History Behind Bhangarh Fort In Hindi | भानगढ़ किले का इतिहास और रोचक कहानी

History Behind Bhangarh Fort In Hindi: राजस्थान राजा महाराजाओं की स्थली रही हैं. यहाँ पर आपकों कई किले एवं भव्य महल देखने को मिलेगे जिनमे bhangarh ka kila प्रमुख हैं. bhangarh fort राजस्थान के अलवर जिले में स्थित हैं. यह अपनी bhangarh fort haunted stories के कारण भूतहा किला भी कहलाता हैं.

bhangarh story और bhangarh fort story in hindi के सम्बन्ध में लोगों की अलग अलग मान्यताएं रहती हैं. bhangarh fort haunted तभी तो यहाँ रात को रूकने से मनाही की जाती हैं. यह भी कहा जाता है जो रात को इस किले में रूकता है वह सुबह तक मिलता नहीं हैं. यदि मिलता भी हैं तो सही हालत में नही.

bhangarh fort at night यानी रात्री के समय bhangarh kila कैसा होता हैं. यहाँ की Ghost Stories क्या विशवास करने लायक हैं. आज भी bhangarh fort ghost का निवास स्थान हैं. क्या किले के दर्शन में आप कैसे कर सकते हैं. यहाँ आपकों सम्पूर्ण जानकारी दे रहे हैं.

HISTORY BEHIND BHANGARH FORT IN HINDI भानगढ़ किले का इतिहास और रोचक कहानी

History Behind Bhangarh Fort In Hindi | भानगढ़ किले का इतिहास और रोचक कहानी

भानगढ़ किला 1613 में माधोसिंह ने इसका निर्माण करवाया था. अलवर के सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र में स्थित यह किला भारत के सबसे डरावने किलों में गिना जाता हैं. यहाँ के लोगों के विशवास और धारणाओं के अनुसार यहाँ कई असाधारण घटनाएं घटित होती हैं. किसी प्रेतात्मा का छाया होने के कारण यह किला इंसानों से पूरी तरह उजड़ कर वीरान हो गया.

भारतीय पुरातन विभाग ने यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए बोर्ड लगाकर स्पष्ट चेतावनी दी गयी है कि किले में रात के बाद ठहरने की मनाही हैं. यदि कोई इस चेतावनी को एवाइड करता है तो उसकी सुरक्षा की गारंटी स्वयं की होगी.

Bhangarh History – Bhangarh Fort History in Hindi – भानगढ़ किले का इतिहास

भानगढ़ का किला, राजस्थान के अलवर जिले में आता हैं. किला तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ हैं. यही वजह है कि सुरक्षित स्थल महसूस होने के कारन यहाँ के शासक ने इस किले का निर्माण करवाया होगा. किले का बाहरी परकोटा एक मजबूत दीवार के साथ बना हुआ है जो दोनों तरफ पहाड़ियों से मिलकर किले को और अधिक सुरक्षित बनाती हैं.

भानगढ़ किले के मुख्य द्वार पर बजरंग बली का मन्दिर बना हुआ है. इसके बाद किले के बाजार परिसर की शुरुआत होती हैं. बाद में आते है किले के प्राचीन राजमहल और यहाँ के मन्दिर. यहाँ एक बावड़ी भी है जो संभवतया उस समय के लोगों के लिए स्नान करने के लिए उपयोग में ली जाती थी, किले के मुख्य मन्दिरों में भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर हैं.

Hindi History of BHangadh भानगढ़ का इतिहास (History Of Bhangarh)

most haunted place in india में शुमार इस किले को भूतों का भानगढ़ भी कहा जाता हैं. इसे माधोसिंह प्रथम ने बनवाया था. इनके दादाजी का नाम भानसिंह था इन्ही के नाम पर किले का नाम भी भानगढ़ रखा गया था. वर्तमान में यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की निगरानी में हैं. विभाग की ओर से किले की पहरेदारी की जाती हैं.

सत्रहवी सदी में भानगढ़ एक आबाद एवं खुशहाल किला हुआ करता था. इसके निर्माता माधोसिंह मुगल सम्राट अकबर की सेना में जनरल हुआ करते थे. विशाल आकार में निर्मित इस किले में तक़रीबन दस हजार लोग रहा करते थे. किले में प्रवेश के पांच द्वार बने हुए हैं.

