खान अब्दुल गफ्फार खान का जीवन परिचय | Khan Abdul Ghaffar Khan Biography In Hindi

खान अब्दुल गफ्फार खान का जीवन परिचय  Khan Abdul Ghaffar Khan Biography In Hindi: अब्दुल गफ्फार खान का जन्म एक पठान परिवार में 1890 में गाँव उतमैजी में हुआ था. उनकी प्राथमिक शिक्षा पेशावर में हुई. उसके बाद वह पढ़ने के लिए अलीगढ़ भेजे गये जहाँ उनको बहुत से शिक्षाशास्त्रियों व राष्ट्रवादियों से मिलने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ. उनमें से मुख्य थे उनके प्रधानाध्यापक माननीय रेवरेंडविग्रम, गांधी, जवाहरलाल नेहरू तथा अब्दुल कलाम आजाद आदि.

Khan Abdul Ghaffar Khan Biography In Hindi

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अब्दुल गफ्फार खान का एक महत्वूर्ण राजनैतिक जीवन 1919 के दौरान शुरू हुआ. जब उन्होंने रोलेट एक्ट के विरोध में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए खिलाफत आंदोलन में भाग लेना शुरू किया. उसके बाद उन्होंने 1920 से लेकर 1947 तक कांग्रेस के सभी क्रियाकलापों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जैसे असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक सत्याग्रह तथा भारत छोड़ो आंदोलन 1942 आदि.

वह कई वर्षों तक कांग्रेस की कार्यकारी समिति में एक अडिग कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे पर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निमंत्रण को सदैव अस्वीकार किया. इस बिच वह कई बार गिरफ्तार हुए तथा उनके जीवन के 14 वर्ष उन्होंने जेल में बिताएं. गांधी के साथ उसके प्रतिछाया स्वरूप रहते रहते उनके विचार व क्रियाकलाप हुबहू गांधी के तुल्य हो गये थे. जिसके चलते वे 1920 से ही सीमांत गांधी के रूप में पुकारे जाने लगे.

1939 में सीमांत गांधी ने द्वितीय विश्व युद्ध की नीतियों को अस्वीकार करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था. वह 1940 में पुनः कांग्रेस में शामिल हुए, जब युद्ध नीति में संशोधन किया गया. अब्दुल गफ्फार खान एक उत्कट स्वतंत्रता सेनानी के साथ साथ एक समर्पित समाज सुधारक भी थे.

सामाजिक पुनरुत्थान की आवश्यकता को महसूस करते हुए उन्होंने गांधी के सिद्धांतों को सर्वप्रथम स्वयं अपने जीवन में उतारा तथा उसका प्रचार करते रहे. वह दृढ़ता के साथ अहिंसा व खादी संस्कृति में विश्वास करते थे. वह ग्रामीण कुटीर उद्योगों तथा महिलाओं व दबाए गये लोगों के उत्थान हेतु पूर्ण रूप से जागरूक थे. उन्होंने सामाजिक परिवर्तन के सकारात्मक पहलू व उद्देश्यों को कार्यान्वित करते हुए खुदाई खिदमतगार नामक संस्था की स्थापना 1929 में की.

यह संस्था रेड शर्ट के नाम से भी जानी गई. उनकी उत्साहपूर्ण सामाजिक परिपक्वता को देखते हुए फखार ए अफगान उपाधि से विभूषित किया गया. उन्होंने 1940 में एक दूसरी खुदाई खिदमतगार संस्था की स्थापना की जिसका नाम मकर ई एलाई ई खुदाई खिदमतगार रखा था.

सीमांत गांधी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के समर्थक थे. उन्होंने अपने प्रान्त में बहुत से राष्ट्रीय स्कूलों की स्थापना की. उनमें से विशेष रूप से चर्चित रहे उतमंजा का आजाद हाई स्कूल तथा अंजुमन उल अफगानी. उन्होंने 1928 में पस्तो भाषा में एक मासिक स्कूल पख्तून का सम्पादन किया, जो कि 1931 में बंद हो गई. पुनः कुछ वर्ष बाद वह दस रोजा नाम से प्रकाशित होने लगी.

अब्दुल गफ्फार खां एक पवित्र मुसलमान थे तथा धर्म निरपेक्षता में विश्वास करते थे. यह जातीय राजनीती को दंड स्वरूप मानते थे तथा मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान राष्ट्र बनाने के सख्त विरोधी थे तथा कभी नहीं चाहते थे कि देश का बंटवारा हो.

विभाजन के बाद उन्होंने पठानों के लिए अलग पख्तूनिस्तान की स्थापना के लिए एक अलग संघर्ष की शुरुआत की तथा इस सम्बन्ध में पाकिस्तान सरकार उन्हें कई बार जेल में बंद करती रही. वह देश से निर्वासन स्वरूप कई वर्ष अफगानिस्तान में रहे.

1969 में उन्हें गांधी जन्म शताब्दी समारोह में भारत में आमंत्रित किया गया. 1987 में उन्हें भारत के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया. ठीक उसके एक वर्ष बाद 1988 में खान अब्दुल गफ्फार खान का देहांत हो गया.

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