसानी से जा भी सकते हैं।

इस रेलवे स्टेशन पर उतरने के पश्चात आप लोकल टैक्सी के जरिए किले तक पहुंच सकते हैं या फिर आप चाहे तो किसी टेंपो की सहायता भी ले सकते हैं। सामान्य तौर पर यहां से अगर आप टैक्सी के जरिए किले तक जाते हैं तो आपको ₹200 के आसपास तक भाड़ा देना पड़ सकता है और अगर आप टेंपो के जरिए किले तक जाते हैं तो आपको ₹100 के आसपास तक भाड़ा देना पड़ सकता है।

बस से बदनोर किला कैसे पहुंचे?

अगर आपके पास खुद की गाड़ी है तो आप अपनी खुद की गाड़ी से सड़क के जरिए किले तक पहुंच सकते हैं क्योंकि भीलवाड़ा शहर जाने के लिए रोड की काफी अच्छी कलेक्टिविटी उपलब्ध है। आप चाहे तो बस के जरिए भी किले तक जा सकते हैं या फिर टैक्सी के जरिए भी जा सकते हैं अथवा खुद की गाड़ी के जरिए भी किले तक पहुंच सकते हैं।

बदनोर किले का प्रवेश द्वार

जैसे ही हम बदनोर किले में प्रवेश करते हैं वैसे ही हमें एक बड़ा सा गेट दिखाई देता है जिसका नाम बड़ा दरवाजा है। इसके अलावा आगे बढ़ने पर हमें किले के एंट्रेंस पर ही दो बहुत ही बड़े मंदिर दिखाई देते हैं  इसके बाद जैसे ही आप आगे थोड़ा सा बढ़ते हैं, आपको वहां पर कई अस्तबल भी दिखाई देते हैं, साथ ही अलग-अलग रुम वाली आपको एक जेल भी दिखाई देती है।

इसके अलावा किले में बहुत सारे कमरे भी हैं जिन्हें काफी बड़ा बनाया गया है, साथ ही हर कमरे के अंदर एक छोटी सी खिड़की भी दी गई है। इन खिड़कियों का निर्माण सिर्फ डेकोरेशन के लिए ही नहीं किया गया है बल्कि इन खिड़की का निर्माण हवा के आवागमन के लिए किया गया है, साथ ही युद्ध की परिस्थिति में खिड़कियों का इस्तेमाल अपने दुश्मनों को तीर मारने के लिए भी छिप करके किया जाता है।

इस खिड़की के जरिए किले में रहने वाले सिपाही अपने दुश्मन पर फोकस करके उस पर अटैक करते थे। इसके अलावा कुछ लोग खिड़की का इस्तेमाल बालकनी के तौर पर भी करते थे  बदनोर किले के पास में एक पैलेस भी मौजूद है जिसका नाम जल महल पैलेस है। इस पैलेस का निर्माण विनोद सागर तालाब के ऊपर किया गया है।

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