मोहम्मद अली जिन्ना की जीवनी | Muhammad Ali Jinnah Biography in Hindi

मोहम्मद अली जिन्ना की जीवनी Muhammad Ali Jinnah Biography in Hindi: अविभाजित भारत के इतिहास के कुछ नामों तैमूर, बाबर और औरंगजेब के बाद किसी घटिया इंसान का नाम आता हैं तो वह  मोहम्मद अली जिन्ना  का  ही  हैं. अपने स्वार्थ तथा अग्रेजों के बहकावे में आकर इस आदमी की वजह से भारत का विभाजन हुआ था, नयें इस्लामिक राष्ट्र ने इसे अपना पिता अर्थात कायदे आजम माना. आज के लेख में आपकों संक्षिप्त में मोहम्मद अली जिन्ना का जीवन परिचय, जीवनी इतिहास बता रहे हैं.

मोहम्मद अली जिन्ना जीवनी Muhammad Ali Jinnah Biography Hindi

Muhammad Ali Jinnah Biography Hindi

Muhammad Ali Jinnah in Hindi: मोहम्मद अली जिन्ना का जन्म 25 दिसम्बर 1876 को कराची में हुआ था.इसने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा कराची व बम्बई में प्राप्त की. जिन्ना ने 1892 से 1896 तक कानून की पढ़ाई लंदन के लिंकन इन से करने गया था. भारत वापिस आने के बाद उसने बम्बई उच्च न्यायालय में वकालात शुरू की.

जिन्ना ने अपने राजनैतिक जीवन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ शुरू किया और वह उस समय के प्रसिद्ध नेता गोपाल कृष्ण गोखले से विशेष रूप से प्रभावित हुआ.उस समय और दूसरे भारतीय नेताओं की तरह वह मुस्लिम समुदाय से कोई विशेष रूप से आकर्षित या प्रभावित नही था. वस्तुत उसने 1906 में एक स्मारक पत्र पर हस्ताक्षर किया जिसके अंतर्गत उसने मुसलमानों की अलग से हिमायत करने का विरोध किया था.

1909 में जिन्ना बम्बई से मुसलमानों के प्रतिनिधि के रूप में विधान परिषद में नियुक्त हुआ. 1913 में वह अखिल भारतीय मुस्लिम लीग में सम्मिलित हो गया. मई 1914 में वह कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में इंग्लैंड की यात्रा पर गया.

1915 में कांग्रेस व मुस्लिम लीग को एक मंच पर लाने में जिन्ना ने सक्रिय भूमिका निभाई जिसका परिणाम रहा लखनऊ पैक्ट. जिसके अंतर्गत दोनों दल संयुक्त संविधान के द्वारा अपने देश की सरकार की मांग के लिए ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध सहमत हुए.

1916 में मोहम्मद अली जिन्ना को मुस्लिम लीग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. 1917 में वह एनी बेसेंट द्वारा संचालित होमरूल आंदोलन में शामिल हो गया तथा इसकी बम्बई शाखा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. 1919 में जिन्ना ने रोलेट एक्ट के खिलाफ ब्रिटिश विधान परिषद से त्यागपत्र दे दिया.

Muhammad Ali Jinnah Biography

कांग्रेस पार्टी में गांधी के शामिल हो जाने के बाद जिन्ना का सम्बन्ध कांग्रेस के साथ कड़वाहट में बदलने लगा. कांग्रेस पार्टी में बाद में जोड़ी गई नीतियों के खिलाफ वह खुलकर निंदा करने लगा और असहयोग आंदोलन को सख्ती के साथ अस्वीकार कर लिया.

इस समय तक हिंदू व मुसलमानों के बिच में महत्वपूर्ण वैचारिक भिन्नता स्पष्ट रूप से झलकने लगी. उसके बाद जिन्ना ने कांग्रेस व होमरूल लीग दोनों से त्यागपत्र दे दिया और पूर्णतया अपने आप को मुस्लिम लीग की राजनीति से जोड़ लिया. 1928 में उसने नेहरू रिपोर्ट में संशोधन हेतु प्रस्ताव पारित किया जिसके अंतर्गत मुसलमानों के लिए अत्यधिक सुविधाओं व रियायतों की मांग की.

1929 में जिन्ना ने मुसलमानों के लिए 14 सूत्रीय मांगों का प्रस्ताव रखा. जिन्ना ने 1930 में इंग्लैंड के राजा की गुप्त सभा में भाग लेने के लिए इंग्लैंड की यात्रा की तथा वहां से 1935 तक वह भारत वापिस नहीं आया. उसके बाद उसे मुस्लिम लीग का नेतृत्व करने के लिए निमंत्रित किया जिसे उसने स्वीकार कर लिया.

1937 के चुनावों में कांग्रेस की तुलना में मुस्लिम लीग का प्रदर्शन मुसलमानों की उन्नति के मार्ग में असंतोषजनक सिद्ध हुआ. चुनाव के बाद जिन्ना ने कठोर कदम उठाते हुए कांग्रेस व मुस्लिम लीग के बिच शांति या सांत्वना देने वाले सभी मार्ग अवरुद्ध कर दिए. उसने मांग कि की कांग्रेस को पूर्ण रूप से हिन्दुओं की पार्टी तथा मुस्लिम लीग को मुसलमानों की पार्टी घोषित किया जाए.

अन्तः मुस्लिम लीग ने जिन्ना के नेतृत्व में अलग प्रान्त स्थापित करने में सफलता प्राप्त की और इस तरह 14 अगस्त 1947 को एक अलग देश पाकिस्तान की स्थापना कर दी गई. जिन्ना पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल के पर नियुक्त किये गये. सितम्बर 1948 में कराची में उनका देहांत हो गया.

यह भी पढ़े

आशा करता हूँ दोस्तों Muhammad Ali Jinnah Biography in Hindi का यह लेख आपकों पसंद आया होगा. यदि आपकों Muhammad Ali Jinnah Biography में दी गई जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *