लोहागढ़ किले का इतिहास | Lohagarh Fort History In Hindi

Lohagarh Fort History In Hindi: भरतपुर का लोहागढ़ किला जिसे अजेय दुर्ग अथवा मिट्टी दुर्ग के नाम से भी जाना जाता हैं. 1733 ई में महाराजा सूरजमल ने इसका निर्माण कराया था. भरतपुर के जाट शासकों के शौर्य के प्रतीक लोहागढ़ अथवा भरतपुर फोर्ट को भारत का एकमात्र अभेद्य किला माना जाता हैं. कोई भी शक्ति इसकों भेद पाने में कामयाब नहीं रही. तेरह बार अंग्रेजों ने भी इस पर आक्रमण किया, मगर अपनी शक्ति से इस जाट रजवाड़े को झुका न पाने के बाद शर्म से सिर झुकाकर उन्हें लौटना पड़ा था. लोहागढ़ किले का इतिहास | Lohagarh Fort History In Hindi

लोहागढ़ किले का इतिहास | Lohagarh Fort History In Hindi

जाटों के इतिहास और उनकी आन बान का स्वरूप कही देखने को मिलता है तो वह लोहागढ़ और भरतपुर राज्य के इतिहास में ही मिलता हैं. लोहागढ़ के दुर्ग को पूर्ण रूप से कच्ची मिट्टी के गारे से बनाया गया था. इस किले में तुच्छ भर भी लोहे का उपयोग नहीं किया गया था. यही वजह है कि इसे भारत का अजेय गढ़ और सबसे शक्तिशाली किला कहा जाता हैं.

अंग्रेजों की तोप के गोले किले की गारे की दीवारे से टकराने के बाद बेअसर होकर खुदी हुई खाई के जल में जा गिरते थे. होल्कर नरेश जशवंत राव भागकर जब जाट राजा रणजीत सिंह के पास आए और शरण मांगी तो इस जाट सम्राट ने उनकी सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी लेते हुए वचन दिया कि वे अपना सब कुछ न्यौछावर करके भी अपने अतिथि की रक्षा करेगे.

यह बात ब्रिटिश कमांडर लार्ड लेक को बहुत बुरी लगी तथा उसने रणजीत सिंह को एक संदेश भिजवाया और कहा गया कि वे होल्कर को उनके हवाले कर दे. यदि वे ऐसा नहीं करते है तो अपनी मृत्यु के जिम्मेवार स्वयं होंगे. इस पर उन्होंने लेक को जवाब भिजवाया कि जाटों ने अपनी वीरता के दम पर सिर उठाकर जीना सीखा है सिर झुकाना नही.

यदि तुम्हारे कुछ सपने है तो आजमा कर देख ले. रणजीत सिंह के इस जवाब में अंग्रेजी हुकुमत को खुली चुनौती थी. जिसे लेक ने स्वीकार किया तथा अपार सेना बल तथा बन्दूकों तथा तोप के साथ लोहागढ़ को घेर लिया, तोपे गोले दागती रही, मगर हर एक गोला गोरी सरकार पर तमाचे की तरह निष्फल होकर गिरता रहा. अंग्रेजों ने लोहागढ़ को अपना लक्ष्य बना लिया कुल तेरह बार तोप गोलों से किले पर आक्रमण किया मगर किले को जीतना तो दूर वे एक छेद करने में भी नाकाम रहे.

किले के एक द्वार पर लगा अष्टधातु का विशाल द्वार भी मध्यकाल में जाटों की वीरता का प्रतीक था. यह विशाल दरवाजा अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ आक्रमण के समय अपने साथ दिल्ली ले आया था. मगर जवाहर सिंह जाट 1765 ई. में दिल्ली पर आक्रमण कर इन्होने वो दरवाजा वहां से उठा लाए और अपने किले के द्वार पर लगा दिया. इस विजय के उपलक्ष्य में लोहागढ़ में फतह बुर्ज का निर्माण करवाया गया था. भरतपुर के शासकों का राज्याभिषेक किले के जवाहर बुर्ज में किया जाता था.

लोहागढ़ किले का इतिहास Lohagarh Fort History

राजस्थान का सिंहद्वार और पूर्वी सीमान्त का प्रहरी लोहागढ़ का किला जाट राजाओं की वीरता और शौर्यगाथाओं को अपने में समेटे हुए हैं. भरतपुर के महाराजा सूरजमल द्वारा विनिर्मित यह किला अपनी अजेयता और सुद्रढ़ता के लिए प्रसिद्ध रहा है. इस किले ने मुगल आक्रमणों का सामना किया और अंग्रेज भी इसे नहीं जीत पाए.

यही कारण है कि इसे लोहागढ़ की संज्ञा दी गई. किले की सुद्रढ़ता के बारे यह कवि का यह दोहा प्रसिद्ध हैं.

दुर्ग भरतपुर अडग जिमि, हिमगिरी की चट्टान
सूरजमल के तेज को, अब लौ करत बखान

यह किला आयताकार है जो 6.4 किलोमीटर के क्षेत्र में विस्तृत हैं. यह किला दोहरी प्राचीर से घिरा हुआ हैं. इसकी भीतरी प्राचीर इट पत्थर की बनी हुई हैं और बाहरी प्राचीर मिट्टी की बनी हुई है. मिट्टी की प्राचीर पर तोप के गोलों का कोई असर नहीं होता था.

लोहागढ़ के चारो ओर एक गहरी खाई और मिट्टी का विशाल परकोटा किले के सुरक्षा कवच का कार्य करता था. किले की प्राचीर में 8 विशाल बुर्जे, 40 अर्धचन्द्राकार बुर्जे तथा दो विशाल दरवाजे हैं. किले का उत्तरी द्वार अष्टधातु दरवाजा महाराजा जवाहरसिंह 1765 ई में मुगलों के शाही खजाने से लूटने के साथ ऐतिहासिक लाल किले से उतार लाए थे.

जवाहर बुर्ज जवाहरसिंह की दिल्ली विजय की स्मृति में निर्मित हैं. फतेह बुर्ज 1806 ई में अंग्रेजों पर विजय के फलस्वरूप बनाई गई. किले में दस दरवाजे हैं, जिनमें सूरजपोल प्रमुख हैं.

लोहागढ़ के किले पर मराठों के अनेक आक्रमण हुए पर उन्हें सफलता नहीं मिली. महाराजा रणजीत सिंह द्वारा जसवंत राव होल्कर को शरण देने से नाराज अंग्रेजो ने जनवरी 1805 से अप्रैल 1805 तक जनरल लेक के नेतृत्व में किले को घेरे रखा परन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली. अन्तः विवश होकर अंग्रेजों को जाट राजा से संधि करनी पड़ी.

अंग्रेजों की पराजय समकालीन लोकगीतों में इस प्रकार अभिव्यक्त हुई हैं.

गोरा हट जा रे राज भरतपुर को

जनवरी 1826 में भरतपुर राजघराने के आंतरिक कलह का लाभ उठाकर अंग्रेजों ने इस किले पर अधिकार कर लिया. लोहागढ़ के किले में कोठी खास, महल खास, रानी किशोरी और रानी लक्ष्मी के महल का शिल्प दर्शनीय हैं. गंगा मंदिर, राजेश्वरी मंदिर, बिहारी जी का मंदिर तथा जामा मस्जिद का शिल्प बेजोड़ हैं.

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