यह किला मुगलों की छत्रछाया में ही रहा. किला बनने के ३ सदी तक यहाँ सब कुछ सामान्य था. भगवंत दास के छोटे बेटे व अम्बर किले में रहने लगे. इसके बाद यह माधोसिंह के हतः में आ गया. माधोसिंह के बाद इसके वंशजों ने किले पर शासन किया. 1722 में इसी वंश के हरिसिंह उत्तराधिकारी बने. इनके दो बेटे थे. यह मुगल काल था तथा दिल्ली की सत्ता औरंगजेब के हाथ में थी. धर्म परिवर्तन उसका पहला काम था. उसने हरिसिंह के दोनों बेटों को इस्लाम धर्म स्वीकार करवाकर उन्हें मोहम्मद कुलीज एवं मोहम्मद दहलीज का नाम देकर भानगढ़ का किला उन्हें सौप दिया. उसी समय आमेर के महाराजा सवाई जय सिंह ने उनकी हत्या कर किला वापिस माधो सिंह के पुत्रों को सुपर्द कर दिया था.

भानगढ़ किले की कहानी (the story of bhangarh fort In Hindi)

भानगढ़ के भुतहा किला बनने के पीछे राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की कहानी बताई जाती हैं. ऐसा कहा जाता है कि रत्नावती उस समय की अप्रितम सुन्दरी थी. राज्य में उसके समान कोई सुंदर लडकी नहीं थे. हर कोई उसके रूप से मोहित हो जाता था. कई बड़े राजघरानों के राजकुमार उससे विवाह करने को ललायित रहते थे.

एक दिन रत्नावती अपनी कुछ सहेलियों के साथ किले में स्थित त्रिपोलिया बाजार में गयी तथा एक इतर की दूकान पर ठहरी. उसने एक सुगन्धित इत्र की शीशी को उठाया और सुगंध लेने लगी. उसी समय वह तांत्रिक दूर खड़ा रत्नावती को देख रहा था. उसने देखते ही राजकुमारी को पाने की तमन्ना जग गयी.

वह काले जादू की कला में माहिर था. उसने राजकुमारी को पाने के लिए उसने उस शीशी पर अपना जादू चला दिया. पास ही खड़े उन्के किसी पहरेदार को इस वाकया की जानकारी हो गयी तो उसने रत्नावती को बता दिया. रत्नावती ने इतना सुनते ही उस इत्र की शीशी को पास ही पत्थर पर पटककर फोड़ दिया.

राजकुमारी ने जिस पत्थर से शीशी को तोडा था वह पत्थर लुढककर उस तांत्रिक का पीछा करने लगा और कुछ ही दूरी पर उस तांत्रिक पर पत्थर गिरने से उसकी मृत्यु हो गयी. मरते वक्त उसने इस किले को श्राप दिया कि जल्द ही तुम सब मारे जाओगे तथा तुम्हारी आत्माएं इसी किले में भटकती रहेगी.

इस घटना के कुछ दिन बाद ही अजबगढ़ और भानगढ़ के बीच यह भयंकर युद्ध हुआ. इस युद्ध में किले में रहने वाले समस्त लोग मारे गये जिनमें राजकुमारी रत्नावती भी थी. अपने श्राप के मुताबिक़ ऐसा माना जाता है वो मरने वाली समस्त आत्माएं रूह बनकर आज भी किले में भटकती है इसी कारण यहाँ रहस्यमयी घटनाएं घटित होती हैं.

इस किले के साथ एक और किवदन्ती बताई जाती है. कुछ लोगों के अनुसार यह घटना बाबा बालकनाथ के साथ जुडी हुई हैं. जब इस किले का निर्माण शुरू किया जा रहा था तो बाबा ने भगवंत दास को यह बताया था कि आप किला अपने पसंद की जगह पर बनाओं मगर उस किले की छाया मेरे पूजा स्थल अथवा आश्रम तक नहीं पहुचनी चाहिए, यदि ऐसा हुआ तो किले में कोई जीवित नहीं बचेगा.

जो भी भानगढ़ का किला आज एक रहस्यमयी किला हैं. लोग बताते है कि यहाँ भूतों की बात सत्य हैं. किले के खंडहर हो चुके महलों में आज भी रात को भूत बसते हैं मगर वे किले की परिधि तक ही रहते हैं. प्रवेश द्वार पर भोमिया का स्थान होने के कारण वो इस परिधि से बाहर नहीं आते हैं. कुछ लोग किले में रहने का साहस करते है मगर रात्रि को उन वीरान महलों में नहीं जाना चाहिए. हम इन्सान है हममे वो क्षमता नहीं है जो किसी प्राचीन इतिहास अथवा श्राप को बदल सके. इसलिए यदि आप भी भानगढ़ की यात्रा पर जाएं तो ऐसा दुस्साहस न करे.

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